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Adhik Maas Ekadashi Vrat 2026: अधिकमास 2026 में कब हैं पद्मिनी और परमा एकादशी? जानें तिथि, महत्व और शुभ फल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, June 5, 2026
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
Adhik Maas Ekadashi Vrat 2026: अधिकमास 2026 में दो विशेष एकादशी व्रत पड़ेंगे पद्मिनी एकादशी 27 मई और परमा एकादशी 11 जून को. भगवान विष्णु को समर्पित इन दुर्लभ एकादशियों का व्रत, पूजा और दान-पुण्य अत्यंत फलदायी माना जाता है. जानिए इनकी तिथि, धार्मिक महत्व और अधिकमास में किए जाने वाले शुभ कार्य.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
Adhik Maas Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है. यह विशेष महीना लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम देकर इसे विशेष स्थान प्रदान किया है. वर्ष 2026 में अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा. इस दौरान किए गए जप, तप, दान, पूजा और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है.
अधिकमास में एकादशी का क्यों है खास महत्व?
एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है. जब यह तिथि अधिकमास में आती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि अधिकमास में रखे गए एकादशी व्रत से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. माना जाता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है.
अधिकमास 2026 में कौन-कौन सी एकादशी पड़ेगी?
इस वर्ष अधिकमास में दो विशेष एकादशी व्रत पड़ रहे हैं. ये दोनों एकादशियां केवल अधिकमास में ही आती हैं और इसलिए इनका महत्व सामान्य एकादशियों से अधिक माना जाता है.
1. पद्मिनी एकादशी – 27 मई 2026 – अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है. इस वर्ष यह व्रत 27 मई को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य प्रदान करने वाली मानी जाती है.
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है. श्रद्धापूर्वक व्रत करने से आर्थिक समस्याओं में कमी आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. जो लोग धन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एकादशी विशेष लाभकारी मानी जाती है.
2. परमा एकादशी – 11 जून 2026 – अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है. वर्ष 2026 में यह व्रत 11 जून को रखा जाएगा. धर्मशास्त्रों में इसे अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायक एकादशी माना गया है.
मान्यता है कि इस व्रत को करने से दरिद्रता दूर होती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति को जीवन में उन्नति प्राप्त होती है. साथ ही यह व्रत जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है. परमा एकादशी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है.
परमा एकादशी पर पंचदान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी के दिन पांच प्रकार के दान विशेष फल प्रदान करते हैं.
- अन्न दान
- विद्या दान
- स्वर्ण दान
- भूमि दान
- गौदान
इन दानों को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है.
अधिकमास में जरूर करें ये शुभ कार्य
अधिकमास को आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है. इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं.
भगवान विष्णु की आराधना- प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करें और उनके मंत्रों का जाप करें.
तुलसी पूजन – तुलसी के पौधे के पास प्रतिदिन घी का दीपक जलाएं. इसे अत्यंत शुभ माना गया है.
दान-पुण्य करें – अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, फल, वस्त्र या घड़ा दान करें.
सात्विक जीवन अपनाएं – अधिकमास में मांसाहार और तामसिक भोजन से बचना चाहिए. केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करना उत्तम माना गया है.
धार्मिक ग्रंथों का पाठ – भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है.
अधिकमास का संदेश
अधिकमास केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, भक्ति और पुण्य कमाने का विशेष अवसर माना जाता है. इस दौरान आने वाली पद्मिनी और परमा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग लेकर आती हैं. श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत, पूजा तथा दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है.
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