दरभंगा राजपरिवार की एंट्री से सियासी हलचल, संजय सारावगी और गोपाल जी ठाकुर की कुर्सी पर खतरा?

Authored By: सतीश झा

Published On: Tuesday, September 2, 2025

Last Updated On: Tuesday, September 2, 2025

Darbhanga Royal Family Politics से बिहार की राजनीति में हलचल, संजय सारावगी और गोपाल जी ठाकुर की सीट पर खतरा.
Darbhanga Royal Family Politics से बिहार की राजनीति में हलचल, संजय सारावगी और गोपाल जी ठाकुर की सीट पर खतरा.

बिहार की सियासत में लंबे समय से दूर रहे दरभंगा राजपरिवार के सक्रिय राजनीति में कदम रखने की चर्चाओं ने नए समीकरण खड़े कर दिए हैं. दरभंगा, जिसे मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है, वहां की राजनीति पर अब राजपरिवार की वापसी का सीधा असर पड़ सकता है.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Tuesday, September 2, 2025

Darbhanga Royal Family Politics: राजपरिवार अगर सत्ता में अपनी हिस्सेदारी के लिए आगे आता है, तो मौजूदा भाजपा नेताओं—संजय सारावगी (विधायक) और गोपाल जी ठाकुर (सांसद)—की राजनीतिक जमीन पर चुनौती खड़ी होना तय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को सबसे बड़ा असमंजस इसी बात का है कि राजपरिवार और मौजूदा नेताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा.

राजनधानी दिल्ली में दरभंगा राजपरिवार के एक सदस्य का 18वें जन्मदिन पर भाजपा (BJP) और संघ (RSS) के बड़े पदाधिकारी द्वारा आर्शीवचन. इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति बेहद अहम संकेत देती है. वर्तमान राजनीति में ये दोनें व्यक्ति बेहद अहम और संभावनाशील हैं. ऐसे में दरभंगा राजपरिवार के कपिलेश्वर सिंह (Kapileshwar Singh) जब अपने सुपुत्र अरिहंत सिंह (Arihant Singh) अठारहवीं वर्षगांठ पर भव्य आयोजन करते हैं, जिसमें समाज के कई वर्गों की उपस्थिति होती है, तो इसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले ही जाएंगे. सियासी शतरंज पर यदि कपिलेश्वर सिंह की सभी चालें दुरूस्त रहीं तो दरभंगा के वर्तमान विधायक और वर्तमान में बिहार सरकार के मंत्री संजय सरावगी और दरभंगा लोकसभा के वर्तमान सांसद गोपाल जी ठाकुर के पेशानी पर पसीना आना स्वाभाविक होगा.

आने वाला समय होसबोले और भूपेंद्र का

भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव बीते वर्षों से ही लंबित है. बीते वर्ष में कई नेताओं के नाम को लेकर चर्चा हुई. वर्तमान में केंद्रीय मंत्री का दायित्व निभा रहे भूपेंद्र यादव अपने सांगठनिक क्षमता का लोहा कई बार मनवा चुके हैं. मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का चुनाव प्रभारी रहकर इन्होंने पार्टी को सत्ता दिलवाई है. संघ के प्रिय लोगों में भी इनका नाम है. ऐसे में यदि ये भाजपा के अगले अध्यक्ष होते हैं, तो किसी को कोई हैरत नहीं होना चाहिए.

इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत भी चला-चली की बेला में है. कई वर्षों से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं और स्वयं ही 75 वर्षों की समय-सीमा को दोहरा चुके हैं. इसी साल वे भी इस समय सीमा की परिधि में आ रहे हैं. ऐसे में वर्तमान सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले को सरसंघचालक बनाया जा सकता है.

“जब ये दोनों एक साथ, एक मंच पर आए, तो राजनीतिक मायने निकालने में किसी को अधिक दिमागी जोर लगाना नहीं होगा.”

कामेश्वर सिंह और दरभंगा का विकास

दरभंगा, मिथिला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का केंद्र रहा है. यहाँ की पहचान केवल इसके राजवंश या प्राचीन विरासत से नहीं है, बल्कि कामेश्वर सिंह जैसे दूरदर्शी और प्रगतिशील व्यक्तित्व से भी है, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, कला और सामाजिक उत्थान में अमूल्य योगदान दिया.

कामेश्वर सिंह दरभंगा राजघराने के अंतिम महाराजा ही नहीं, बल्कि आधुनिक सोच वाले सुधारक भी थे. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों को उदार दान दिया. दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान उनके दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं. यही कारण है कि उन्हें केवल एक राजा नहीं, बल्कि समाज-सेवी और शिक्षा-प्रेमी शख्सियत के रूप में भी याद किया जाता है.

आज जब हम दरभंगा के विकास की बात करते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या हम कामेश्वर सिंह की सोच और उनके द्वारा दिए गए आधार को आगे बढ़ा पाए हैं? दरभंगा में आज भी बुनियादी ढाँचे की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी और रोजगार की समस्या बनी हुई है. जबकि यह शहर अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता के कारण विकास का आदर्श मॉडल बन सकता था.

दरभंगा एयरपोर्ट के सक्रिय होने के बाद यहाँ नई संभावनाएँ खुली हैं, लेकिन इनका लाभ तभी मिलेगा जब क्षेत्र में उद्योग, आईटी हब और आधुनिक शिक्षा केंद्र विकसित किए जाएँ. कामेश्वर सिंह के समय की शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थाएँ उस युग में मिसाल थीं, लेकिन आज हमें उनकी पुनर्स्थापना और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है.

संजय सारावगी

दरभंगा शहरी सीट से लगातार जीत दर्ज करने वाले सारावगी भाजपा के मजबूत स्थानीय चेहरे हैं. मगर राजपरिवार का करिश्मा और सामाजिक पकड़ उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है.

गोपाल जी ठाकुर

दरभंगा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद ठाकुर को मिथिला क्षेत्र में व्यापक समर्थन हासिल है. लेकिन अगर राजपरिवार ने सीधे लोकसभा की दावेदारी ठानी, तो ठाकुर के सामने कड़ा मुकाबला हो सकता है.

राजपरिवार का प्रभाव

दरभंगा राजपरिवार ने स्वतंत्रता के बाद भले ही राजनीति से दूरी बनाई, लेकिन समाज में उनकी पकड़ और सम्मान अब भी बरकरार है. यही कारण है कि उनकी एंट्री को मिथिला की राजनीति में “गेमचेंजर” माना जा रहा है.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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