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जंग के 6 दिनों में ईरान-अमेरिका-इजरायल और खाड़ी देशों को कितना नुकसान? जानें मौत, तबाही और आर्थिक असर का पूरा हिसाब
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, March 5, 2026
Last Updated On: Thursday, March 5, 2026
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग के छह दिनों में मिडिल ईस्ट को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, कई सैन्य ठिकाने तबाह हुए हैं और तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे खाड़ी देशों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, March 5, 2026
Iran US Israel War Economic Impact: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध लगातार छठे दिन भी जारी है. इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है. मिसाइल हमलों, हवाई हमलों और समुद्री टकराव के कारण मानवीय और आर्थिक नुकसान तेजी से बढ़ रहा है. अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई देशों में अस्थिरता बढ़ गई है. युद्ध का असर सिर्फ ईरान या इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई खाड़ी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है.
10 प्वाइंट्स में समझें जंग के 6 दिनों का नुकसान
1. ईरान में सबसे ज्यादा मौतें
इस युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक ईरान में करीब 1045 लोगों की मौत हो चुकी है. कई सैन्य ठिकाने और सुरक्षा प्रतिष्ठान भी तबाह हो गए हैं.
2. लेबनान में भी बढ़ा मौत का आंकड़ा
ईरान के साथ बढ़ते तनाव का असर लेबनान में भी दिखाई दिया है. यहां 50 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जिससे क्षेत्र में डर का माहौल है.
3. इजरायल में भी लोगों की जान गई
ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर भी मिसाइल हमले हुए. इन हमलों में करीब 11 लोगों की मौत हो चुकी है और कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है.
4. जॉर्डन, कुवैत और यूएई भी प्रभावित
इस युद्ध का असर अन्य खाड़ी देशों में भी दिखाई दिया. जॉर्डन में 5, कुवैत में 4 और यूएई में 3 लोगों की मौत की खबर सामने आई है.
5. बहरीन और ओमान में भी जानमाल का नुकसान
संघर्ष के फैलने से बहरीन और ओमान में भी एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.
6. अमेरिकी सैनिक भी बने निशाना
कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है.
7. समुद्र में भी टकराव
हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया. इस घटना के बाद समुद्र से 87 शव बरामद किए गए हैं.
8. ईरान के सैन्य और सुरक्षा ठिकाने तबाह
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के आंतरिक सुरक्षा कमांड और बसीज बल से जुड़ी इमारतों को निशाना बनाया. हमलों में कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और एयर डिफेंस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है.
9. होरमुज जलडमरूमध्य में तेल सप्लाई प्रभावित
होरमुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमला होने के बाद आग लग गई. इसके बाद इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही करीब 90% तक घट गई, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है.
10. दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर
तेल की कीमतों में तेज उछाल और शिपिंग व्यवस्था के प्रभावित होने से दुनिया भर के शेयर बाजारों में चिंता का माहौल बन गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.
अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ती जंग
अमेरिकी रक्षा सचिव ने कहा है कि इस ऑपरेशन की कोई तय समय सीमा नहीं है और यह संघर्ष कई हफ्तों तक चल सकता है. वहीं इजरायल के रक्षा मंत्री के अनुसार यह हमला मूल रूप से जून 2026 में होना था, लेकिन हालात के कारण इसे फरवरी में ही शुरू करना पड़ा. ऐसे में साफ है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह जंग और भी लंबी और खतरनाक हो सकती है.
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