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Shardiya Navratri 2025: कलश स्थापना का कब है अभिजीत मुहूर्त
Authored By: स्मिता
Published On: Saturday, September 6, 2025
Last Updated On: Saturday, September 6, 2025
Shardiya Navratri 2025 : इस वर्ष नवरात्र पूजा 22 सितंबर से शुरू हो रही है. इस बार नवरात्र पूजा 10 दिनों की है और मां हाथी पर सवार होकर आएंगी. जानते हैं किस मुहूर्त में कलश स्थापना करें और देवी को क्या भोग लगाएं.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Saturday, September 6, 2025
शारदीय नवरात्र 22 सितंबर 2025 से कलश स्थापना के साथ शुरू हो रही है. (Shardiya Navratri 2025) इस बार मां दुर्गा हाथी पर आ रही हैं और घोड़े पर विदा होंगी. इस वर्ष चतुर्थी तिथि बढ़ गई है. भक्तगण इस अवसर पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों तक का संपूर्ण पाठ कहा जाता है. ज्योतिषाचार्य और मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जो लोग 13 अध्यायों का पाठ नहीं कर पाते हैं, उन्हें दुर्गा सप्तशती में बताए गए तीन पात्रों में से किसी एक का पाठ करना चाहिए. इस बार चतुर्थी तिथि बढ़ गई है.
कब होगी कलश स्थापना (Navratri 2025 Kalash Sthapna)
ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार, इस वर्ष नवरात्र पूजा 10 दिनों की होगी. सुबह 11.36 से दोपहर 12.44 तक अभिजीत मुहूर्त कलश स्थापना का सर्वोत्तम समय है. प्रतिपदा से नवमी तिथि तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. महाअष्टमी दोपहर 1.54 बजे समाप्त होगी. इसी समय संधि बलि दी जाएगी. अगले दिन दोपहर 2.40 बजे नवमी संपात होगी. प्रतिपदा से नवमी तिथि तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए.
माता के नौ रूपों को कौन सा भोग लगाएं
भक्तों को नवरात्र पूजा के अवसर पर माता का प्रिय भोग अर्पित करने की कोशिश करनी चाहिए.
| देवी | भोग |
|---|---|
| मां शैलपुत्री | खीर |
| मां ब्रह्मचारिणी | खीर |
| मां चंद्रघंटा | मक्खन |
| मां कुष्मांडा | पोहा |
| मां स्कंदमाता | मालपुए |
| मां कात्यायनी | शहद |
| मां कालरात्रि | अंकुरित चने |
| मां महागौरी | नारियल |
| मां सिद्धिदात्री | चूड़ा-दही |
- 27 सितंबर की शाम को देवी जागरण
- देवी का जागरण 27 सितंबर की शाम को होगा. 28 तारीख को सुबह 7 बजे कल्पारम्भ सम्पन्न होगा. 29 तारीख को महासप्तमी पर
- सुबह 6.30 बजे नवपत्रिका प्रवेश प्रारम्भ होगा.
दुर्गा अष्टमी की क्या है तिथि और समय (Durga Ashtmi 2025 Date & Time)
वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्र के दौरान महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी की पूजा 30 सितंबर, 2025 होगी. इस विशेष अष्टमी के दिन मुख्य अनुष्ठान के लिए समय आमतौर पर पूरे दिन माना जाता है, लेकिन इस दिन सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:33 बजे के बीच महत्वपूर्ण संधि पूजा के लिए उत्तम है.
विजयादशमी या दशहरा तिथि
विजयादशमी या दशहरा दुर्गा पूजा का 10वां और अंतिम दिन है. इस वर्ष यह 2 अक्टूबर 2025 को है.
क्या है कल्पारम्भ (Kalparambh 2025)
कल्पारम्भ को अकाल बोधन भी कहा जाता है. दुर्गा पूजा के दौरान नवरात्र के छठे दिन यह मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. इस दिन देवी दुर्गा को पृथ्वी पर आने के लिए आमंत्रित किया जाता है. इसका अर्थ है ‘समय की शुरुआत’. यह पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है.
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