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BUDGET 2026: टैक्सपेयर्स की उम्मीदों का बजट, क्या इस बार जेब को मिलेगी सुकून की सांस?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, January 30, 2026
Last Updated On: Friday, January 30, 2026
BUDGET 2026: बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कैपिटल गेंस टैक्स के जटिल नियमों को सरल बना सकती हैं. एसटीटी और एलटीसीजी के दोहरे टैक्स बोझ को कम करने, शेयर और प्रॉपर्टी के होल्डिंग पीरियड में एकरूपता लाने और डेट फंड निवेशकों को राहत देने जैसे बड़े बदलाव संभव हैं, जिससे आम निवेशकों की बचत बढ़ सकती है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, January 30, 2026
BUDGET 2026: बजट 2026 की उलटी गिनती शुरू होते ही देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिक गई हैं. बढ़ती महंगाई, निवेश पर बढ़ता टैक्स और जटिल नियमों के बीच आम आदमी यह उम्मीद कर रहा है कि इस बार बजट उसकी जेब पर कुछ रहम जरूर करेगा. खासतौर पर शेयर बाजार और प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के लिए ‘कैपिटल गेंस टैक्स’ सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. बीते कुछ सालों में नियमों में बार-बार बदलाव ने निवेशकों को उलझा दिया है. ऐसे में उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार टैक्स सिस्टम को सरल बनाकर बड़ी राहत का ऐलान कर सकती है.
जब एलटीसीजी टैक्स नाम की चीज़ नहीं थी
अगर इतिहास पर नजर डालें, तो एक दौर ऐसा भी था जब इक्विटी निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस यानी LTCG टैक्स से पूरी तरह छूट थी. साल 2004 में सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) लागू किया और बदले में लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर LTCG टैक्स खत्म कर दिया गया. यह निवेशकों के लिए सुनहरा समय था, क्योंकि मुनाफे पर सीधा टैक्स नहीं देना पड़ता था. इससे शेयर बाजार में निवेश को जबरदस्त बढ़ावा मिला और आम लोग भी बाजार से जुड़ने लगे.
2018 के बाद बदला खेल, दोहरा टैक्स बना सिरदर्द
लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं चली. साल 2018 में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 112A के तहत 1 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 10 फीसदी LTCG टैक्स दोबारा लागू कर दिया. यानी निवेशक अब STT भी दे रहे थे और LTCG टैक्स भी. यहीं से दोहरे टैक्स का बोझ शुरू हुआ. निवेशकों का कहना है कि जब STT पहले से लिया जा रहा है, तो LTCG टैक्स का औचित्य समझ से बाहर है. यही मुद्दा अब बजट 2026 की सबसे बड़ी चर्चा बन चुका है.
2024 में नियम बदले, निवेशकों को लगा झटका
बजट 2024 में सरकार ने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया. लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया. वहीं प्रॉपर्टी पर टैक्स रेट घटाकर 12.5 फीसदी कर दी गई, लेकिन इंडेक्सेशन बेनिफिट खत्म कर दिया गया. इससे रियल एस्टेट निवेशकों को तगड़ा झटका लगा. हालांकि विरोध के बाद सरकार ने 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी पर पुराने नियम लागू रखने का विकल्प दिया, लेकिन असमंजस अब भी बना हुआ है.
क्या खत्म होगा STT और LTCG का दोहरा बोझ?
बजट 2026 से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार STT को हटाने या कम करने पर विचार कर सकती है. जब STT को LTCG के विकल्प के रूप में लाया गया था, तो अब दोनों का साथ-साथ चलना निवेशकों पर अनावश्यक बोझ डालता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर STT हटता है या कम होता है, तो बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा. इसके साथ ही शेयर और प्रॉपर्टी के होल्डिंग पीरियड को एक समान करने से टैक्स फाइलिंग भी आसान हो सकती है.
डेट फंड निवेशकों को भी चाहिए बराबरी का हक
म्यूचुअल फंड निवेशकों में भी असंतुलन साफ नजर आता है. जहां इक्विटी फंड्स में 12 महीने बाद LTCG का फायदा मिलता है, वहीं डेट फंड्स में लंबे समय तक निवेश के बावजूद टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है. इंडेक्सेशन खत्म होने से कंजरवेटिव निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. उम्मीद की जा रही है कि निर्मला सीतारमण इस बार डेट फंड्स के नियमों में भी बदलाव कर मध्यम वर्ग को निवेश के लिए प्रोत्साहित करेंगी.
बजट 2026 से क्यों बढ़ी हैं उम्मीदें?
कुल मिलाकर, बजट 2026 टैक्सपेयर्स के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. अगर सरकार कैपिटल गेंस टैक्स को सरल बनाती है, दोहरे टैक्स का बोझ कम करती है और होल्डिंग पीरियड में एकरूपता लाती है, तो इसका सीधा फायदा आम आदमी की जेब को मिलेगा. अब देखना यह है कि क्या इस बार बजट सच में टैक्सपेयर्स के चेहरे पर मुस्कान ला पाएगा या राहत सिर्फ उम्मीदों तक ही सीमित रह जाएगी.
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