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सोनिया गांधी को कोर्ट ने क्यों भेजा नोटिस? नागरिकता से जुड़ा है मामला
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Tuesday, December 9, 2025
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. मामला उनके कथित रूप से भारतीय नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने से जुड़ा है. अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया सुने बिना आगे की कार्रवाई नहीं होगी. अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
Sonia Gandhi: दिल्ली की अदालत ने एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है क्योंकि उनके कथित रूप से भारतीय नागरिकता पाने से पहले ही नाम 1980 की वोटर लिस्ट में दर्ज होने का सवाल उठाया गया है. मामला तब और गंभीर हो गया जब वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की और इस दौरान आरोप लगाया कि उनके नाम के पहले दर्ज होने से प्रक्रिया में अनियमितता हुई. पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह मामला खारिज किया था, लेकिन राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इसे जांच योग्य मानते हुए नोटिस जारी किया. अदालत ने कहा है कि दोनों पक्षों की सुनवाई के बिना कोई अंतिम फैसला नहीं होगा. अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी, और देश की राजनीति इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है.
दरअसल, यह विवाद तब उठा जब वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की. उनका आरोप है कि सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता मिली, लेकिन इसके तीन साल पहले यानी 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम पहले से मौजूद था. याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में नाम केवल उन्हीं का शामिल हो सकता है, जिनके पास भारतीय नागरिकता हो, इसलिए 1980 की लिस्ट में एंट्री अपने आप में संदेह पैदा करती है.
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था मामला
सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं दे सका. कोर्ट ने यह भी माना कि FIR दर्ज कराने का आधार कमजोर है. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कोई स्पष्ट अपराध साबित नहीं होता. लेकिन अब रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई करते हुए राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि यह मामला पहली नजर में देखने लायक है. अदालत ने दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया सुने बिना आगे की कार्रवाई करना उचित नहीं माना. इस वजह से कोर्ट ने दोबारा नोटिस जारी कर दिया है.
6 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली के वकील ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है. उस आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की जा सकती. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में तीन साल पहले शामिल कर दिया गया, जबकि उनकी नागरिकता अभी तक नहीं बनी थी. कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया और TCR मंगवाया. मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी.
मामला क्या है?
याचिका में आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की वोटर लिस्ट में था. लेकिन उन्होंने भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को प्राप्त की थी. याचिका में सवाल उठाया गया कि नागरिक न होते हुए 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया. दावा किया गया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा भी दिया गया. याचिका में यह भी पूछा गया कि जब नागरिकता 1983 में मिली, तो 1980 में नाम दर्ज करने के लिए कौन से दस्तावेज़ पेश किए गए. क्या इसमें कोई जालसाजी हुई या गलत दस्तावेज़ का इस्तेमाल हुआ. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में याचिका खारिज कर दी थी. इसके खिलाफ अब रिवीजन पिटीशन दायर की गई है.
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