डॉलर के सामने क्यों कमजोर पड़ रहा रुपया, क्या सच में आएगा ‘100 का डर’?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, May 20, 2026

Last Updated On: Wednesday, May 20, 2026

डॉलर के सामने कमजोर होता भारतीय रुपया और Rupee vs Dollar से जुड़ी आर्थिक चिंता
डॉलर के सामने कमजोर होता भारतीय रुपया और Rupee vs Dollar से जुड़ी आर्थिक चिंता

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और 96.52 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है. बढ़ती तेल कीमतें, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक तनाव इसकी बड़ी वजह हैं. विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है, लेकिन सभी मानते हैं कि आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, May 20, 2026

Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया इन दिनों लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है. 19 मई 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.52 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया. साल की शुरुआत में जहां एक डॉलर करीब 89 रुपये के बराबर था, वहीं कुछ महीनों में ही रुपया 6-7 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है. इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की निकासी मानी जा रही है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ने लगता है. दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने से भी रुपये पर दबाव बढ़ा है.

कुछ एक्सपर्ट्स बोले- 100 के पार जा सकता है रुपया

कई अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो रुपया जल्द ही 100 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है. अर्थशास्त्री Santosh Mehrotra का कहना है कि रुपये में लगातार गिरावट का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा. उनके अनुसार, यदि तेल की कीमतें और वैश्विक दबाव इसी तरह बने रहे तो अगले कुछ महीनों में 100 का स्तर छूना मुश्किल नहीं होगा.

वहीं करेंसी एक्सपर्ट K. N. Dey का भी मानना है कि बाजार में गिरावट की रफ्तार काफी तेज हो चुकी है. उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा जिससे यह तय हो सके कि रुपया कहां जाकर स्थिर होगा. उनके मुताबिक, बाजार में मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ रहा है और ऐसे में 100 का आंकड़ा अब केवल कल्पना नहीं रह गया है.

RBI पर भरोसा, कुछ विशेषज्ञों ने जताई राहत

हालांकि सभी विशेषज्ञ इतने निराश नहीं हैं. कई जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक हालात को पूरी तरह बिगड़ने नहीं देगा. फाइनेंस एनालिस्ट Dhiraj Nim का कहना है कि RBI फिलहाल रुपये को 100 के स्तर तक जाने से रोकने की कोशिश करेगा. उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक के पास बाजार में हस्तक्षेप करने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है.

इसी तरह बार्कलेज के एशियाई FX रणनीतिकार Mitul Kotecha ने भी साफ कहा कि उनके आधिकारिक अनुमान में रुपया 100 के स्तर तक नहीं पहुंचेगा. हालांकि उन्होंने माना कि रुपये की गिरावट उम्मीद से ज्यादा तेज रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात थोड़ा स्थिर होते हैं और विदेशी निवेश वापस लौटता है तो रुपया दोबारा मजबूत हो सकता है.

नियंत्रित गिरावट को कुछ विशेषज्ञ मानते हैं सामान्य प्रक्रिया

Nilesh Shah जैसे कुछ विशेषज्ञ रुपये की कमजोरी को पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते. उनका कहना है कि समय के साथ हर देश की मुद्रा में बदलाव आता है और अगर यह गिरावट धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से होती है तो इसे अर्थव्यवस्था के लिए सामान्य माना जा सकता है. उनके अनुसार, कमजोर रुपया कई बार निर्यात को बढ़ावा देता है और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं.

हालांकि आम लोगों के लिए इसका असर अलग होता है. रुपया कमजोर होने का मतलब है कि विदेश से आने वाली चीजें महंगी होंगी. पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई जरूरी आयातित सामानों की कीमत बढ़ सकती है, जिसका असर सीधे जेब पर पड़ेगा.

आगे क्या होगा, सबकी नजर तेल और वैश्विक हालात पर

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रुपया आखिर कितना और गिरेगा. इसका जवाब काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव पर निर्भर करेगा. अगर पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होते हैं और विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो रुपया दोबारा 92-93 के स्तर तक मजबूत हो सकता है. वहीं अगर संकट गहराता है, तो 100 का स्तर भी हकीकत बन सकता है.

फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक के पास करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो रुपये को संभालने में मदद कर सकता है. लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं रहने वाले. रुपया चाहे 100 पार करे या नहीं, लेकिन महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता अभी खत्म होती नहीं दिख रही.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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