GRAP-2 भी बेअसर! दिल्ली की हवा में घुला जहर, जहांगीरपुरी समेत कई इलाकों में AQI 400 पार
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Wednesday, November 4, 2026
Updated On: Wednesday, November 4, 2026
दिल्ली की हवा में सांस लेना फिर से मुश्किल होता जा रहा है क्योकि प्रदूषण ने फिर खतरनाक रफ्तार पकड़ ली है. GRAP-2 लागू होने के बाद से गाड़ियों की जांच से लेकर निर्माण कार्यों पर सख्ती बढ़ाई गई लेकिन हवा सुधरने का नाम नहीं ले रही. मंदिर मार्ग से जहांगीरपुरी समेत कई इलाकों में जहरीली हवा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आखिर तमाम पाबंदियों के बाद भी राजधानी दिल्ली को साफ हवा क्यों नहीं मिल रही?
Authored By: Mazhar Pathan
Updated On: Wednesday, November 4, 2026
देश की राजधानी दिल्ली जिसे दिल वालो की दिल्ली कहा जाता है उसपर प्रदूषण का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. मौजूदा हालात ऐसे हैं कि GRAP-2 लागू होने के बावजूद भी कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहतर नहीं हो पा रहा है. 4 नवंबर की सुबह मंदिर मार्ग में AQI 508 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी में 447 और पंजाबी बाग में 447 का स्तर सामने आया. दूसरी तरफ दिल्ली के बाहर से आने वाले BS-VI से नीचे के पेट्रोल-डीजल वाहनों पर प्रतिबंध और बॉर्डर पर सख्त जांच भी जारी है. इसके बावजूद सवाल बना हुआ है आखिर दिल्ली की हवा साफ क्यों नहीं हो पा रही?
हवा में जहर, सांसों पर आफत
4 नवंबर की सुबह दिल्ली की हवा ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी. CPCB और IITM के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 369 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. वहीं कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच गया.
मंदिर मार्ग में AQI 508 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में 447-447 का स्तर सामने आया. रोहिणी में 433, विवेक विहार में 428, अलीपुर में 419 और नरेला में 418 AQI दर्ज किया गया. यानी राजधानी के कई इलाकों में लोगों को बेहद प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ रही है.
GRAP-2 लागू, फिर भी राहत नहीं
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने के बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट यानी CAQM ने 2 नवंबर को GRAP के दूसरे चरण को लागू कर दिया था. इसके तहत सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.
सड़कों की मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग बढ़ाने, पानी के छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल और धूल वाले इलाकों पर विशेष निगरानी जैसे कदम इसमें शामिल हैं. निजी वाहनों का इस्तेमाल कम कराने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के उपाय भी किए जा रहे हैं. लेकिन इन तमाम कोशिशों के बीच AQI का गंभीर श्रेणी में पहुंचना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है.
मंदिर मार्ग में AQI 508!
4 नवंबर की सुबह मंदिर मार्ग की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही. यहां AQI 508 दर्ज किया गया, जो सामान्य गंभीर श्रेणी की अधिकतम सीमा 500 से भी ऊपर है. जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, रोहिणी और विवेक विहार जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर 400 के पार रहा. यह आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण का असर हर इलाके में एक जैसा नहीं है. कुछ क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है, लेकिन प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट में लोगों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
BS-VI से नीचे की गाड़ियों पर भी रोक
प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली में 1 नवंबर से बाहर के राज्यों में पंजीकृत BS-VI से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लागू किया गया है. इसके बाद दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत, गुरुग्राम और बहादुरगढ़ समेत कई बॉर्डर पर वाहनों की जांच तेज की गई है. जांच के दौरान वाहनों के उत्सर्जन मानक और जरूरी दस्तावेज देखे जा रहे हैं. नियमों के दायरे में आने वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से रोका जा रहा है. इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को निर्धारित छूट दी गई है.
हालांकि, वाहनों पर प्रतिबंध प्रदूषण नियंत्रण की पूरी रणनीति का केवल एक हिस्सा है. सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने जैसे स्रोतों पर भी कार्रवाई जरूरी है.
गुरुग्राम में निर्माण पर सख्ती
दिल्ली के साथ-साथ NCR के दूसरे शहरों में भी प्रदूषण को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं. गुरुग्राम में 5 से 20 नवंबर तक धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है.
इसके अलावा कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम करने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने से जुड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं. दिल्ली में PWD की ओर से ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल की तैयारी की गई है. इन उपायों का उद्देश्य सड़कों और निर्माण क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना है.
AQI 400 पार होने का मतलब समझिए
CPCB के मानकों के अनुसार AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच होने पर ‘गंभीर’ श्रेणी में आती है. गंभीर स्तर पर प्रदूषण स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है. सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है.
ऐसे हालात में बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. बाहर की अनावश्यक गतिविधियां कम रखें और जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें. सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
आखिर कब साफ होगी दिल्ली की हवा?
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए GRAP-2, वाहनों पर प्रतिबंध, बॉर्डर चेकिंग और निर्माण गतिविधियों पर सख्ती जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. लेकिन हवा की गुणवत्ता पर मौसम का भी बड़ा असर पड़ता है. हवा की कम रफ्तार और वातावरण में प्रदूषकों के जमा होने से स्थिति और खराब हो सकती है.
इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं से उठने वाला धुआं भी अनुकूल मौसम परिस्थितियों में दिल्ली-NCR की हवा को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में प्रदूषण से लड़ाई केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रह सकती. पूरे NCR और आसपास के राज्यों में लगातार समन्वित कार्रवाई जरूरी है. फिलहाल दिल्ली के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रदूषण रोकने के लिए इतने कदम उठाए जा रहे हैं, तो राहत कब मिलेगी? राजधानी को साफ हवा दिलाने के लिए अब केवल पाबंदियां लागू करना काफी नहीं होगा, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले हर स्रोत पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी.
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