फेसबुक, इंस्टाग्राम और X के डिजाइन पर दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल, केंद्र से मांगा जवाब

Authored By: Nishant Singh

Published On: Thursday, September 17, 2026

Updated On: Thursday, September 17, 2026

Social Media Design पर दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल, फेसबुक इंस्टाग्राम और X के डिजाइन पर केंद्र से जवाब तलब

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जो यूजर्स को लंबे समय तक ऑनलाइन बनाए रखते हैं. जनहित याचिका में इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटोप्ले, रील्स और नोटिफिकेशन जैसे फीचर्स की समीक्षा की मांग की गई है. मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी.

Authored By: Nishant Singh

Updated On: Thursday, September 17, 2026

Social Media Design: सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग घंटों स्क्रॉल करते हैं. अब इन प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं, जो यूजर्स को लंबे समय तक ऐप पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या वह इस तरह के फीचर्स को लेकर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है.

तीन हफ्ते बाद होगी मामले की अगली सुनवाई

यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस अमित शर्मा की बेंच ने सुनवाई की. कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से केंद्र सरकार से निर्देश लेकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा. सुनवाई के दौरान ASG ने बताया कि फिलहाल इस विषय पर केंद्र की ओर से उन्हें कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी.

आखिर किन फीचर्स पर उठे सवाल?

जनहित याचिका कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कथूरिया की ओर से दाखिल की गई है. इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के डिजाइन को लेकर विशेषज्ञों की एक समिति बनाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि विवाद सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट को लेकर नहीं, बल्कि उन तकनीकी फीचर्स को लेकर है, जो यूजर का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखने के लिए तैयार किए गए हैं.

याचिका में इनफिनिट स्क्रॉल, वीडियो का ऑटोप्ले, शॉर्ट वीडियो और रील्स, यूजर की पसंद के मुताबिक तैयार होने वाली फीड, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और लाइक जैसे फीचर्स का उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार, इन फीचर्स की वजह से एक कंटेंट देखने के बाद दूसरा अपने आप सामने आता रहता है और यूजर बिना किसी स्पष्ट रुकावट के प्लेटफॉर्म पर समय बिताता रहता है.

युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी चिंता

याचिका में 15 से 24 वर्ष की उम्र के युवाओं को लेकर विशेष चिंता जताई गई है. इसमें लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े तनाव, साइबर बुलिंग, कम आत्मसम्मान, चिंता और डिप्रेशन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है. हालांकि, ये याचिकाकर्ता के दावे हैं और इन पर अदालत की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है.

विशेषज्ञ समिति और नियम बनाने की मांग

याचिकाकर्ता ने केंद्र से विशेषज्ञों की समिति गठित करने की मांग की है, जो ऐसे डिजाइन फीचर्स का वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित अध्ययन करे. इसके बाद सुरक्षा मानकों के आधार पर जरूरत के मुताबिक इन्हें सीमित या नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने की मांग की गई है.

याचिका में मेटा, गूगल, टेलीग्राम, X और स्नैपचैट जैसी कंपनियों से कथित मानसिक नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है. साथ ही स्पष्ट किया गया है कि याचिका का उद्देश्य सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि उन खास डिजाइन फीचर्स पर नियंत्रण की मांग करना है, जिन्हें यूजर्स को अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाला बताया गया है.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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