टैरिफ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राष्ट्रपति की सीमा तय; ट्रंप न मानें तो क्या एक्शन संभव?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, February 25, 2026

Last Updated On: Wednesday, February 25, 2026

Supreme Court Tariff निर्णय के बाद राष्ट्रपति और ट्रंप के बीच सीमा विवाद.
Supreme Court Tariff निर्णय के बाद राष्ट्रपति और ट्रंप के बीच सीमा विवाद.

अमेरिका में टैरिफ को लेकर संवैधानिक बहस तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध बताते हुए कहा कि टैक्स और टैरिफ तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. अगर राष्ट्रपति फैसला न मानें, तो यह गंभीर संवैधानिक संकट और महाभियोग जैसी प्रक्रिया को जन्म दे सकता है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, February 25, 2026

Supreme Court Tariff: अमेरिका में टैरिफ को लेकर एक बार फिर संवैधानिक बहस तेज हो गई है. सवाल सीधा है कि अगर टैरिफ पर डोनाल्ड ट्रंप जैसे राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने से इनकार कर दें, तो क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ कोई एक्शन ले सकता है? इस सवाल का जवाब अमेरिका के संविधान, शक्तियों के बंटवारे और हालिया अदालती फैसलों में छिपा है.

क्या है पूरा मामला? कोर्ट ने क्यों रोके टैरिफ

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया. कोर्ट का साफ कहना था कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. प्रशासन की दलील थी कि आपात स्थिति में व्यापक आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि टैरिफ असल में टैक्स होते हैं और टैक्स लगाने की शक्ति संविधान के तहत राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को दी गई है.

जजों ने यह भी स्पष्ट किया कि आपातकालीन कानून की सामान्य भाषा के आधार पर राष्ट्रपति को असीमित व्यापारिक अधिकार नहीं दिए जा सकते. यानी “इमरजेंसी” कहकर टैक्स नहीं लगाया जा सकता.

संविधान में शक्तियों का साफ बंटवारा

अमेरिकी संविधान तीन स्तंभों पर टिका है कांग्रेस, राष्ट्रपति और न्यायपालिका.

  • कांग्रेस कानून बनाती है, टैक्स और टैरिफ तय करती है.
  • राष्ट्रपति उन कानूनों को लागू करते हैं.
  • न्यायपालिका यह तय करती है कि कोई कदम संविधान के दायरे में है या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि शांति काल में राष्ट्रपति के पास अपने दम पर टैरिफ लगाने की कोई स्वाभाविक शक्ति नहीं है. बड़े आर्थिक असर वाले फैसलों के लिए संसद की स्पष्ट मंजूरी जरूरी होती है. इसी सिद्धांत को “मेजर क्वेश्चन डॉक्ट्रिन” कहा जाता है.

क्या राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट सकते हैं?

सीधा जवाब नहीं. अमेरिका की व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होता है. कोई भी राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश जारी कर अदालत के फैसले को न तो पलट सकता है और न ही नजरअंदाज कर सकता है.

अगर कोर्ट किसी कानूनी आधार को असंवैधानिक ठहरा दे, तो उसी आधार पर दोबारा वही कदम उठाना संविधान का उल्लंघन माना जाएगा. राष्ट्रपति कांग्रेस को दरकिनार कर टैक्स लगाने की शक्ति अपने हाथ में नहीं ले सकते.

अगर राष्ट्रपति आदेश न मानें तो क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के पास अपनी कोई सेना या पुलिस नहीं होती, लेकिन उसके फैसले पूरे देश पर बाध्यकारी होते हैं. अगर कोई राष्ट्रपति खुले तौर पर आदेश न माने, तो मामला गंभीर संवैधानिक संकट बन सकता है.

ऐसी स्थिति में कांग्रेस की भूमिका अहम हो जाती है. प्रतिनिधि सभा महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकती है और फिर सीनेट में ट्रायल होता है. यह कानूनी से ज्यादा राजनीतिक प्रक्रिया होती है, लेकिन यही संविधान का रास्ता है.

राष्ट्रपति के पास कौन से विकल्प बचते हैं?

इस फैसले का मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति पूरी तरह व्यापार नीति से बाहर हो जाते हैं. वे कांग्रेस से नया कानून पास कराने की कोशिश कर सकते हैं, जिसमें साफ तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति हो. इसके अलावा वे अन्य व्यापार कानूनों का सहारा ले सकते हैं, जिनमें स्पष्ट प्रक्रिया और सीमाएं तय हों.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को बदलने का अधिकार भी अंततः उसी अदालत के पास होता है. भविष्य में अगर नया मामला आता है, तो कोर्ट अपने ही फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है लेकिन तब भी संविधान की सीमाओं के भीतर ही.

निष्कर्ष: संविधान सबसे ऊपर

अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हो संविधान से ऊपर नहीं है. टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला यही याद दिलाता है कि आर्थिक ताकत भी कानूनी मर्यादाओं में ही इस्तेमाल की जा सकती है. अगर राष्ट्रपति न मानें, तो अदालत नहीं, बल्कि पूरा संवैधानिक तंत्र हरकत में आता है और यही लोकतंत्र की असली ताकत है.

यह भी पढ़ें :- Iran vs America: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नागरिकों के लिए जारी की गई तत्काल ईरान छोड़ने की सख्त एडवाइजरी, जानें हेल्पलाइन नंबर

About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
Leave A Comment

अन्य खबरें

अन्य खबरें