Iran’s Missile: रडार को चकमा, डिफेंस सिस्टम बेकार. ईरान की 5 मिसाइलें क्यों बन रहीं वैश्विक खतरा?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, January 14, 2026

Last Updated On: Wednesday, January 14, 2026

Iran's Missile: ईरान की 5 मिसाइलें रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा.
Iran's Missile: ईरान की 5 मिसाइलें रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा.

Iran's Missile: ईरान इस समय आंतरिक अस्थिरता और बाहरी दबाव के बीच अपनी सैन्य ताकत का खुला प्रदर्शन कर रहा है. अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ को सक्रिय कर ईरान ने दुनिया को चेतावनी दी है. खोर्रमशहर-4, फतेह-2, सज्जील-2, शहाब-3 और जुल्फिकार जैसी मिसाइलें हाइपरसोनिक रफ्तार, भारी वारहेड और जबरदस्त सटीकता के कारण रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम हैं, जिससे ये महाशक्तियों के लिए गंभीर सिरदर्द बन गई हैं.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, January 14, 2026

Iran’s Missiles: ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. देश के भीतर लगातार विरोध प्रदर्शन, सत्ता के खिलाफ असंतोष और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने हालात को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है. ऐसे समय में ईरान ने सिर्फ आंतरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि बाहरी दुश्मनों को भी सीधी चेतावनी देने का रास्ता चुना है. सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को पूरी ताकत सौंप दी है. इसके साथ ही ईरान की अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, जिसने अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है.

क्या है ईरान की रहस्यमयी ‘मिसाइल सिटी’?

ईरान की ‘मिसाइल सिटी’ उसकी सैन्य ताकत का सबसे डरावना चेहरा मानी जाती है. ये ठिकाने जमीन के नीचे पहाड़ों के भीतर बनाए गए हैं, जहां से किसी भी वक्त बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें लॉन्च की जा सकती हैं. इन ठिकानों की खासियत यह है कि इन्हें सैटेलाइट से भी पहचानना बेहद मुश्किल है. 2026 में जब ईरान ने इन अंडरग्राउंड बेस को एक्टिव किया, तो इसे केवल सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि खुली चेतावनी के तौर पर देखा गया. जानकार मानते हैं कि यह पावर शो पश्चिमी देशों के लिए एक साफ संदेश है कि ईरान किसी भी टकराव के लिए तैयार है.

खोर्रमशहर-4: सबसे खतरनाक और विनाशकारी मिसाइल

ईरान की सबसे घातक मिसाइलों में खोर्रमशहर-4 का नाम सबसे ऊपर आता है. इसकी रेंज 2000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है और यह हाइपरसोनिक रफ्तार से उड़ान भरती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसका भारी वारहेड है, जो करीब 1500 किलो तक हो सकता है. 2025 में इसके सफल परीक्षण के बाद इसे ईरान की रणनीतिक ताकत का गेम-चेंजर माना जाने लगा. सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, खोर्रमशहर-4 इजरायल के किसी भी हिस्से को आसानी से निशाना बना सकती है, जिससे यह मिसाइल सीधे वैश्विक चिंता का कारण बन गई है.

फतेह-2: हाइपरसोनिक स्पीड, रोकना लगभग नामुमकिन

फतेह-2 को ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल माना जाता है. इसकी रफ्तार मैक 15 तक बताई जाती है, यानी आवाज की गति से कई गुना तेज. इसकी रेंज लगभग 1400 किलोमीटर है, लेकिन असली खतरा इसकी गति है. इतनी तेज रफ्तार होने के कारण मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे समय रहते ट्रैक नहीं कर पाते. 2024 में सफल परीक्षण के बाद अब इसे मिसाइल सिटी में तैनात किया जा चुका है. यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए फतेह-2 एक बड़ी सिरदर्द बन चुकी है.

सज्जील-2: दो मिनट में लॉन्च, दुश्मन को मौका नहीं

सज्जील-2 एक दो-स्टेज सॉलिड फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज करीब 2500 किलोमीटर बताई जाती है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे लॉन्च करने में सिर्फ दो मिनट का समय लगता है. इसका मतलब यह हुआ कि दुश्मन को जवाबी कार्रवाई का समय ही नहीं मिलता. सॉलिड फ्यूल तकनीक के कारण इसे लंबे समय तक छिपाकर रखा जा सकता है और जरूरत पड़ते ही दागा जा सकता है. इसकी सटीकता और तेज तैयारी क्षमता इसे ईरान की रणनीतिक ताकत का अहम हथियार बनाती है.

शहाब-3: पुरानी तकनीक, लेकिन आज भी भरोसेमंद

शहाब-3 ईरान की सबसे पुरानी मिसाइलों में गिनी जाती है, लेकिन इसकी अहमियत आज भी कम नहीं हुई है. इसकी रेंज 1300 से 2000 किलोमीटर के बीच है और यह परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम मानी जाती है. 1990 के दशक में तैनात की गई इस मिसाइल को समय-समय पर अपग्रेड किया गया है. यही वजह है कि आज भी शहाब-3 ईरान की लंबी दूरी की मारक क्षमता की रीढ़ बनी हुई है.

जुल्फिकार: कम दूरी, लेकिन जबरदस्त सटीकता

जुल्फिकार एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज करीब 700 किलोमीटर है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी गजब की सटीकता है. इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है, जिससे इसे ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता है. इस मिसाइल को खास तौर पर सऊदी अरब, यूएई और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कम दूरी के बावजूद इसका प्रभाव बेहद घातक माना जाता है.

क्यों बन रहीं ये मिसाइलें महाशक्तियों का सिरदर्द?

ईरान की ये पांचों मिसाइलें इसलिए खतरनाक हैं क्योंकि ये रडार को चकमा देने, डिफेंस सिस्टम को बेकार करने और बेहद कम समय में तबाही मचाने की क्षमता रखती हैं. हाइपरसोनिक स्पीड, अंडरग्राउंड लॉन्चिंग और भारी वारहेड का कॉम्बिनेशन इन्हें दुनिया की महाशक्तियों के लिए गंभीर चुनौती बना देता है. यही कारण है कि ईरान की मिसाइल ताकत आज सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा सवाल बन चुकी है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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