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Israel US Iran War: एयर डिफेंस पर हमले, सैकड़ों मौतें, चीन की एंट्री और भारत की कूटनीतिक चुनौती
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, March 3, 2026
Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026
Israel US Iran War: इजरायल-अमेरिका के संयुक्त हमलों के बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल ठिकाने निशाने पर हैं. सैकड़ों मौतों के बीच ईरान ने इसे आक्रामक जंग बताया है, जबकि इजरायल खतरा टालने की दलील दे रहा है. चीन कूटनीति की अपील कर रहा है और भारत संतुलन साधने में जुटा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026
Israel US Iran War: मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा दिखाई दे रहा है. Israel-US-Iran War ने पूरे इलाके को अस्थिर कर दिया है. इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने इसे खुली जंग करार दिया है. हालात इतने तेजी से बदले कि दुनिया की बड़ी ताकतें भी खुलकर मैदान में उतरती नजर आईं. यह सिर्फ तीन देशों की लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ दिखने लगा है.
इजरायल का बड़ा एयर ऑपरेशन: एयर डिफेंस सिस्टम निशाने पर
इस जंग का सबसे अहम मोड़ तब आया जब इजरायल की वायुसेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर लगातार हमले शुरू किए. इजरायली सेना के प्रवक्ता के अनुसार, विमानों ने ईरान के रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर को सीधे टारगेट किया. इतना ही नहीं, उन ऑपरेटरों को भी निशाना बनाया गया जो इन डिफेंस सिस्टम को चला रहे थे. इजरायल ने दावा किया कि उसने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर भी सटीक हमले किए हैं. इन हमलों के बाद ईरान में अब तक 742 लोगों की मौत और 750 से ज्यादा के घायल होने की खबर है. यह आंकड़ा बताता है कि जंग अब सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी सैन्य क्षमता को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है.
इजरायल का दावा: “खतरा टालना जरूरी था”
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम तेजी से मजबूत हो रहे थे. उनके मुताबिक अगर अभी कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान कुछ ही महीनों में “इम्यून” हो जाता और फिर उस पर कोई प्रभावी सैन्य दबाव नहीं डाला जा सकता था. उनका कहना है कि यह कार्रवाई भविष्य के बड़े खतरे को रोकने के लिए की गई है.
अमेरिका की दलील और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का स्टॉक पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और देश “बिग विन” के लिए तैयार है. अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने तर्क दिया कि अगर अमेरिका पहले हमला नहीं करता तो ईरान अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला कर सकता था. उनके अनुसार यह पूर्व-निवारक कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी.
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi ने अमेरिकी और इजरायली दावों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि कोई वास्तविक “ईरानी खतरा” नहीं था और यह जंग अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में शुरू की है. ईरान के भीतर बढ़ती मौतों और तबाही ने जनता में आक्रोश को और भड़का दिया है.
चीन की एंट्री: कूटनीति का नया समीकरण
तनाव के बीच चीन ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है. चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने ईरानी समकक्ष से बातचीत कर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात कही. चीन ने अमेरिका और इजरायल से सैन्य अभियान रोकने की अपील की है. यह संकेत है कि संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का मुद्दा बन सकता है.
लेबनान तक पहुंची जंग की गूंज
इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह से जुड़े टीवी चैनल अल-मनार के मुख्यालय पर एयर स्ट्राइक की. धमाकों की आवाजें पूरे इलाके में गूंजीं, हालांकि चैनल ने दूसरे स्थान से प्रसारण जारी रखने का दावा किया. इससे स्पष्ट है कि यह संघर्ष सीमाओं को लांघ चुका है.
भारत की कूटनीतिक परीक्षा
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया. भारत के इजरायल और ईरान दोनों से संबंध हैं, इसलिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है. कांग्रेस नेता Sonia Gandhi ने सरकार से स्पष्ट और सिद्धांत आधारित रुख अपनाने की मांग की है.
आम लोगों पर सीधा असर
इस जंग का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा. दिल्ली से लंदन की उड़ानों के किराए में भारी उछाल देखा गया है. अबू धाबी में फंसे यात्रियों ने बताया कि होटल के आसपास धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं और मिसाइल इंटरसेप्शन होते दिखाई दे रहे थे. भारत लौटने के बाद ही उन्हें राहत महसूस हुई.
आगे की राह
Israel-US-Iran War अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक लड़ाई बन चुकी है. अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है. दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत का रास्ता निकलेगा या जंग और गहराएगी.
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