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Blasphemy Law: क्या है ईशनिंदा और क्या कहता है कानून? जानें सजा का प्रावधान
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Monday, December 22, 2025
Last Updated On: Monday, December 22, 2025
दुनिया के 69 देशों में ईशनिंदा कानून लागू है, कहीं जेल और जुर्माने का प्रावधान है तो कहीं सीधे मौत की सजा. भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए कानून मौजूद है, जबकि पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों में इसके बेहद कठोर नियम हैं. आखिर क्या है भारत का ईशनिंदा कानून और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह कितना सख्त है?
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Monday, December 22, 2025
Blasphemy Law: ईशनिंदा कानून लंबे समय से दुनिया भर में बहस का विषय रहा है. कहीं इसे धार्मिक सद्भाव बनाए रखने का जरिया माना जाता है, तो कहीं इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला. भारत भी उन देशों में शामिल है, जहां ईशनिंदा से जुड़े कानून लागू हैं, लेकिन यहां सजा की सीमा तीन साल की जेल या जुर्माने तक सीमित है. वहीं पाकिस्तान, सऊदी अरब और ब्रुनेई जैसे देशों में यह कानून इतना कठोर है कि दोषी पाए जाने पर मौत की सजा तक दी जा सकती है.
भारतीय संविधान जहां एक ओर हर नागरिक को बोलने की आजादी देता है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर तर्कसंगत प्रतिबंध भी लगाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत का ईशनिंदा कानून क्या सच में धार्मिक सुरक्षा के लिए है या फिर हेट स्पीच रोकने का माध्यम? और दुनिया के दूसरे देशों में इस कानून का इस्तेमाल किस हद तक किया जा रहा है?
भारतीय संविधान में ईशनिंदा: अधिकार, कानून और बहस
भारत में बोलने और अपनी बात रखने की आज़ादी संविधान देता है. अनुच्छेद 19(1)(a) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है. लेकिन यह आज़ादी असीमित नहीं है. संविधान का अनुच्छेद 19(2) सरकार को यह अधिकार देता है कि वह ज़रूरत पड़ने पर इस आज़ादी पर तर्कसंगत रोक लगा सके. इसका मकसद समाज में शांति और संतुलन बनाए रखना है.
धर्म भारत की सामाजिक संरचना का अहम हिस्सा है. इसी वजह से कानून धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा पर भी ज़ोर देता है. भारतीय दंड संहिता (IPC) का अध्याय 15 धर्म से जुड़े अपराधों पर केंद्रित है. यह अध्याय यह साफ करता है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने की आज़ादी है. लेकिन किसी दूसरे धर्म का अपमान करने की छूट नहीं है.
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. यहां सभी धर्मों को बराबर सम्मान मिलता है. संविधान का अनुच्छेद 25 हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार धर्म चुनने, मानने और प्रचार करने का अधिकार देता है. हालांकि यह अधिकार भी कानून के दायरे में ही है.
IPC में धर्म से जुड़े अपराध कैसे बांटे गए हैं?
भारतीय दंड संहिता धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की कोशिश करती है. इसमें अपराधों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है.
प्रमुख वर्गीकरण
- धार्मिक स्थलों का अपमान या नुकसान
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना
- धार्मिक आयोजनों और सभाओं में बाधा डालना
धर्म से जुड़ी प्रमुख धाराएं: एक नज़र में
| धारा | किससे संबंधित | सजा का प्रावधान |
|---|---|---|
| 295 | पूजा स्थल को नुकसान | जेल या जुर्माना |
| 295A | जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करना | 3 साल तक जेल / जुर्माना |
| 296 | धार्मिक सभा में बाधा | जेल या जुर्माना |
| 297 | कब्र या धार्मिक स्थल का अपमान | जेल या जुर्माना |
| 298 | अपमानजनक शब्दों का प्रयोग | 1 साल तक जेल / जुर्माना |
धारा 295A क्यों सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है?
धारा 295A को अक्सर ईशनिंदा कानून कहा जाता है. यह धारा तभी लागू होती है जब इरादा जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण हो. अगर कोई व्यक्ति किसी समुदाय के धर्म या विश्वास का अपमान करता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है. यह एक संज्ञेय अपराध है. मतलब, पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है. यह कानून वर्ष 1927 में जोड़ा गया था. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह धारा ईशनिंदा से ज्यादा हेट स्पीच रोकने के लिए बनाई गई थी.
भारत में लागू अन्य संबंधित कानून
धर्म से जुड़े मामलों में सिर्फ धारा 295A ही नहीं लगती. कई और धाराएं भी ऐसे मामलों में इस्तेमाल होती हैं.
अन्य अहम धाराएं
- धारा 124A – देशद्रोह
- धारा 153A – धर्म के आधार पर दुश्मनी फैलाना
- धारा 153B – राष्ट्रीय एकता को नुकसान
- धारा 292 और 293 – आपत्तिजनक सामग्री का प्रकाशन
इन सभी का उद्देश्य सामाजिक तनाव और हिंसा को रोकना है.
दुनिया में ईशनिंदा कानून: चौंकाने वाले आंकड़े
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया के 69 देशों में आज भी ईशनिंदा कानून मौजूद है.
वैश्विक स्थिति
| स्थिति | देशों की संख्या |
|---|---|
| ईशनिंदा कानून लागू | 69 |
| मौत की सजा का प्रावधान | 6 |
| कानून रद करने वाले देश | 18 |
| हाल के वर्षों में कानून हटाने वाले | 8 |
यूरोप के कई देशों ने हाल के वर्षों में ईशनिंदा कानून को खत्म किया है. आयरलैंड में इसे हटाने पर जनमत संग्रह भी हुआ, हालांकि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
सबसे सख्त कानून कहां हैं?
कुछ देशों में ईशनिंदा कानून बेहद कठोर हैं. खासतौर पर वहां, जहां शरिया कानून लागू है. इन देशों में ईशनिंदा को धर्म से इनकार के बराबर माना जाता है. कई मामलों में सजा मौत तक होती है.
सख्त प्रावधान वाले देश
- सऊदी अरब
- पाकिस्तान
- ब्रुनेई
- मॉरिटानिया
आसिया बीबी का मामला: एक दर्दनाक उदाहरण
पाकिस्तान की ईसाई महिला आसिया बीबी ईशनिंदा कानून का सबसे चर्चित चेहरा बनीं. 2010 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. आठ साल जेल में बिताने के बाद 2018 में उन्हें राहत मिली. अपनी किताब “एनफिन लिबरे” में आसिया बीबी ने जेल की भयावह सच्चाई बताई. जंजीरें, अंधेरा, सांस लेने में दिक्कत और हर पल मौत का डर. उनके शब्द आज भी झकझोर देते हैं.
ब्रिटिश राज से आया यह कानून
धर्म से जुड़े आपराधिक कानून सबसे पहले 1860 में ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए. 1927 में इनमें बदलाव किया गया. पाकिस्तान में 1980 से 1986 के बीच ज़िया-उल-हक़ सरकार ने इन कानूनों को और सख्त बना दिया. 1973 में अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित किया गया. मूल रूप से यह कानून धार्मिक शांति बनाए रखने के लिए था. लेकिन समय के साथ यह बहस का बड़ा मुद्दा बन गया.
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