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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू चैत्र नवरात्रि, जानें नौ दिन की तिथियां और कलश स्थापना मुहूर्त
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, March 14, 2026
Last Updated On: Saturday, March 14, 2026
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होगी और यह 27 मार्च तक चलेगी. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. यह पर्व आध्यात्मिक साधना, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, March 14, 2026
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. यह पर्व माता दुर्गा की उपासना का समय होता है, जब श्रद्धालु नौ दिनों तक देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इस पावन पर्व की शुरुआत होती है. यही वजह है कि कई जगहों पर इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है. इन नौ दिनों को साधना, आत्मसंयम और सकारात्मक ऊर्जा को जगाने का श्रेष्ठ समय माना गया है. भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और माता दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
2026 में कब से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च 2026 तक चलेगी. इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है. नवरात्रि का समापन राम नवमी के पर्व के साथ होगा, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इन नौ दिनों में घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता दुर्गा की आराधना करते हैं.
मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:
- नवरात्रि प्रारंभ – 19 मार्च 2026
- नवरात्रि समापन – 27 मार्च 2026
- समापन पर्व – राम नवमी
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घट स्थापना की जाती है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. यह देवी शक्ति को घर में आमंत्रित करने का प्रतीक होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सही मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
- 19 मार्च 2026 को कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त:
- सुबह का शुभ मुहूर्त – 06:10 बजे से 08:35 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक) – 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
इस दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे शुभ संकेत माना जाता है.
नवरात्रि के नौ दिन और देवी के स्वरूप
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है. भक्त इन नौ दिनों में इन स्वरूपों की आराधना करते हैं और विशेष पूजा करते हैं.
- 19 मार्च – मां शैलपुत्री
- 20 मार्च – मां ब्रह्मचारिणी
- 21 मार्च – मां चंद्रघंटा
- 22 मार्च – मां कूष्मांडा
- 23 मार्च – मां स्कंदमाता
- 24 मार्च – मां कात्यायनी
- 25 मार्च – मां कालरात्रि
- 26 मार्च – मां महागौरी (दुर्गा अष्टमी)
- 27 मार्च – मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)
चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के दौरान पूजा की शुरुआत सुबह स्नान के बाद की जाती है. सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है. इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है. कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं. इसके बाद देवी दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजा की जाती है. कई श्रद्धालु दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं तथा पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर माता की भक्ति में लीन रहते हैं.
क्यों खास मानी जाती है चैत्र नवरात्रि
चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है. यह समय प्रकृति में नए जीवन और नई ऊर्जा के संचार का होता है. धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों में माता दुर्गा की सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यही कारण है कि कई लोग नवरात्रि के दौरान नए काम, व्यापार या घर की शुरुआत करना शुभ मानते हैं. यह पर्व लोगों को आस्था, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा देता है.
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