क्या आपके हेलमेट पर ECE, DOT, FIM, SNELL या ISI लिखा है? जानें क्या है इसका मतलब?

Authored By: संतोष आनंद

Published On: Monday, July 14, 2025

Last Updated On: Monday, July 14, 2025

हेलमेट पर ECE, DOT, SNELL, FIM, ISI सेफ्टी मार्किंग्स के साथ सुरक्षित राइडिंग का प्रतीक
हेलमेट पर ECE, DOT, SNELL, FIM, ISI सेफ्टी मार्किंग्स के साथ सुरक्षित राइडिंग का प्रतीक

अगर आप सिर्फ स्टाइल के लिए हेलमेट पहनते हैं, तो कोई भी चलेगा। लेकिन अगर आप अपनी जान की कीमत जानते हैं, तो हेलमेट खरीदते वक्त ISI के अलावा ECE, SNELL या FIM जैसे सर्टिफिकेशन जरूर देखें। ये सिर्फ अक्षर नहीं, आपकी जिंदगी की गारंटी हैं।

Authored By: संतोष आनंद

Last Updated On: Monday, July 14, 2025

अक्सर लोग हेलमेट को सिर्फ चालान से बचने का तरीका मानते हैं, लेकिन जो लोग बाइकिंग को सीरियसली लेते हैं, उनके लिए हेलमेट सिर्फ एक स्टाइल या सिर ढकने का जरिया नहीं है, बल्कि जान बचाने वाली एक तकनीकी ढाल है। और उस ढाल पर पीछे की तरफ कुछ खास अक्षर होते हैं, जैसे- ECE, DOT, FIM, SNELL, ISI। ये शब्द बताते हैं कि हेलमेट कितनी सुरक्षा देता है। आइए आपको बताते हैं ये सभी हेलमेट सेफ्टी स्टैंडर्ड क्या हैं और इनका क्या मतलब है:

ECE (Economic Commission for Europe)

यह यूरोपियन देशों का मानक है। साल 2000 में ECE 22.05 स्टैंडर्ड आया, जिसमें हेलमेट को 3 मीटर की ऊंचाई से गिराया जाता है और सिर पर पड़ने वाले झटके (G-force) मापे जाते हैं। यह झटका 275g से ज्यादा नहीं होना चाहिए। साल 2024 में ECE 22.06 आया, जो और सख्त है। अब हेलमेट पर तेज और धीमे दोनों स्पीड से टक्कर टेस्ट होती है। 45 डिग्री के एंगल से रोटेशनल इम्पैक्ट भी जांचा जाता है, जिससे दिमागी चोट का खतरा कम हो। अब हेलमेट के किसी भी 18 हिस्सों पर टेस्ट हो सकता है यानी चश्मा, वाइजर, सब कुछ।

DOT (Department of Transportation USA)

यह अमेरिका का स्टैंडर्ड है। इसमें हेलमेट पर दो तरह के अनविल (सपाट और गोल) से ऊंचाई से गिराकर टेस्ट किया जाता है। सिर पर लगने वाली ऊर्जा 400g से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एक और टेस्ट में 10 फीट ऊंचाई से ‘स्ट्राइकर’ गिराया जाता है, जो हेलमेट को चीर सके तो टेस्ट फेल। पर बड़ी बात यह है कि DOT में निर्माता खुद ही अपने हेलमेट को टेस्ट कर सकते हैं यानी कोई भी हेलमेट DOT स्टिकर लगाकर बिक सकता है, जब तक सरकार उसे चेक न करे। इसी कारण से कई राइडर्स DOT की जगह ECE या SNELL को बेहतर मानते हैं।

SNELL (Snell Memorial Foundation USA)

यह स्टैंडर्ड उस समय बना जब रेसिंग ड्राइवर पीट स्नेल की सिर की चोट से मौत हो गई थी। SNELL स्टैंडर्ड बहुत सख्त होते हैं। इसमें न सिर्फ फ्लैट और गोल, बल्कि तेज धार वाले एंगल से भी हेलमेट को टेस्ट किया जाता है। 275g से ज्यादा झटका नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, चिन गार्ड की मजबूती, हेलमेट का स्थिर रहना, वाइजर का टूटना और इमरजेंसी में हेलमेट खोलना भी टेस्ट किया जाता है। SNELL का सर्टिफिकेशन अनिवार्य नहीं है, लेकिन जिसे मिलता है, वह प्रीमियम हेलमेट माना जाता है।

ISI (Indian Standard Institute)

यह भारत में इस्तेमाल होने वाला मानक है। भारत में जो भी हेलमेट बिकता है, उसमें ISI मार्क होना जरूरी है, चाहे उसमें ECE या SNELL सर्टिफिकेशन हो। हालांकि ISI का टेस्ट ECE या SNELL जितना सख्त नहीं है। इसमें पुरानी ECE गाइडलाइन जैसा ही बेसिक टेस्ट होता है। इसलिए इंडिया में सस्ते हेलमेट पर सिर्फ ISI मार्क देखकर यह मानना कि वह सुरक्षित है, थोड़ा गलतफहमी हो सकती है।

FIM (Fédération Internationale de Motocyclisme)

यह दुनिया का सबसे हाई-लेवल सेफ्टी स्टैंडर्ड है, जिसे MotoGP जैसी रेसिंग में इस्तेमाल किया जाता है। FIM सर्टिफाइड हेलमेट पर रोटेशनल इम्पैक्ट, तेज रफ्तार से टक्कर, वाइजर, स्ट्रक्चर और सब कुछ का टेस्ट होता है। साल 2024 तक 28 कंपनियों के 52 हेलमेट इस टेस्ट में पास हुए हैं। ये वही हेलमेट हैं जो प्रोफेशनल राइडर्स पहनते हैं।

अगर आप सिर्फ स्टाइल के लिए हेलमेट पहनते हैं, तो कोई भी चलेगा। लेकिन अगर आप अपनी जान की कीमत जानते हैं, तो हेलमेट खरीदते वक्त ISI के अलावा ECE, SNELL या FIM जैसे सर्टिफिकेशन जरूर देखें। ये सिर्फ अक्षर नहीं, आपकी जिंदगी की गारंटी हैं।

तकनीकी क्षेत्र में 15 वर्षों के अनुभव के साथ, संतोष आनंद कंप्यूटर, नेटवर्किंग, और सॉफ्टवेयर जैसे विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं। नवीनतम तकनीकी प्रगतियों से हमेशा अपडेट रहते हुए, उन्होंने अपनी लेखनी से हजारों पाठकों के लिए तकनीकी समस्याओं के प्रभावी समाधान प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, मोबाइल फोन, और बॉलीवुड एवं एंटरटेनमेंट जैसे विविध विषयों पर भी लेख लिखे हैं। उनकी लेखनी तकनीकी विषयों को सरल और व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को आसानी से समझने और उनके उपयोग में मदद करती है।
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