बिहार में फिर आई बाढ़, कितनी तैयार है सरकार ?

Authored By: सतीश झा

Published On: Saturday, July 19, 2025

Last Updated On: Saturday, July 19, 2025

Bihar Flood Situation: फिर आई बाढ़ से हालात बिगड़े, कई इलाके जलमग्न, जानिए सरकार की तैयारियों, राहत कार्यों और प्रभावित क्षेत्रों की ताज़ा स्थिति इस पोस्ट में.
Bihar Flood Situation: फिर आई बाढ़ से हालात बिगड़े, कई इलाके जलमग्न, जानिए सरकार की तैयारियों, राहत कार्यों और प्रभावित क्षेत्रों की ताज़ा स्थिति इस पोस्ट में.

बिहार एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आ गया है. गंगा, कोसी, गंडक, घाघरा समेत छह प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कई जिलों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. बाढ़ की आहट से लोगों की चिंता बढ़ गई है और निचले इलाकों से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Saturday, July 19, 2025

Bihar Flood: सबसे ज्यादा असर कोसी, गंगा और गंडक के किनारे बसे जिलों में देखने को मिल रहा है. सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा और पटना सहित कई क्षेत्रों में पानी का स्तर बढ़ने से खेतों में पानी भर गया है और घरों में भी पानी घुसने की आशंका बढ़ गई है.

राज्य सरकार ने दावा किया है कि वह पूरी तरह अलर्ट मोड में है और राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने उच्चस्तरीय बैठक कर जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए, पीड़ितों को समय पर भोजन, पीने का पानी और चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए.

पटना में गंगा और पुनपुन ने बढ़ाई चिंता, डेंजर लेवल के पार बह रही हैं नदियां

राजधानी पटना में बाढ़ का खतरा लगातार गहराता जा रहा है. शनिवार सुबह दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया. वहीं, गांधी घाट पर गंगा नदी ने डेंजर लेवल 48.60 मीटर को पार कर 48.95 मीटर पर बहना शुरू कर दिया है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में दहशत का माहौल है.

हाथीदह में भी गंगा नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है. प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. स्थानीय लोगों को अलर्ट रहने और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है.

इधर, पुनपुन नदी भी पटना और अरवल जिलों में डेंजर लेवल को पार कर चुकी है. इससे दोनों जिलों के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ की आशंका तेजी से बढ़ गई है. खेतों में पानी भर गया है और कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क मार्ग भी प्रभावित हो चुका है.

राहत और बचाव की तैयारियों का दावा

प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियों का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक कोई ठोस मदद नहीं पहुंची है. बाढ़ से प्रभावित परिवारों ने खुद ही ऊंचे स्थानों पर जाना शुरू कर दिया है. गंगा और पुनपुन के बढ़ते जलस्तर ने पटना समेत आस-पास के इलाकों में स्थिति को गंभीर बना दिया है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं.

सरकार की तैयारी पर उठे सवाल

हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है. कई जिलों में पीड़ितों को अब तक न तो राहत सामग्री मिल पाई है और न ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था. कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है, नावों की कमी है और प्रशासन की सुस्ती से लोग गुस्से में हैं.

विपक्ष का हमला

बाढ़ को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी सरकार की तैयारी कागजों तक सीमित है. बाढ़ पूर्व चेतावनी तंत्र फेल है. राहत कार्य महज औपचारिकता बनकर रह गया है.

हर साल दोहराता है संकट

बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है. हर साल मानसून के दौरान नेपाल से निकलने वाली नदियां भारी तबाही मचाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार दीर्घकालिक समाधान, जैसे बांधों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था और पुनर्वास योजना पर गंभीरता से काम नहीं करती, तब तक हर साल लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित होते रहेंगे.

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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