गर्मी व प्रदूषण से बढ़ेगा मौत का खतरा, सदी के अंत तक हर पांचवां व्यक्ति स्वास्थ्य संकट में

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Tuesday, December 3, 2024

Last Updated On: Wednesday, February 5, 2025

rising global temperatures
rising global temperatures

हाल के वर्षों में न केवल तापमान में साल दर साल बढ़ोत्तरी हो रही है, बल्कि प्रदूषण की स्थिति भी बद से बदतर होती जा रही है। ये दोनों स्थितियां मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। यदि गंभीरता के साथ समुचित उपाय नहीं किए गए, तो प्रदूषण और गर्मी के कारण होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ सकती है...

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Wednesday, February 5, 2025

हाइलाइट्स

  • जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई जानकारी, प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका न्यूज मेडिकल लाइफ साइंस में प्रकाशित हुआ शोध।
  • इस सदी के अंत तक हर साल तीन करोड़ लोगों की जा सकती है जान।
  • सदी के अंत तक दुनिया की 20% आबादी यानी हर पांचवां व्यक्ति गंभीर स्वास्थ्य खतरों का सामना करेगा।
  • वायु प्रदूषण के कारण 2000 से 2010 के बीच हर साल औसतन 41 लाख मौतें हुईं।

इस वर्ष अप्रैल-मई-जून में दिल्ली-एनसीआर सहित लगभग समूचे उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। कई बार तो तापमान को 50 डिग्री सेल्सियस या इससे भी ऊपर चला गया। इससे जनजीवन तो बेहाल हुआ ही, लोगों को इसके दुष्प्रभाव का डर भी सताने लगा। दुनिया में बढ़ती गर्मी और वायु प्रदूषण से मौतों का आंकड़ा भयावह रूप ले सकता है। इस बारे में जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि इस दिशा में जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सदी के अंत तक हर साल तीन करोड़ लोगों की जान जा सकती है। यह शोध प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका न्यूज मेडिकल लाइफ साइंस में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के खतरों पर एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों की संख्या पांच गुना और तापमान वृद्धि से होने वाली मृत्यु दर सात गुना तक बढ़ने का अनुमान है। सदी के अंत तक दुनिया की 20% आबादी यानी हर पांचवां व्यक्ति गंभीर स्वास्थ्य खतरों का सामना करेगा।

rising deaths due to pollution

वायु प्रदूषण से पांच गुना बढ़ेंगी मौतें

वायु प्रदूषण के कारण 2000 से 2010 के बीच हर साल औसतन 41 लाख मौतें हुईं। यदि वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो यह आंकड़ा पांच गुना बढ़कर 1.95 करोड़ तक पहुंच सकता है।

तापमान से जुड़ा खतरा ज्यादा घातक

शोध के अनुसार, वर्ष 2000 से 2010 के बीच हर साल बढ़ती गर्मी के कारण औसतन 16 लाख लोगों की मौत हुई। माना जा रहा है कि यदि तापमान बढ़ने की यही दर बनी रही तो सदी के अंत तक यह आंकड़ा सात गुना बढ़कर 1.08 करोड़ तक पहुंच सकता है।

क्षेत्रीय असर का अनुमान

अध्ययन में बताया गया है कि दक्षिण और पूर्वी एशिया में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण वायु प्रदूषण से संबंधित मौतों का खतरा ज्यादा होगा। वहीं, पश्चिमी यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती गर्मी से स्वास्थ्य समस्याएं अधिक गंभीर होंगी।

क्या करना होगा ?

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने और वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। साफ ऊर्जा और पर्यावरणीय नीतियों को प्राथमिकता देकर इन भयावह आंकड़ों को कम किया जा सकता है।

अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
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