Alpha Film Review: आलिया भट्ट और शरवरी का दमदार एक्शन, लेकिन कमजोर कहानी ने फीकी कर दी पूरी चमक
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, September 1, 2026
Updated On: Tuesday, September 1, 2026
Alpha Film Review: YRF Spy Universe की ‘ऐल्फा’ बड़े स्तर पर बनी महिला-केंद्रित स्पाय एक्शन फिल्म है, जिसमें आलिया भट्ट और शरवरी के दमदार एक्शन सीक्वेंस खास आकर्षण हैं. स्टाइलिश विजुअल्स और तेज-तर्रार एक्शन के बावजूद कमजोर लेखन, कम भावनात्मक गहराई और घिसे-पिटे स्पाय फॉर्मूले के कारण फिल्म पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाती.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Tuesday, September 1, 2026
Alpha Film Review: YRF Spy Universe की फिल्में आमतौर पर गहरी जासूसी कहानी से ज्यादा बड़े सितारों, तेज एक्शन और मनोरंजन के लिए पहचानी जाती हैं. ‘ऐल्फा’ इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि कहानी के केंद्र में महिला किरदार हैं. बड़े स्तर पर बनी यह फिल्म एक अलग तरह का स्पाय अनुभव देने की कोशिश करती है, हालांकि कई जगह इसकी कहानी और लेखन कमजोर पड़ जाते हैं.
कहानी में है दर्द, लेकिन भावनात्मक पकड़ कम
‘ऐल्फा’ की कहानी ऐसी लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका बचपन सामान्य नहीं रहा. उसने परिवार का सुख नहीं देखा और जिसे अपना समझा, उसी से उसे धोखा मिला. उसके भीतर का संघर्ष फिल्म के लिए मजबूत आधार बन सकता था, लेकिन स्क्रीन पर उस दर्द को उतनी गहराई नहीं मिलती, जितनी कहानी मांगती है. दर्शक किरदार के साथ जुड़ने की कोशिश करता है, मगर भावनात्मक दूरी बनी रहती है.
एक्शन है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
जहां कहानी लड़खड़ाती है, वहीं एक्शन फिल्म को संभालने की कोशिश करता है. फिल्म को स्लीक और स्टाइलिश अंदाज में पेश किया गया है. खासकर आलिया भट्ट और शरवरी के किरदारों की पहली भिड़ंत वाला सीक्वेंस ध्यान खींचता है. दोनों के बीच होने वाली लड़ाई को जिस तरह कोरियोग्राफ किया गया है, उसमें ऊर्जा और ताजगी महसूस होती है.
फिल्म के एक्शन की खास बातें:
- बड़े स्तर पर डिजाइन किए गए एक्शन सीक्वेंस
- आलिया और शरवरी की ऑन-स्क्रीन भिड़ंत
- स्टाइलिश विजुअल ट्रीटमेंट
- एक्शन के साथ बैकग्राउंड म्यूजिक का इस्तेमाल
देशभक्ति और विलेन वाला फॉर्मूला
फिल्म खुद को देशभक्ति के रंग में भी रंगती है. इसी कोशिश में पाकिस्तान को विरोधी पक्ष के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. समस्या यह है कि फिल्म का यह हिस्सा कई जगह काफी जाना-पहचाना लगता है. आज के दर्शक कहानी में कुछ नया और विश्वसनीय देखना चाहते हैं, लेकिन ‘ऐल्फा’ कई मौकों पर पुराने स्पाय-फिल्म फॉर्मूले से बाहर नहीं निकल पाती.
लेखन में सबसे ज्यादा कमी
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी राइटिंग नजर आती है. कई घटनाएं और किरदार वास्तविक दुनिया से दूर लगते हैं. फिल्म बड़े विचार और बड़े संदेश देने की कोशिश करती है, लेकिन उन्हें स्वाभाविक तरीके से कहानी में पिरोने में पूरी तरह सफल नहीं होती. यही वजह है कि शानदार सेटअप और बड़े एक्शन के बावजूद कहानी कई जगह सपाट महसूस होती है.
‘ऐल्फा’ और बदलता दर्शक
आज का दर्शक सोशल मीडिया, इंटरनेशनल सिनेमा और अलग-अलग तरह की कहानियों से लगातार जुड़ा हुआ है. ऐसे में सिर्फ स्टार पावर और चमकदार एक्शन के सहारे फिल्म को लंबे समय तक बांधे रखना आसान नहीं है. ‘ऐल्फा’ में मनोरंजन देने की पूरी कोशिश दिखाई देती है, लेकिन कई जगह यही कोशिश जरूरत से ज्यादा साफ नजर आने लगती है.
क्या फिल्म देखनी चाहिए?
अगर आपको बड़े पर्दे पर एक्शन, स्टाइल और महिला-केंद्रित स्पाय फिल्में पसंद हैं, तो ‘ऐल्फा’ आपको कुछ अच्छे पल दे सकती है. लेकिन अगर आप मजबूत स्क्रीनप्ले, भावनात्मक गहराई और यथार्थ के करीब जासूसी कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो निराशा हो सकती है.
सबसे जरूरी बात यही है कि फिल्म को सोशल मीडिया की राय के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी पसंद और फिल्म की वास्तविक खूबियों-कमियों के आधार पर आंकना बेहतर होगा. ‘ऐल्फा’ में दमदार एक्शन जरूर है, लेकिन कमजोर लेखन उसकी पूरी क्षमता को सामने आने से रोक देता है.
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