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ऑस्ट्रेलिया में आज से बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, क्या यह वैश्विक रेगुलेशन की शुरुआत है
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, December 9, 2025
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
कुछ घंटे बाद ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन हो जाएगा. फिलहाल दुनिया की नज़रें ऑस्ट्रेलिया पर हैं. वहां आज से बच्चों का जीवन ‘सोशल मीडिया मुक्त’ हो जाएगा. ऑस्ट्रेलिया का यह कदम वैश्विक राष्ट्रीय स्तर के प्रयोग में बदल गया है.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
Australia Kids Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया में आज आधी रात (भारतीय समयानुसार आज शाम 6:30 बजे) से बच्चे के लिए सोशल मीडिया बैन हो जाएगा. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. इसके तहत इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब और एक्स जैसे 10 से अधिक सोशल प्लेटफॉर्म को दस लाख से ज़्यादा अकाउंट ब्लॉक करने होंगे. इसे सोशल मीडिया रेगुलेशन की वैश्विक शुरुआत माना जा रहा है.
ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया रेगुलेशन कानून के तहत संबंधित कंपनियां को 16 वर्ष से कम आयु के किसी भी ऑस्ट्रेलियाई उपयोगकर्ता को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर प्रवेश न करने देना होगा. यदि इसका उल्लंघन होता है, तो उन पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 33 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
बड़ी टेक कंपनियों और अभिव्यक्ति की आज़ादी का वकालत करने वालों ने इस कानून की कड़ी आलोचना की. जबकि बच्चों के माता-पिता और बाल अधिकार समर्थकों ने इसकी तारीफ़ की है.
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा
इस ऑस्ट्रेलियाई कानून को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर चल रही बहस के बीच एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है. वर्तमान समय में सोशल मीडिया की सर्वव्यापकता और जरूरत को देखते हुए किसी देश द्वारा इस तरह का कठोर कदम उठाया जाना अभूतपूर्व माना जा रहा है.
सोशल मीडिया मुक्त बचपन
बैन लागू होने के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की बड़ी कंपनियों को दस लाख से अधिक बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने होंगे. ऑस्ट्रेलियाई सरकार का दावा है कि यह बच्चों को ऑनलाइन नुकसान, साइबर बुलिंग, पोर्नोग्राफिक कंटेंट एक्सपोज़र, गलत जानकारी और मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने की दिशा में सबसे ज़रूरी कदम है. इसके लागू होते ही ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया मुक्त बचपन वाला देश बन जाएगा.
वहां की सरकार ने बैन लागू होने से ठीक पहले एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि 8 से 15 वर्ष के 86 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे थे. यही आंकड़ें हमारे लिए चिंता का मुख्य आधार बना.
लाइव एक्सपेरिमेंट शुरू
ऑस्ट्रेलिया केवल कानून लागू कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं माना. न ही वह बड़ी टेक कंपनियों के दबाव में पीछे हटा है, बल्कि उसने इस बैन के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी शुरू कर दिया है.
सरकार ने ईसेफ्टी कमिश्नर को इन नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी दी है. ईसेफ्टी कमिश्नर ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और 11 अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम को नियुक्त किया है. वे आने वाले कम से कम दो वर्षों तक हजारों बच्चों के डेटा का अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि यह प्रतिबंध बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर क्या असर डाला है.
कई देशों ने इसे लागू करने के संकेत दिए
पूरी दुनिया की नजर इस पर है. विश्व में यह पहला व्यापक ‘नियामक प्रयोग’ है. इसके नतीजों का इंतजार दुनिया भर की सरकारें कर रही हैं. डेनमार्क, मलेशिया और अमेरिका के कई राज्यों ने संकेत दिए हैं कि वे ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं.
वहीं ब्रिटेन ने तो इसी साल जुलाई में 18 वर्ष से कम उम्र के दर्शकों के लिए पोर्नोग्राफी साइट्स को बंद करने का आदेश लागू किया था. ब्रिटिश सरकार ने भी कहा है कि वह ऑस्ट्रेलिया के इस प्रयोग पर करीबी नज़र रखे हुए है. क्योंकि जब बच्चों की सुरक्षा की बात आती है, तो कोई भी कदम उठाया जा सकता.
टेक कंपनियों की नाराज़गी
बैन किए गए 10 प्लेटफॉर्म में से एक्स (X) को छोड़कर सभी कंपनियों ने कहा है कि वे किसी न किसी तकनीक के माध्यम से उम्र की जांच करेंगी. ये कंपनियां उम्र की जांच के लिए ये कदम उठा सकती है-
- चेहरे की सेल्फी से आयु का अनुमान
- ऑनलाइन व्यवहार विश्लेषण
- पहचान दस्तावेज़
- बैंक खाते से वेरिफिकेशन
वहीं एलोन मस्क ने इस कानून की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों की इंटरनेट पहुंच को नियंत्रित करने का बैकडोर तरीका है.
टेक कंपनियों का तर्क और कानून को चुनौती
सोशल मीडिया कंपनियों का तर्क है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार पर हमला है. इससे भविष्य के यूज़र बेस पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. साथ ही यह भी कहा है कि तकनीकी रूप से उम्र पहचानना हमेशा 100 प्रतिशत सटीक नहीं हो सकता. इसी को आधार बनाकर एक लिबर्टेरियन विधायक द्वारा ऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट में संबंधित कानून को चुनौती दी गई है.
कंपनियों ने बढ़ते खतरों की अनदेखी की
सिडनी यूनिवर्सिटी के AI, ट्रस्ट एंड गवर्नेंस सेंटर के सह-निदेशक टेरी फ्लू ने बताया, ‘सोशल मीडिया कंपनियों ने लंबे समय तक बढ़ते खतरों की अनदेखी की. मेटा के आंतरिक दस्तावेज़ों के लीक होने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि उनके प्रोडक्ट किशोरों में बॉडी इमेज समस्याओं और आत्महत्या के विचार बढ़ाते हैं. इसलिए सोशल मीडिया को अनियंत्रित आत्म-अभिव्यक्ति के मंच के रूप में देखने के दिन अब खत्म हो चुके हैं.
क्या यह नया वैश्विक मॉडल बनेगा?
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम डिजिटल सुरक्षा और बाल अधिकारों को लेकर वैश्विक बहस में निर्णायक पड़ाव बन सकता है. यदि यह सफल होता है, तो दुनिया के और भी देश उम्र आधारित प्रतिबंध लागू कर सकते हैं. इससे सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त नियमन का दबाव बढ़ेगा. बच्चों के ऑनलाइन अधिकारों को लेकर नई नीतियां बनेंगी.
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