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दूषित पानी से मौतें, सड़क पर कांग्रेस का हंगामा, घंटी कांड, 21 गिरफ्तार, इंदौर में किसकी जिम्मेदारी?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, January 3, 2026
Last Updated On: Saturday, January 3, 2026
इंदौर में दूषित पेयजल से फैली त्रासदी ने शहर को झकझोर दिया है. प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही के सवालों के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के सामने उग्र प्रदर्शन किया. भागीरथपुरा की घटना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगे और मुआवजे व इस्तीफे की मांग उठी. हालात बिगड़ते देख पुलिस ने एहतियातन 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, January 3, 2026
Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और मौतों के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. इस गंभीर मुद्दे पर अब सियासत भी तेज हो गई है. नगर निगम और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए युवा कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया. हालात तनावपूर्ण होते देख पुलिस ने एहतियातन 21 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. यह प्रदर्शन शुक्रवार, 2 जनवरी को हुआ, जिसने शहर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी.
भागीरथपुरा की त्रासदी बनी प्रदर्शन की वजह
प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा खास तौर पर भागीरथपुरा इलाके में फैली दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर था. उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से गंदे पानी की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया. कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता, तो कई परिवारों को अपने प्रियजनों को खोना नहीं पड़ता. कांग्रेस ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक लापरवाही और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की.
मुआवजे और इस्तीफे की तेज मांग
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग उठाई. साथ ही उन्होंने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देने की मांग की. कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनता की जान से जुड़ा गंभीर अपराध है. इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
घंटी बजाकर जताया प्रतीकात्मक विरोध
इस प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ता अपने साथ घंटी लेकर पहुंचे थे. घंटी बजाकर उन्होंने दूषित पानी की त्रासदी के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया. इसी दौरान माहौल तब और गरमा गया, जब एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों से घंटी छीन ली और उसे एमजी रोड थाने ले गया. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर घंटी जब्त करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है.
पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन का पक्ष
पुलिस उपायुक्त राजेश व्यास ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं का रवैया उग्र हो गया था. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन 21 लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस का कहना है कि यह कदम किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया. कुछ देर बाद सभी को आवश्यक कार्रवाई के बाद छोड़ दिया गया.
‘घंटी’ विवाद और सियासी पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले को लेकर पहले से ही सियासी माहौल गर्म था. कुछ दिन पहले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक टीवी पत्रकार के सवाल पर कैमरे के सामने ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने को लेकर विवाद चल रहा है. उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा इलाका विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का और मौका मिल गया.
मौतों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे
दूषित पेयजल से हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि डायरिया से 10 मरीजों की मौत हुई है. वहीं राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में पेश अपनी रिपोर्ट में अब तक चार बुजुर्गों की मौत की पुष्टि की है. दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों का दावा है कि छह महीने के बच्चे समेत करीब 15 लोगों की जान गई है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. इन विरोधाभासी आंकड़ों ने लोगों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी हैं.
जवाबदेही की मांग और आगे की राह
इंदौर में दूषित पानी का यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है. जनता साफ पानी, स्पष्ट जवाब और दोषियों पर सख्त कार्रवाई चाहती है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस संकट से क्या सबक लेता है और पीड़ितों को कब न्याय मिलता है.
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