चोरी या तस्करी से अमेरिका गए अति प्राचीन कलाकृतियों की होगी वतन वापसी

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Monday, September 23, 2024

India and US singed agreement on ancient artifacts
India and US singed agreement on ancient artifacts

अमेरिकी प्रशासन ने प्रधानमंत्री मोदी की इस अमेरिका यात्रा के अवसर पर चोरी या तस्करी के माध्यम से विदेश गई 297 प्राचीन वस्तुएं भारत को वापस लौटाया है। ये सभी अति प्राचीन वस्तुएं जल्द भी अपनी धरती पर पहुंच जाएगा।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Monday, September 23, 2024

जुलाई 2024 में भारत और अमेरिका के बीच एक सांस्कृतिक संपदा समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था। इसका लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना था। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इसको लेकर प्रतिबद्धताएं भी व्यक्त किया था। अब इस पर अमल करते हुए अमेरिकी प्रशासन ने प्रधानमंत्री मोदी की इस अमेरिका यात्रा के अवसर पर चोरी या तस्करी के माध्यम से विदेश गई 297 प्राचीन वस्तुएं भारत को वापस लौटाया है। ये सभी अति प्राचीन वस्तुएं जल्द भी अपनी धरती पर पहुंचेगा।

हजारों साल पुरानी है कलाकृतियां

प्रधानमंत्री मोदी ने इन कलाकृतियों की वापसी में सहयोग के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद दिया। ये पुरावशेष वस्तुएं लगभग 4000 वर्ष पुरानी समयावधि अर्थात 2000 ईसा पूर्व से लेकर 1900 ईसवी तक की हैं। इसे देश के विभिन्न हिस्सों से चुराया और तस्करी किया गया था। इनमें से अधिकांश पुरावशेष पूर्वी भारत की टेराकोटा कलाकृतियां हैं। जबकि अन्य वस्तुएं पत्थर, धातु, लकड़ी तथा हाथी दांत से बनी हैं। ये सभी देश के विभिन्न भागो से संबंधित हैं।

जुलाई 2024 में हुए थे हस्ताक्षर

पिछले साल जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। इस वार्ता में अन्य मुद्दों के अलावा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा पर चर्चा हुई थी। इसे दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में भी जिक्र किया था। इसके बाद जुलाई 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अमेरिकी विदेश विभाग के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मामलों के ब्यूरो ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने और बेहतर सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के लिए एक सांस्कृतिक संपदा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

मोदी ने बाइडेन को कहा धन्यवाद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन कलाकृतियों की वापसी में सहयोग करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद कहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि ये पुरावशेष न केवल भारत की ऐतिहासिक भौतिक संस्कृति का हिस्सा थे, बल्कि भारतीय सभ्यता एवं चेतना का आंतरिक आधार भी थे।

वर्ष 2014 के बाद सैकड़ों कलाकृतियां आया वापस

केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद से देश से चोरी या तस्करी से विदेश पहुंचाई गई सांस्कृतिक संपदा की वतन वापसी हुई है। वर्ष 2016 से, अमेरिका की सरकार ने बड़ी संख्या में ऐसी प्राचीन वस्तुओं की भारत वापसी की सुविधा प्रदान की। जून 2016 में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान 10 पुरावशेष लौटाए गए। सितंबर, 2021 में उनकी यात्रा के दौरान 157 वस्तुएं आये। पिछले वर्ष जून में उनकी यात्रा के दौरान 105 पुरावशेष लौटाए गए है। 2016 के बाद देखें तो अमेरिका से भारत को लौटाई गई सांस्कृतिक कलाकृतियों की कुल संख्या 578 हो चुकी है। यह किसी भी देश द्वारा भारत को लौटाई गई सांस्कृतिक पुरावशेष की सर्वाधिक संख्या है।

इस बार जिन कलाकृतियों की वतन वापसी हो रही है, उनमें ये महत्वपूर्ण कलाकृतियां हैं-

  • मध्य भारत से प्राप्त बलुआ पत्थर की 10-11 वीं शताब्दी ई. की अप्सरा मूर्ति।
  • मध्य भारत से मिली कांस्य की बनी जैन तीर्थंकर की 15-16 वीं शताब्दी की प्रतिमा।
  • पूर्वी भारत से प्राप्त तीसरी-चौथी शताब्दी में बना टेराकोटा फूलदान।
  • दक्षिण भारत की पत्थर की मूर्ति पहली शताब्दी ईसा पूर्व से पहली शताब्दी ईसवी तक की है।
  • 17-18 वीं शताब्दी ई. के दक्षिण भारत से प्राप्त कांस्य के बने भगवान गणेश।
  • 15-16 वीं शताब्दी की उत्तर भारत से प्राप्त बलुआ पत्थर से बनी भगवान बुद्ध की खड़ी प्रतिमा।
  • 17-18 वीं शताब्दी ई. की पूर्वी भारत से प्राप्त भगवान विष्णु की कांस्य प्रतिमा।
  • 2000-1800 ईसा पूर्व से संबंधित उत्तर भारत से तांबे में तैयार मानवरूपी आकृति।
  • 17-18 वीं शताब्दी की दक्षिण भारत से प्राप्त भगवान कृष्ण की कांस्य मूर्ति।
  • 13-14 वीं शताब्दी की दक्षिण भारत से प्राप्त ग्रेनाइट में निर्मित भगवान कार्तिकेय की मूर्ति।
गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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