Arattai vs WhatsApp: ऐसे 5 फीचर्स जहां Zoho का ऐप है बेहतर
Authored By: संतोष आनंद
Published On: Friday, October 3, 2025
Updated On: Friday, October 3, 2025
अरट्टाई ने साबित कर दिया है कि भारतीय ऐप्स भी ग्लोबल दिग्गजों को चुनौती दे सकते हैं। चाहे मीटिंग्स का विकल्प हो, पॉकेट जैसा पर्सनल स्टोरेज या बिना विज्ञापन और बिना जबरदस्ती AI-इन फीचर्स के दम पर यह व्हाट्सएप से अलग पहचान बना रहा है।
Authored By: संतोष आनंद
Updated On: Friday, October 3, 2025
पिछले कुछ समय से भारत में यह जागरूकता बढ़ी है कि घरेलू कंपनियों को ऐसे सॉफ्टवेयर बनाने चाहिए, जो ग्लोबल टेक कंपनियों का विकल्प बन सकें। इसी दिशा में भारतीय कंपनी Zoho ने Arattai ऐप पेश किया है। सोशल मीडिया पर इसे ‘WhatsApp Killer’ तक कहा जा रहा है। यह मेड-इन-इंडिया ऐप न सिर्फ व्हाट्सएप को चुनौती दे रहा है बल्कि कुछ ऐसे फीचर्स भी देता है जो इसे तुरंत अलग और बेहतर बना देते हैं।
मीटिंग्स फीचर
व्हाट्सएप में वीडियो कॉलिंग जरूर है, लेकिन यह अभी भी Google Meet या Zoom जैसी सर्विस का विकल्प नहीं बन पाई है। वहीं, अरट्टाई अपने ऐप के भीतर ही मीटिंग्स का फीचर देता है। यूजर इंस्टेंट मीटिंग बना सकते हैं, किसी मीटिंग में शामिल हो सकते हैं या बाद के लिए शेड्यूल कर सकते हैं। इसके साथ ही शेड्यूल्ड और पिछली मीटिंग्स का रिकॉर्ड भी आसानी से देखा जा सकता है।
पॉकेट फीचर
व्हाट्सएप पर कई लोग खुद को मैसेज भेजकर जरूरी जानकारी सेव करते हैं। अरट्टाई इस आदत को और आसान बनाता है अपने Pocket फीचर से। यह एक तरह का पर्सनल क्लाउड स्टोरेज है जहां यूजर अपने मैसेज, मीडिया और अन्य फाइल्स सेव कर सकते हैं।
मेंशन्स सेक्शन
व्हाट्सएप पर नोटिफिकेशन में मेंशन ढूंढना कई बार मुश्किल होता है। अरट्टाई ने इस समस्या का समाधान दिया है। इसमें स्लैक जैसा Mentions सेक्शन है जो उन सभी मैसेजेस को एक जगह लिस्ट करता है जहां यूजर का नाम टैग किया गया हो।
विज्ञापन नहीं
फिलहाल अरट्टाई पूरी तरह ऐड-फ्री है और कंपनी का दावा है कि वह यूजर डाटा का इस्तेमाल विज्ञापन के लिए नहीं करेगी। इसके उलट व्हाट्सएप अपने Updates टैब में विज्ञापन दिखाना शुरू कर चुका है और कुछ डाटा Meta के साथ भी साझा करता है। अरट्टाई का कहना है कि उसका सारा डाटा भारत के डाटा सेंटर्स में सुरक्षित रखा जाता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अरट्टाई अभी वॉयस और वीडियो कॉल्स के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन देता है, लेकिन टेक्स्ट मैसेज पर यह पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। जबकि व्हाट्सएप अपने सभी मैसेज और कॉल्स पर यह सुविधा देता है।
AI नहीं
Meta ने व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर AI फीचर्स अनिवार्य कर दिए हैं। यूजर चाहकर भी इन्हें पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। वहीं, अरट्टाई फिलहाल किसी भी तरह का AI लागू नहीं करता है। अगर भविष्य में ये फीचर्स आते भी हैं तो उम्मीद है कि यूजर्स की पसंद के आधार पर होंगे, ना कि जबरन थोपे जाएंगे।
अरट्टाई ने साबित कर दिया है कि भारतीय ऐप्स भी ग्लोबल दिग्गजों को चुनौती दे सकते हैं। चाहे मीटिंग्स का विकल्प हो, पॉकेट जैसा पर्सनल स्टोरेज या बिना विज्ञापन और बिना जबरदस्ती AI-इन फीचर्स के दम पर यह व्हाट्सएप से अलग पहचान बना रहा है। हालांकि टेक्स्ट मैसेज पर पूरी एन्क्रिप्शन की कमी अभी इसकी सबसे बड़ी चुनौती है।
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