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Tarique Rahman Oath Ceremony: तारिक रहमान बने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री, शपथ ग्रहण के साथ बदली देश की राजनीति और कूटनीतिक दिशा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, February 17, 2026
Last Updated On: Tuesday, February 17, 2026
Tarique Rahman Oath Ceremony: 17 फरवरी 2026 को तारिक रहमान ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने उन्हें राष्ट्रीय संसद भवन में पद की शपथ दिलाई. 13वें संसदीय चुनाव में BNP की बड़ी जीत के बाद बनी नई सरकार में संतुलित कैबिनेट, नैतिक राजनीति के फैसले और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर अहम संकेत देखने को मिले.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, February 17, 2026
Tarique Rahman Oath Ceremony: तारिक रहमान ने 17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया. राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने उन्हें राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की बंपर जीत के बाद यह समारोह आयोजित हुआ. खास बात यह रही कि करीब 30 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिला है, और तारिक रहमान देश के सबसे युवा पुरुष पीएम भी बने.
शपथ ग्रहण समारोह का सियासी संदेश
शपथ ग्रहण कार्यक्रम में देश-विदेश की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं. भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ढाका पहुंचे. बांग्लादेश सरकार ने इस ऐतिहासिक मौके पर भारत, चीन, पाकिस्तान सहित 13 देशों को आधिकारिक न्योता भेजा था. समारोह के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने विरोध भी जताया, लेकिन भारी सुरक्षा और औपचारिक व्यवस्था के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.
नई कैबिनेट: अनुभव और संतुलन का मेल
प्रधानमंत्री बनते ही तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट का ऐलान किया. गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सलाहुद्दीन अहमद को, विदेश मंत्रालय टेक्नोक्रैट कोटे से डॉ. खलीलुर रहमान को और वित्त व योजना मंत्रालय अमीर खसरू महमूद चौधरी को सौंपा गया. खास बात यह रही कि कैबिनेट में हिंदू नेता निताई रॉय चौधरी को भी जगह मिली, जिसे सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. कुल 25 सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.
BNP का बड़ा फैसला: सुविधाओं से दूरी
नई सरकार बनने से पहले ही BNP ने एक सख्त और चौंकाने वाला फैसला लिया. पार्टी ने तय किया कि उसके सांसद सरकारी गाड़ियां और आवासीय भूखंड नहीं लेंगे. पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसका मकसद राजनीति को निजी लाभ से दूर रखना और जनता के बीच भरोसा मजबूत करना है. इससे पहले जमात-ए-इस्लामी भी ऐसा ही ऐलान कर चुकी थी, जिससे बांग्लादेश की राजनीति में नैतिकता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
संसद में अलग-अलग रंग
शपथ ग्रहण के दौरान एक अलग दृश्य तब देखने को मिला, जब जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता हसनात अब्दुल्ला ने विद्रोह वाली टी-शर्ट पहनकर सांसद पद की शपथ ली. यह कदम प्रतीकात्मक माना गया और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई. वहीं, जमात-ए-इस्लामी के नव-निर्वाचित सांसदों ने न केवल संसद सदस्य बल्कि संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में भी शपथ ली.
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर नजर
नई सरकार के गठन के साथ ही भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी सबकी नजर है. गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर BNP ने साफ किया है कि फैसला राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. वहीं, विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर के भारत में सांप्रदायिक घटनाओं पर दिए गए बयान ने कूटनीतिक हलचल भी पैदा की है.
नई सरकार से उम्मीदें
तारिक रहमान के नेतृत्व में बनी यह सरकार बदलाव, पारदर्शिता और संतुलन का संदेश दे रही है. युवा नेतृत्व, अनुभवी मंत्रियों और सख्त राजनीतिक फैसलों के साथ बांग्लादेश एक नए रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है. अब देखना होगा कि यह नई सरकार चुनावी वादों को जमीन पर कैसे उतारती है और देश को किस दिशा में ले जाती है.
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