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Vamana Jayanti 2025: भक्त से ओणम और बलि प्रतिपदा को मिलते हैं वामन देव
Authored By: स्मिता
Published On: Friday, August 29, 2025
Last Updated On: Friday, August 29, 2025
Vamana Jayanti 2025: भागवत पुराण के अनुसार, पशु रूप में पहले चार अवतारों-मत्स्य, कूर्म, वराह और नरसिंह के बाद, भगवान विष्णु मानव रूप में सबसे पहले वामन अवतार में ही आये थे. यह तिथि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो वामन जयंती के रूप में आज भी मनाई जाती है. इस वर्ष यह तिथि 4 सितंबर है.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Friday, August 29, 2025
भगवान विष्णु के वामन अवतार में धरती पर आने की तिथि वामन जयंती के रूप में मनाई जाती है. (Vamana Jayanti 2025) यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है. भागवत पुराण के अनुसार, वामन भगवान विष्णु के दशावतार में से पांचवें अवतार थे. त्रेता युग में उनका पहला अवतार था. पशु रूप में पहले चार अवतारों, अर्थात् मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (सूअर) और नरसिंह (सिंह) के बाद, वामन भगवान विष्णु के मानव रूप में पहले अवतार थे, वामन का जन्म त्रेता युग में देवी अदिति और ऋषि कश्यप के यहां भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को अभिजित मुहूर्त में हुआ था. उस समय श्रवण नक्षत्र (Vamana Jayanti) व्याप्त था.
कब है वामन जयंती (Vaman Jayanti 2025 Date & Time)
| वामन जयंती 2025 | शुक्रवार, 04 सितंबर 2025 |
| द्वादशी तिथि प्रारंभ | 04 सितंबर 2025 को प्रातः 04:21 बजे से |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 05 सितंबर, 2025 को प्रातः 04:08 बजे |
वामन अवतार की कथा (Vaman Jayanti Katha)
भगवान विष्णु ने स्वर्ग लोक पर देवराज इंद्र का शासन पुनः स्थापित करने के लिए वामन अवतार लिया. भगवान विष्णु के परम भक्त राजा बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वयं स्वर्ग लोक के राजा स्थापित हो गए. विष्णु भक्त और दानवीर राजा होने के बावजूद बलि क्रूर और अभिमानी था. उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग देवताओं और निरीह लोगों को धमकाने के लिए किया. देवताओं और मनुष्यों दोनों पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके, अजेय राजा बलि ने अपने राज्य का विस्तार किया. वह स्वर्ग लोक, भू लोक और पाताल लोक का राजा बन गया.
अदिति और कश्यप के पुत्र वामन (Vaman Avtar)
अपने राज्य से अपदस्थ होने के बाद इंद्र अन्य देवताओं के साथ भगवान विष्णु के पास मदद के लिए गए. भगवान विष्णु ने इंद्र को आश्वासन दिया कि वे तीनों लोकों को बलि के अत्याचारों से बचाने के लिए अदिति और कश्यप के पुत्र के रूप में एक बौने ब्राह्मण के रूप में जन्म लेंगे.
वामन साधु का रूप (Vamanavtar)
भगवान विष्णु ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए वामन साधु के रूप में अवतार लिया. वे राजा बलि के पास पहुंचे जहां बलि अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे. वामन ने बलि से भिक्षा के रूप में तीन पग भूमि मांगी, जिसे बलि ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. वामन देव ने तुरंत एक विशाल रूप धारण कर लिया और एक पग में पूरी पृथ्वी नाप ली. दूसरे पग में उन्होंने स्वर्ग नाप लिया. जब वामन देव तीसरा पग उठाने वाले थे, तब बलि को एहसास हुआ कि वह बौना साधु कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं. तीसरे पग के लिए उन्होंने अपना सिर अर्पित कर दिया.
बलि प्रतिपदा और ओणम (Bali Pratipada & Onam)
अपने भक्त बलि की उदारता का सम्मान करने के लिए भगवान विष्णु ने बलि का वध करने के बजाय उसे पाताल लोक में धकेल दिया. भगवान विष्णु ने बलि को एक वरदान भी दिया था, जिसके तहत वह वर्ष में एक बार पृथ्वी पर अपनी प्रजा से मिलने आ सकता था. राजा बलि की वार्षिक घर वापसी केरल में ओणम और देश के बाकी हिस्सों में बलि प्रतिपदा को मनाई जाती है.
वामन जयंती पूजा विधि (Vaman Jayanti Puja Vidhi)
वामन जयंती के दिन भगवान विष्णु की उनके वामन अवतार में पूजा की जाती है. इस दिन प्रातःकाल वामन की स्वर्ण या मिट्टी की मूर्ति की पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा की जाती है. वामन जयंती पर व्रत भी रखा जाता है. शाम को पूजा करने के बाद वामन जयंती व्रत कथा सुनी जाती है. प्रसाद के साथ व्रत तोड़ा जाता है. इस दिन चावल, दही और मिश्री का दान भी किया जाता है. यदि श्रवण नक्षत्र के साथ वामन जयंती का संयोग हो तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
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