कर्नल सोफिया कुरैशी वो बहादुर अफसर हैं, जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' की असली कहानी दुनिया के सामने रखी और साबित कर दिया कि भारत की बेटियां भी जंग के मैदान में किसी से कम नहीं हैं.
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'ऑपरेशन सिंदूर' एक बेहद गुप्त और अहम मिशन था, जिसे कर्नल सोफिया कुरैशी ने अपनी टीम के साथ अंजाम दिया. यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारत की रक्षा नीति और संकल्प का प्रतीक बन गया है.
बायोकैमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएट कर्नल सोफिया कुरैशी सिर्फ एक सेना अफसर नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं. सिग्नल कोर से जुड़ी सोफिया भारतीय सेना की कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं, जो हर चुनौती को दमदारी से संभालती हैं.
कर्नल सोफिया कुरैशी ने 'एक्सरसाइज फोर्स 18' में 18 देशों के बीच भारत की 40 सैनिकों की टीम का नेतृत्व किया. साल 2006 में वो कांगो में यूएन मिशन पर रहीं और 6 साल से अधिक शांति मिशनों में सेवा दी.
कर्नल सोफिया कुरैशी, जो सेना परिवार से ताल्लुक रखती हैं,और 1999 में भारतीय सेना जॉइन की. गुजरात की रहने वाली सोफिया ने अपनी मेहनत और साहस से न केवल सेना में अपना नाम कमाया, बल्कि भारत का झंडा भी ऊंचा किया.
कर्नल सोफिया कुरैशी की उपलब्धियां और नेतृत्व ने न सिर्फ भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को बढ़ाया, बल्कि महिलाओं के लिए नई राह भी खोली. उनकी कहानी लाखों महिलाओं को प्रेरित करती है जो चुनौतियों के बावजूद खुद को साबित करती हैं.
आज Colonel Sophia Qureshi को एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जा रहा है, इन्होंने अपने साहस और धैर्य से एक ऐतिहासिक मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.