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अब 24 घंटे खुलेगी अदालत, CJI सूर्यकांत के ऐतिहासिक फैसले में क्या है खास?
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Wednesday, December 31, 2025
Last Updated On: Wednesday, December 31, 2025
भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. अब लीगल इमरजेंसी की स्थिति में किसी भी समय, यहां तक कि आधी रात को भी अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकेगा. जानिए इस फैसले का आम जनता, वकीलों और लंबित मामलों पर क्या असर पड़ेगा.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Wednesday, December 31, 2025
भारतीय न्याय व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने ऐसा फैसला लिया है जिसे आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. अब अदालतें सिर्फ तय समय तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि लीगल इमरजेंसी में 24 घंटे उपलब्ध होंगी. CJI सूर्यकांत का साफ कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की धमकी दी जा रही है या उसके मौलिक अधिकार खतरे में हैं, तो वह आधी रात को भी अदालत से न्याय की गुहार लगा सकता है. यह फैसला न सिर्फ न्याय तक पहुंच को आसान बनाएगा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भूमिका को पहले से कहीं अधिक संवेदनशील और जवाबदेह भी बनाएगा.
लीगल इमरजेंसी पर CJI का बड़ा एलान
CJI सूर्यकांत के अनुसार, जांच एजेंसियों के द्वारा गिरफ्तारी की धमकी दी जाने की स्थिति में अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आधी रात को भी सुनवाई की मांग की जा सकती है. जस्टिस सूर्यकांत का कहना है, “मैं प्रयास कर रहा हूं कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहें. न्यायालय की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी व्यक्ति लीगल इमरजेंसी में कोर्ट पहुंच सके.”
संवैधानिक पीठ का होगा गठन
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं. इन मामलों का समय पर निपटारा एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसी वजह से अब ज्यादा से ज्यादा संवैधानिक पीठ बनाने पर विचार किया जा रहा है. उनका कहना है कि कई याचिकाएं सीधे संविधान से जुड़ी हुई हैं, जिन पर अलग और विस्तृत सुनवाई जरूरी है. इनमें SIR जैसे अहम मुद्दे भी शामिल हैं. बिहार के बाद देश के 11 राज्यों में SIR प्रक्रिया लागू है. इस प्रक्रिया को लेकर अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर जल्द फैसला जरूरी माना जा रहा है.
9 सदस्यीय पीठ बनाने पर विचार
CJI सूर्यकांत ने बताया कि सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला भी अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी. यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है. ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर गहन विचार जरूरी है. इसी कारण इस मामले की सुनवाई के लिए नौ सदस्यीय पीठ बनाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि हर पहलू पर विस्तार से चर्चा हो सके.
वकीलों के लिए भी बदले नियम
CJI सूर्यकांत ने वकीलों को लेकर भी सख्त संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि अहम मामलों में वकील कई-कई दिनों तक बहस नहीं कर सकते. इससे न्यायिक प्रक्रिया धीमी होती है. अब बहस के लिए तय समय सीमा लागू की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले वकीलों को उसी समय के भीतर अपनी मौखिक दलीलें पूरी करनी होंगी. समय सीमा का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा. इसका मकसद मामलों का तेजी से निपटारा करना है, ताकि न्याय मिलने में देरी न हो.
कब-कब हुई आधी रात को सुनवाई?
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने देर रात सुनवाई की हो. इससे पहले भी कई अहम मामलों में अदालत ने आधी रात को दरवाजे खोले हैं. साल 2005-06 में निठारी कांड की सुनवाई हुई थी. 1992 में अयोध्या विवाद पर भी रात में सुनवाई हुई. 2018 में कर्नाटक सरकार से जुड़ा मामला और 1993 में याकूब मेमन की फांसी से जुड़ा केस भी आधी रात को सुना गया था. इन मामलों में तात्कालिक फैसले की जरूरत को देखते हुए कोर्ट ने असाधारण कदम उठाए थे.
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