सिस्टम की हत्या या आत्मदाह? ओडिशा में छात्रा की मौत पर बवाल, इंसाफ की आग, सीएम के इस्तीफे की मांग
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, July 15, 2025
Updated On: Tuesday, July 15, 2025
ओडिशा के बालासोर में एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने राज्य की राजनीति को उबाल पर ला दिया है. यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद आत्मदाह कर चुकी छात्रा की मौत पर विपक्ष ने भाजपा सरकार को घेरा है. राहुल गांधी ने इसे “सिस्टम की हत्या” बताया, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 17 जुलाई को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है. विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही से यह त्रासदी हुई. अब यह मामला महिला सुरक्षा से लेकर सरकार की नैतिक जिम्मेदारी तक, हर मोर्चे पर सवाल उठा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Tuesday, July 15, 2025
Student Death in Odisha: ओडिशा की सियासत में इन दिनों एक दिल दहला देने वाली घटना ने भूचाल ला दिया है. बालासोर की एक बहादुर छात्रा की संदिग्ध मौत ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली उस छात्रा ने जब इंसाफ नहीं पाया, तो आग में झुलसकर दुनिया को अलविदा कह दिया. अब विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं. सीएम के इस्तीफे की मांग, सड़क से सदन तक हंगामा, और 17 जुलाई को राज्यव्यापी बंद का ऐलान. राहुल गांधी से लेकर वाम दलों तक, सभी इस मौत को सिस्टम की “संघठित हत्या” बता रहे हैं. सवाल अब सिर्फ न्याय का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख पर उठ खड़े हुए हैं. क्या सरकार बचेगी या सियासी मोर्चा उसे डुबो देगा?
मौत जिसने हिला दी राजनीति
ओडिशा के बालासोर जिले स्थित फकीरमोहन कॉलेज की 28 वर्षीय छात्रा की मौत से पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है. इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार पर जुबानी हमला किया. कांग्रेस और सीपीआई (एम) ने इसे सामाजिक न्याय और महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की विफलता बताया.
कांग्रेस ने छात्रा की मौत के बाद ओडिशा की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भक्त चरण दास और 8 राजनीतिक दलों के नेताओं ने मंगलवार को कांग्रेस भवन में एक संयुक्त प्रेस वार्ता की. इस दौरान कांग्रेस ने 8 अन्य राजनीतिक दलों के साथ 17 जुलाई को राज्यव्यापी ‘बंद’ का ऐलान किया.
बता दें ओडिशा के बालासोर स्थित फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की 20 वर्षीय छात्रा ने सोमवार रात दम तोड़ दिया है. छात्रा ने सहायक प्रोफेसर समीर कुमार साहू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उसने परेशान होकर आत्मदाह का प्रयास किया था, जिसे बाद में एम्स भुवनेश्वर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन सोमवार रात उसकी मौत हो गई.
राहुल का तीखा वार
बालासोर की घटना पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ओडिशा में इंसाफ के लिए लड़ती एक बेटी की मौत सीधे-सीधे सिस्टम द्वारा की गई हत्या है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस सांसद ने लिखा, “उस बहादुर छात्रा ने यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन न्याय देने के बजाय उसे धमकाया गया, प्रताड़ित किया गया और बार-बार अपमानित किया गया. जिन्हें उसकी रक्षा करनी थी, वही उसे तोड़ते रहे. हर बार की तरह भाजपा का सिस्टम आरोपियों को बचाता रहा और एक मासूम बेटी को खुद को आग लगाने पर मजबूर कर दिया.”
लापरवाही या साजिश?
राहुल गांधी ने आगे लिखा, “ये आत्महत्या नहीं, सिस्टम द्वारा संगठित हत्या है. पीएम मोदी, ओडिशा हो या मणिपुर, देश की बेटियां जल रही हैं, टूट रही हैं और दम तोड़ रही हैं, और आप खामोश बने बैठे हैं. देश को आपकी चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए. भारत की बेटियों को सुरक्षा और इंसाफ चाहिए.”
जंगल राज का आरोप, निशाने पर सरकार
वहीं इसको लेकर कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है.
उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के शासन में जंगल राज कायम हो गया है. हमने विधानसभा में बार-बार महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया. मुख्यमंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तक, सभी को इस मामले की जानकारी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.”
इस्तीफे की मांग तेज
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
सीपीआई(एम) के ओडिशा राज्य सचिव सुरेश चंद्र पाणिग्रही ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने इसे “नैतिक पतन” और “संस्थागत विफलता” का परिणाम बताते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की हत्या है. कॉलेज के प्राचार्य और लेक्चरर की लापरवाही के साथ-साथ जिला प्रशासन और सरकार की उदासीनता इस घटना के लिए जिम्मेदार है.
सिस्टम की हत्या का आरोप
उन्होंने दावा किया कि छात्रा ने यौन और मानसिक उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने के कारण उसकी जान चली गई. सीपीआई(एम) ने मांग की है कि इस मामले की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच हो. उन्होंने स्थानीय सांसद, विधायक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और उच्च शिक्षा मंत्री को जांच के दायरे में लाने की मांग की.
पाणिग्रही ने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री को नैतिक आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक साल में मोहन माझी सरकार महिलाओं, आदिवासियों और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है.
विपक्ष की साझा रणनीति तैयार
उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म, धार्मिक हिंसा और अन्य अपराधों का हवाला देते हुए सरकार को “गैर-लोकतांत्रिक” करार दिया. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने का फैसला किया है. सीपीआई(एम) ने घोषणा की कि संयुक्त विपक्ष जल्द ही एक बैठक आयोजित करेगा और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगा. वे मांग कर रहे हैं कि पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय मिले और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
(आईएएनएस इनपुट के साथ)
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