घातक संक्रमण का पता लगाने वाला स्वदेशी नैनो-सेंसर हुआ विकसित, मिनटों में कर सकता है काम

Authored By: स्मिता

Published On: Saturday, July 26, 2025

Last Updated On: Saturday, July 26, 2025

Indigenous Nano Sensor Infection: मिनटों में घातक संक्रमण का पता लगाने वाला स्वदेशी नैनो-सेंसर विकसित, स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से निदान में मिल सकती है मदद.
Indigenous Nano Sensor Infection: मिनटों में घातक संक्रमण का पता लगाने वाला स्वदेशी नैनो-सेंसर विकसित, स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से निदान में मिल सकती है मदद.

इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर युक्त एक नया अत्यधिक संवेदनशील, कम लागत वाला, पॉइंट-ऑफ-केयर उपकरण नैनो सेंसर अब देश में विकसित हो चुका है. यह रोगी के बिस्तर पर रहने के दौरान सेप्सिस का शीघ्र निदान करने में मदद कर सकता है.

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Saturday, July 26, 2025

Indigenous Nano Sensor Infection: सेप्सिस एक गंभीर मेडिकल स्थिति है. यह संक्रमण के कारण होती है, इससे कई अंगों की विफलता, ट्रामा और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है. समय पर इलाज और रोगी के परिणाम में सुधार के लिए शीघ्र और सटीक निदान महत्वपूर्ण है. इसका मृत्यु दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है. विशिष्ट बायोमार्करों का सटीक और संवेदनशील पता लगाने से शीघ्र निदान संभव है. ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया की बाहरी झिल्ली का एक विषैला घटक, एंडोटॉक्सिन एक प्रमुख बायोमार्कर के रूप में कार्य करता है. यह सेप्सिस का कारण बनने वाले संक्रमण की उपस्थिति का संकेत देता है.

कम लागत वाला पोर्टेबल उपकरण

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट के वैज्ञानिकों के एक समूह ने एंडोटॉक्सिन का जल्दी और सटीक पता लगाने के लिए आठ विशिष्ट सेंसर आर्किटेक्चर और एक संवेदनशील, कम लागत वाला, पोर्टेबल उपकरण विकसित किया है. इसका उपयोग भविष्य में रोगी के बिस्तर पर किया जा सकता है.

नैनोमटेरियल का प्रयोग

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कालीकट में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. एन. संध्यारानी और उनकी टीम द्वारा इसे विकसित किया गया है. इनमें से सात सेंसरों में विद्युत-रासायनिक डिटेक्शन और एक में प्रकाशीय डिटेक्शन का उपयोग किया गया. सभी सेंसरों में संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए उचित रूप से संशोधित नैनोमटेरियल जैसे स्वर्ण परमाणु समूह या नैनोकण, CuO, या Cu नैनोक्लस्टर, MoS2, ग्रेफीन ऑक्साइड, या कार्बन नैनोट्यूब का उपयोग किया गया.

लैंगमुइर पत्रिका में प्रकाशित एक शोधपत्र में टीम ने लिपोपॉलीसेकेराइड (LPS) के लिए डिज़ाइन की गई एक अत्यधिक संवेदनशील विद्युत-रासायनिक संवेदक चिप का प्रदर्शन किया है. यह ऑन-साइट डिटेक्शन एक पोर्टेबल विश्लेषक के साथ बना है. यह सेंसर क्रियाशील CNT (fCNT) और कॉपर (I) ऑक्साइड नैनोकणों (Cu2O) का उपयोग करके निर्मित किया गया है. सभी सेंसरों ने उच्च चयनात्मकता प्रदर्शित की है,

एंडोटॉक्सिन की उपस्थिति का पता

चयनात्मकता में सुधार के लिए LPS-बाइंडिंग एप्टामर्स या पॉलीमिक्सिन B के साथ एंडोटॉक्सिन के विशिष्ट बंधन का उपयोग किया गया. सभी सेंसरों ने उच्च चयनात्मकता प्रदर्शित की है और अन्य हस्तक्षेपकारी यौगिकों की उपस्थिति में एंडोटॉक्सिन का पता लगाया है. मानक योग विधि द्वारा फार्मास्यूटिकल दवा-बाइफेसिक आइसोफेन इंसुलिन, फलों के रस और संपूर्ण रक्त में भी एंडोटॉक्सिन की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। सभी मामलों में एंडोटॉक्सिन की प्राप्ति 2% त्रुटि के भीतर थी.

10 मिनट में मिल सकता है रिजल्ट

टीम ने विशेष रूप से एंडोटॉक्सिन का पता लगाने के लिए एक पोर्टेबल और लागत प्रभावी इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर प्रोटोटाइप का डिज़ाइन, निर्माण और परीक्षण किया है. यह उपकरण एक मानक योग विधि का उपयोग करके ब्लड सीरम में एंडोटॉक्सिन का पता लगाता है. यह 10 मिनट के भीतर रिजल्ट दे सकता है.

About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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