मुकेश अंबानी का नया एआई वेंचर Reliance Intelligence लॉन्च, जानें इसकी डिटेल
Authored By: संतोष आनंद
Published On: Saturday, August 30, 2025
Updated On: Saturday, August 30, 2025
रिलायंस इंटेलिजेंस की शुरुआत यह दिखाती है कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य कितना उज्ज्वल है। डिजिटल सर्विसेज की तरह अब एआई भी हर भारतीय की जिंदगी में जगह बनाने वाला है। मुकेश अंबानी का यह विजन न सिर्फ भारत को वैश्विक एआई दौड़ में आगे ले जाएगा, बल्कि देश को डेटा और टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
Authored By: संतोष आनंद
Updated On: Saturday, August 30, 2025
मुकेश अंबानी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) भारत की तकनीकी दिशा को बदलने में सबसे आगे हैं। कंपनी ने अपने 48वें वार्षिक आमसभा (AGM) में एक नया एआई वेंचर पेश किया, जिसका नाम है रिलायंस इंटेलिजेंस। अंबानी ने इसे AI everywhere for every Indian यानी हर भारतीय के लिए और हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुविधा उपलब्ध कराने का मिशन बताया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दुनियाभर में एआई तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का अहम हिस्सा बन चुका है और भारत भी इस दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।
रिलायंस इंटेलिजेंस की शुरुआत
रिलायंस इंटेलिजेंस को रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक पूर्ण स्वामित्व वाला अंग बनाया गया है। इसे फिलहाल ₹1 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ रजिस्टर्ड किया गया है। अंबानी का कहना है कि यह नया एआई बिजनेस आने वाले समय में उतना ही बड़ा असर डालेगा, जितना एक दशक पहले रिलायंस जियो ने भारत के डिजिटल सर्विस सेक्टर में डाला था।
चार बड़े मिशन
गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर्सः जामनगर, गुजरात में रिलायंस गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर्स स्थापित करेगी। यह कदम बेहद अहम है, क्योंकि भारत अभी भी डेटा सेंटर कैपेसिटी के मामले में काफी पीछे है। तुलना करें तो अमेरिका में प्रति व्यक्ति 51 मेगावॉट डेटा सेंटर क्षमता है, जबकि भारत में यह केवल 1 मेगावॉट है।
ग्लोबल टेक पार्टनरशिप: रिलायंस ने गूगल और मेटा जैसे टेक दिग्गजों के साथ मिलकर काम करने का ऐलान किया है। इन पार्टनरशिप्स के जरिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाएगा।
एआई एप्लिकेशन और सर्विसेज: रिलायंस उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए अलग-अलग एआई एप्लिकेशन और सेवाएं बनाएगी। इसमें भारत की स्थानीय भाषाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एप्लिकेशन तैयार किए जाएंगे।
एआई टैलेंट बेस तैयार करना: कंपनी दुनिया भर से रिसर्चर्स, इंजीनियर्स, डिजाइनर्स और प्रोडक्ट बिल्डर्स को जोड़कर एक मजबूत एआई वर्कफोर्स तैयार करेगी।
गूगल और मेटा के साथ साझेदारी
गूगल और मेटा, दोनों पहले से ही रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी रखते हैं। गूगल की 7.73% और मेटा की 9.99% हिस्सेदारी है। अब यह सहयोग एआई क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। गूगल की साझेदारी मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स की स्थापना पर केंद्रित होगी। मेटा और रिलायंस मिलकर ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म-एज-ए-सर्विस तैयार करेंगे। इस प्रोजेक्ट में दोनों कंपनियां 100 मिलियन डॉलर का निवेश करेंगी, जिसमें रिलायंस की हिस्सेदारी 70% होगी।
क्यों जरूरी है यह कदम
भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है। मोबाइल इंटरनेट के बाद अब एआई अगला बड़ा बदलाव लाने वाला सेक्टर है।
- देश में डेटा सेंटर्स की भारी कमी पूरी होगी।
- भारतीय यूजर्स को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से एआई सुविधाएं मिलेंगी।
- छोटे-बड़े बिजनेस एआई का इस्तेमाल करके अपनी प्रोडक्टिविटी और कस्टमर सर्विस को बेहतर बना सकेंगे।
रिलायंस इंटेलिजेंस की शुरुआत यह दिखाती है कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य कितना उज्ज्वल है। डिजिटल सर्विसेज की तरह अब एआई भी हर भारतीय की जिंदगी में जगह बनाने वाला है। मुकेश अंबानी का यह विजन न सिर्फ भारत को वैश्विक एआई दौड़ में आगे ले जाएगा, बल्कि देश को डेटा और टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर भी बनाएगा। आने वाले सालों में इसका असर न सिर्फ उद्योगों पर, बल्कि आम उपभोक्ताओं के जीवन पर भी दिखाई देगा।
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