Bhadrapada Month 2025: कब से शुरू होगा? जानिए व्रत-त्योहारों की पूरी सूची और धार्मिक महत्व

Authored By: स्मिता

Published On: Wednesday, July 16, 2025

Last Updated On: Saturday, August 16, 2025

Bhadrapada Month 2025 की शुरुआत और समाप्ति की तिथि, व्रत-त्योहारों की पूरी सूची और धार्मिक महत्व जानें.
Bhadrapada Month 2025 की शुरुआत और समाप्ति की तिथि, व्रत-त्योहारों की पूरी सूची और धार्मिक महत्व जानें.

Bhadrapada Month 2025 in Hindi : भाद्रपद या भादो हिंदू चंद्र कैलेंडर का पांचवां महीना है. इस माह के साथ ही शरद ऋतु की शुरुआत हो जाती है. श्रीकृष्ण और श्रीगणेशजी के लिए विशिष्ट महीना कहलाने वाला भाद्रपद 10 अगस्त 2025, रविवार से 7 सितंबर 2025, रविवार तक रहेगा.

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Saturday, August 16, 2025

Bhadrapada Month 2025 Start Date: प्रत्येक हिंदी महीना विशेष महत्व वाला है. हर माह किसी न किसी देवता को समर्पित है. इस माह में उस देवता की विशिष्ट पूजा होती है. जिस तरह श्रावण शिवजी का प्रिय महीना है और उनकी विशेष तरीके से पूजा होती है. ठीक उसी तरह भाद्रपद या भादो श्रीकृष्ण जी और श्रीगणेश जी को समर्पित है. इस माह में कई ख़ास पर्व-त्योहारों का आयोजन होता है. भादो मास में कई चीज़ों की करने की भी मनाही होती है. इस आलेख में जानते हैं भाद्रपद माह की महत्ता और इस के ख़ास पर्व -त्योहारों के बारे में.

कब से शुरू हो रहा है और कब तक रहेगा भाद्रपद माह (Bhadrapada Month 2025 Date & Timing)

  • तिथि – 10 अगस्त 2025, रविवार – 7 सितंबर 2025, रविवार
  • ऋतु: शरद ऋतु
  • महत्व: जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, श्राद्ध पक्ष के कारण महत्वपूर्ण माह
  • बिक्रम संवत: नेपाली कैलेंडर (बिक्रम संवत) में, भाद्रपद, जिसे भादौ भी लिखा जाता है. यह पांचवां महीना है. यह 17 अगस्त से 16 सितंबर तक रहता है.

हिंदू महीना भाद्रपद को भादो भी कहा जाता है. यह माह 10 अगस्त , 2025 से शुरू होकर 7 सितंबर, 2025 को समाप्त होने जा रहा है. यह हिंदू चंद्र कैलेंडर का छठा महीना है. यह शरद ऋतु की शुरुआत से जुड़ा है. भाद्रपद हिंदू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण महीना है, जिसमें जन्माष्टमी (कृष्ण का जन्मदिन) और गणेश चतुर्थी (गणेश उत्सव) जैसे त्योहार आते हैं. यह पितृ पक्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो पूर्वजों तो तर्पण देने के लिए समर्पित अवधि है.

भाद्रपद माह का आध्यात्मिक महत्व (Bhadrapada Month Spiritual Significance)

भाद्रपद हिंदू चंद्र कैलेंडर का छठा महीना, शुभता और भक्ति का महीना है, जो विशेष रूप से भगवान कृष्ण और भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा है. भाद्रपद को भक्ति, मुक्ति और उपवास का समय माना जाता है. कई भक्त उपवास रखते हैं और प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं. भाद्रपद के दौरान कुछ गतिविधियों, जैसे दही का सेवन या विवाह समारोहों में शामिल होने की मनाही होती है. “भद्रा” का अर्थ है शुभ, जो इस महीने के सकारात्मक और मुक्तिदायक स्वरुप को दर्शाता है. भाद्रपद को आत्म-चिंतन, प्रायश्चित और ईश्वर के साथ अपने संबंध को गहरा करने के अवसर के रूप में देखा जाता है.

ज्योतिष के नजरिए से विशेष है यह महीना

इस माह की ज्योतिषीय महत्ता बहुत ही विशेष है. इस अवधि में अरुण ग्रह वक्री चाल में आएंगे, साथ ही 3 ग्रहों का राशि परिवर्तन और 9 ग्रहों का नक्षत्रों में गोचर होना भी तय है. ये सभी खगोलीय घटनाएं आपके जीवन के कई पहलुओं पर प्रभाव डाल सकती हैं.

पुराण में भाद्रपद माह का उल्लेख (Bhadrapada Month 2025 in Puranas)

वैष्णव धर्म के एक प्रमुख ग्रंथ भागवत पुराण के अनुसार, विष्णु और लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित दिन है भाद्रपद पूर्णिमा. इसके संदर्भ में भाद्रपद की चर्चा की गई है. इस दिन उपवास, दान और पवित्र नदियों में स्नान की महत्ता बताई गई है.

देवी-भागवत पुराण: देवी को समर्पित इस पुराण में भाद्रपद को अपने दसवें अध्याय में शामिल किया गया है. इसमें देवी भ्रामरी की महिमा का वर्णन है. उन्होंने अरुणासुर नामक राक्षस का वध किया था. यह माह भादों ही है.

भाद्र मास 2025 – व्रत, उपवास और त्योहार (Bhadrapada Month 22025 Vrat and Tyohar)

तारीख त्योहार / व्रत
12 अगस्त (मंगलवार) हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी, अंगारकी चतुर्थी, कजरी तीज, संकष्टी चतुर्थी
13 अगस्त (बुधवार) रक्षा पंचमी
14 अगस्त (गुरुवार) हल षष्ठी
15 अगस्त (शुक्रवार) कृष्ण जन्माष्टमी, स्वतंत्रता दिवस
16 अगस्त (शनिवार) कालाष्टमी
17 अगस्त (रविवार) रोहिणी व्रत, गोगा नवमी, सिंह संक्रांति
19 अगस्त (मंगलवार) अजा एकादशी
20 अगस्त (बुधवार) प्रदोष व्रत
21 अगस्त (गुरुवार) मासिक शिवरात्रि
23 अगस्त (शनिवार) पिठौरी अमावस्या, अमावस्या
24 अगस्त (रविवार) चंद्र दर्शन
25 अगस्त (सोमवार) वराह जयंती, सोमवार व्रत
26 अगस्त (मंगलवार) हरतालिका तीज
27 अगस्त (बुधवार) चतुर्थी व्रत, गणेश चतुर्थी
28 अगस्त (गुरुवार) ऋषि पंचमी
29 अगस्त (शुक्रवार) षष्ठी व्रत
31 अगस्त (रविवार) दुर्गा अष्टमी व्रत, महालक्ष्मी व्रत, दूर्वा अष्टमी, राधा अष्टमी
02 सितंबर (मंगलवार) रामदेव जयंती
03 सितंबर (बुधवार) पार्श्व एकादशी
05 सितंबर (शुक्रवार) प्रदोष व्रत, ओणम, शिक्षक दिवस
06 सितंबर (शनिवार) अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन
07 सितंबर (रविवार) पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, भाद्रपद पूर्णिमा, श्री सत्यनारायण व्रत, श्री सत्यनारायण पूजा
7 सितंबर 2025, रविवार – 21 सितंबर 2025, रविवार पितृ पक्ष

भाद्रपद माह में ये काम करने से बचें (Bhadrapada Month Do’s & Don’ts)

  • ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल शास्त्री बताते हैं, ‘किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से बचें.
  • गृह प्रवेश, बच्चों का मुंडन, व्यापार आरंभ, विवाह, सगाई, नामकरण जैसे शुभ कार्य करने से बचें.
  • गुड़, तिल, तिल का तेल, नारियल का तेल और दही जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें. भाद्रपद में इनका सेवन करने से आयु कम होती है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
  • दान किए गए धान से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे लक्ष्मी कम होने की संभावना रहती है.
  • हालांकि भाद्रपद में सभी प्रकार के शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन फिर भी यदि बहुत ज़रूरी हो, तो ज्योतिषाचार्य से सलाह लेने के बाद ही किसी भी प्रकार का निर्णय लें.’

भाद्रपद में कौन-सा काम कर सकते हैं (Bhadrapada Month Do’s & Don’ts)

भाद्रपद का महीना इन कार्यों के लिए सर्वोत्तम है.

  • ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार, इस महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व है.
  • इस महीने में मंगलवार के दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है. भगवान गजानंद को लाल रंग के फूल चढ़ाएं. कनेर के फूल का विशेष महत्व है. साथ ही लड्डू या मोदक का भोग लगाने से जीवन से सीधा जुड़ाव हो सकता है. अप्रत्यक्ष समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी.
  • गाय को हरा चारा देने और स्नान के समय गोमूत्र का प्रयोग करने से पापों का नाश हो सकता है.
  • गाय का घी, गाय का दूध और मक्खन खाने से स्वास्थ्य लाभ होगा, शरीर बलवान होगा और दीर्घायु होगी.
  • हरि नाम संकीर्तन और ध्यान-योग से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक विकास होता है.

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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