दिल्ली के चावड़ी बाजार में तीन मंजिला इमारत ढही: दो की मौत, फिर सवालों के घेरे में MCD और सरकार की बिल्डिंग सुरक्षा व्यवस्था

Authored By: Mazhar Pathan

Published On: Thursday, November 5, 2026

Updated On: Thursday, November 5, 2026

चावड़ी बाजार बिल्डिंग हादसा: दो लोगों की मौत

दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. सितंबर में सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की जान जाने के बाद MCD ने सर्वे, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी. फिर सवाल है कि सरकारी अभियान के बावजूद दिल्ली में इमारतें क्यों गिर रही हैं? क्या बिल्डिंग सुरक्षा के नियम सिर्फ हादसों के बाद याद आते हैं?

Authored By: Mazhar Pathan

Updated On: Thursday, November 5, 2026

दिल्ली में एक बार फिर इमारत गिरने से लोगों की जान चली गई. पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई. हादसा गली सत्तारा, शीश महल में चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के सामने हुआ. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई. दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं.

यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब सितंबर में दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी. उस घटना के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम ने अवैध निर्माण तथा खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया था. अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, संपत्तियां सील की गईं और कई इमारतों को गिराया गया. इसके बावजूद चावड़ी बाजार में एक और बड़ा हादसा कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. क्या दिल्ली में निर्माण कार्यों की निगरानी पर्याप्त है? क्या MCD को खतरनाक इमारतों की जानकारी समय रहते मिलती है? और सबसे बड़ा सवाल. आखिर हर हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों खुलती है?

चावड़ी बाजार में सुबह 9:50 बजे हुआ हादसा, मलबे में दबे लोगों की तलाश

दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार, 5 नवंबर की सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई. दमकल विभाग को गली सत्तारा, शीश महल में मेट्रो स्टेशन के सामने इमारत गिरने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया.

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में दो लोगों की मौत हुई है. दमकल विभाग के अधिकारी ने कम से कम 15 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई थी. हालांकि, मलबे में वास्तव में कितने लोग दबे हैं, इसकी अंतिम संख्या तत्काल स्पष्ट नहीं थी.

मौके पर दमकल विभाग की छह गाड़ियां तैनात की गईं. पुलिस और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश में जुटे रहे. अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों तक पहुंचना और घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना है.

संकरी गलियों के कारण राहत अभियान में चुनौती

चावड़ी बाजार पुरानी दिल्ली के उन इलाकों में शामिल है, जहां बाजार, दुकानें, रिहायशी मकान और निर्माण गतिविधियां बेहद घनी आबादी के बीच मौजूद हैं. यहां की गलियां काफी संकरी हैं. ऐसे में किसी बड़ी इमारत के ढहने पर राहत और बचाव दल को मौके तक पहुंचने तथा भारी मशीनरी का इस्तेमाल करने में मुश्किल हो सकती है.

इस हादसे में भी संकरी गलियों के कारण बचाव कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई. ऐसी जगहों पर सिर्फ दमकल की गाड़ियां भेजना पर्याप्त नहीं होता. राहत अभियान के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं और निर्माण विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है.

इसके साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि घनी आबादी वाले इलाकों में निर्माण कार्य की अनुमति देते समय आपातकालीन रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था का कितना ध्यान रखा जाता है. यदि किसी निर्माण स्थल तक दमकल और एंबुलेंस आसानी से नहीं पहुंच सकतीं, तो वहां अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों की जरूरत और बढ़ जाती है.

सत्य निकेतन हादसे में गई थीं सात जानें, फिर भी क्यों नहीं थम रहे हादसे?

चावड़ी बाजार की घटना ने सितंबर 2026 में हुए सत्य निकेतन हादसे की याद ताजा कर दी है. 6 सितंबर को दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिर गई थी. इस इमारत में पीजी आवास संचालित हो रहा था. हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र भी शामिल थे.

इस घटना के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण, इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा और नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था. अदालत ने MCD को उच्चस्तरीय जांच करने और पीजी तथा हॉस्टल इमारतों का व्यापक ऑडिट कराने का निर्देश दिया था. साथ ही यह पता लगाने को कहा गया था कि निर्माण के लिए जरूरी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं और किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने अपने पांच अधिकारियों को निलंबित किया था. इसके बाद भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया और अलग-अलग जोन में अवैध निर्माण तथा खतरनाक इमारतों के खिलाफ अभियान चलाया गया.

लेकिन चावड़ी बाजार में हुए ताजा हादसे के बाद सवाल है कि क्या यह अभियान सिर्फ कुछ समय तक चलने वाली कार्रवाई बनकर रह गया है? क्या शहर की हर संवेदनशील इमारत की नियमित जांच हो रही है? और क्या निर्माणाधीन इमारतों पर भी उतनी ही सख्ती से निगरानी रखी जा रही है जितनी पुराने भवनों पर?

1,046 संपत्तियों पर कार्रवाई का दावा, फिर भी सुरक्षा पर सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ अभियान चलाने की जानकारी दी थी. इंडियन एक्सप्रेस की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच MCD ने 1,046 संपत्तियों पर कार्रवाई की थी. इनमें 282 संपत्तियां सील की गईं और 47 खतरनाक इमारतों को ध्वस्त किया गया. यह कार्रवाई दिल्ली के सभी 12 MCD जोन में की गई थी.

यह आंकड़ा बताता है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की थी. लेकिन अब चावड़ी बाजार की घटना यह जांचने की जरूरत पैदा करती है कि इस अभियान का असर जमीन पर कितना हुआ.
सिर्फ संपत्तियों को सील करना या कुछ इमारतों को गिराना पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि निर्माण की अनुमति, नक्शे की मंजूरी, भवन की संरचनात्मक मजबूती और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की नियमित जांच हो. खासतौर पर उन इलाकों में जहां पुरानी इमारतों के साथ नई मंजिलें बनाई जा रही हैं या बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है.

सरकार और MCD को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई के बाद कितनी इमारतों की दोबारा जांच हुई, कितने निर्माण स्थलों पर काम रुकवाया गया और कितने मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई.

क्या MCD के सर्वे में छूट रही हैं खतरनाक इमारतें?

सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी और हॉस्टल इमारतों की सुरक्षा को लेकर MCD के सर्वे और अदालत में दिए गए ब्योरे ने भी कई सवाल खड़े किए थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, MCD ने दिल्ली में पीजी आवास के तौर पर इस्तेमाल हो रही 2,453 इमारतों की पहचान की थी. बाद में निगम ने अदालत को बताया कि इनमें से बड़ी संख्या में इमारतों के स्वीकृत नक्शे का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहा था.

यह मामला सिर्फ पीजी इमारतों तक सीमित नहीं है. दिल्ली के पुराने बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों और घनी आबादी वाले इलाकों में भी भवनों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है. कई जगह पुरानी इमारतों में मरम्मत, पुनर्निर्माण या अतिरिक्त निर्माण का काम होता है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि निर्माण निर्धारित नियमों के मुताबिक हो रहा है या नहीं.

चावड़ी बाजार जैसे इलाकों में यह जांच और भी जरूरी हो जाती है, जहां एक इमारत गिरने का असर आसपास की इमारतों और लोगों पर भी पड़ सकता है. इसलिए हादसे के बाद सिर्फ मलबा हटाना नहीं, बल्कि आसपास के भवनों की सुरक्षा का तत्काल आकलन करना भी जरूरी है.

सरकार की नीतियों पर सवाल: हादसों के बाद कार्रवाई या पहले से रोकथाम?

दिल्ली में इमारत गिरने की घटनाएं एक बुनियादी सवाल उठाती हैं. क्या सरकार और नगर निगम की नीति हादसों के बाद कार्रवाई करने तक सीमित है, या प्रशासन के पास दुर्घटनाएं रोकने की प्रभावी व्यवस्था भी है?

बिल्डिंग सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें MCD के भवन विभाग, स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग, पुलिस और निर्माण से जुड़े अन्य प्राधिकरणों की भूमिका होती है. निर्माण की अनुमति देने से लेकर मौके पर निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने तक पूरी व्यवस्था को जवाबदेह होना चाहिए.

सरकार को कुछ अहम सवालों के जवाब देने होंगे:

  • क्या दिल्ली की सभी पुरानी और निर्माणाधीन इमारतों का जोखिम के आधार पर सर्वे किया जा रहा है?
  • क्या भवनों के स्वीकृत नक्शे और निर्माण की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाता है?
  • क्या बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिल बनाने या संरचनात्मक बदलाव करने वालों पर समय रहते कार्रवाई होती है?
  • क्या MCD के भवन विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ हैं?
  • क्या हादसे के बाद शुरू होने वाले अभियानों की नियमित समीक्षा होती है?
  • क्या लापरवाही साबित होने पर सिर्फ निलंबन होता है या जिम्मेदार अधिकारियों और भवन मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी पूरी की जाती है?

इन सवालों का जवाब सिर्फ प्रेस रिलीज या कार्रवाई के आंकड़ों से नहीं मिल सकता. इसके लिए पारदर्शी जांच, सार्वजनिक रिपोर्ट और जवाबदेही तय करने की जरूरत है.

चावड़ी बाजार हादसे के बाद प्रशासन को क्या करना चाहिए?

इस हादसे में सबसे पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को इलाज उपलब्ध कराना है. इसके बाद हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी. जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इमारत का निर्माण किसकी अनुमति से हो रहा था, क्या स्वीकृत नक्शा मौजूद था, निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और क्या संबंधित विभाग को किसी संभावित खतरे की पहले से जानकारी थी. इसके अलावा आसपास की इमारतों की संरचनात्मक जांच भी जरूरी है. यदि किसी भवन में दरारें, कमजोर दीवारें या अन्य खतरे दिखाई देते हैं, तो वहां रहने वाले लोगों और दुकानदारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए.

दिल्ली सरकार और MCD को शहर के लिए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें खतरनाक इमारतों की पहचान हादसे से पहले हो. निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण हो और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे.

About the Author: Mazhar Pathan
मैं पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। इस दौरान न्यूज़ रूम से लेकर ज़मीनी स्तर तक पत्रकारिता के विभिन्न आयामों में काम करने का अनुभव हासिल किया है। ऑफिस में वीडियो एंकरिंग से लेकर फील्ड में ग्राउंड रिपोर्टिंग तक, मैंने अलग-अलग विषयों और मुद्दों पर काम किया है। सामाजिक, राजनीतिक, समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग, लेखन और वीडियो कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
Leave A Comment

यह भी पढ़ें

Email marketing icon with envelope and graph symbolizing growth

news via inbox

समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।

खास आकर्षण