बंगाल उपचुनाव में एक के बाद एक ट्विस्ट, नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी बदला पूरा खेल
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, September 22, 2026
Updated On: Tuesday, September 22, 2026
Bengal Bypoll में नंदीग्राम के बाद अब रेजीनगर में भी चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. एक के बाद एक ट्विस्ट ने बंगाल की सियासत में हलचल बढ़ा दी है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Updated On: Tuesday, September 22, 2026
Bengal Bypoll: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव (West Bengal Bypoll) से पहले चुनावी मुकाबला लगातार नए मोड़ ले रहा है. एक तरफ नंदीग्राम में ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया और इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया. दूसरी तरफ रेजीनगर में ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले नाम वापस लेने की घोषणा की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद चुनाव मैदान में बने रहने का फैसला किया. अब इसी सीट से जुड़ा एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रेजीनगर से 2026 का विधानसभा चुनाव जीतने वाले हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और AJUP उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए जमीनी प्रचार से दूरी बनाने का ऐलान किया है.
नंदीग्राम से शुरू हुआ सियासी उलटफेर
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई. 2026 के विधानसभा चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम (Nandigram Election) और भवानीपुर (Rejinagar Election) दोनों सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट बरकरार रखकर नंदीग्राम छोड़ दिया. बीजेपी ने यहां हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जो अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं.
ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन 18 सितंबर को संचिता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से नबन्ना में मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की और कहा कि यह कदम विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिए है.
यहीं से कहानी और दिलचस्प हो गई. ममता के समर्थन के कुछ घंटों बाद ही कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया. कांग्रेस ने कहा कि वह इससे पीछे नहीं हटेगी और उसका चुनाव प्रचार जारी रहेगा. मिलन प्रधान ने बाद में गिरफ्तारी के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख भी किया.
रेजीनगर में रबीउल ने क्यों लिया यूटर्न
रेजीनगर में ममता गुट ने पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन नंदीग्राम की घटना के अगले ही दिन रबीउल ने नामांकन वापस लेने की घोषणा कर दी. उन्होंने कार्यकर्ताओं की परेशानी और नए चुनाव चिन्ह को लेकर मुश्किलों का हवाला दिया. हालांकि, कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव लड़ने की बात कही. ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उनके मैदान में बने रहने की पुष्टि पार्टी की ओर से भी की गई.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों को पुराने TMC नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया था. ममता गुट को नए नाम और ‘फुटबॉलर’ चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ना है, जबकि दूसरे गुट को अलग नाम और चिन्ह मिला है.
अब हुमायूं कबीर ने क्यों छोड़ा मैदान?
रेजीनगर की कहानी अब हुमायूं कबीर के फैसले से और बदल गई है. 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर सीट जीतने वाले AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने घोषणा की है कि वह अपने बेटे गुलाम नबी आजाद के लिए जमीनी चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. गुलाम नबी आजाद इसी सीट से AJUP के उम्मीदवार हैं.
कबीर का आरोप है कि उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा परेशान और गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वह घर-घर जाकर प्रचार नहीं करेंगे. हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी के ‘टेबल’ चुनाव चिन्ह का प्रचार जारी रखने की बात कही है.
पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मामलों में रेजीनगर के एक स्वतंत्र उम्मीदवार सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी भी हुई है. पुलिस ने इसे 2021 के चुनावी हिंसा से जुड़े पुराने मामले से जोड़ा है. वहीं पुलिस ने हुमायूं कबीर को एक अन्य मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है. इन घटनाओं को लेकर विपक्षी खेमे और कबीर अलग-अलग आरोप लगा रहे हैं, जबकि पुलिस कार्रवाई को कानूनी मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है.
इस पर क्या है बीजेपी का रुख?
बीजेपी इन घटनाओं को अलग नजरिए से देख रही है. पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया है कि अगर उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं तो बार-बार नाम वापस लेने या प्रचार से पीछे हटने की स्थिति क्यों बन रही है. बीजेपी के रेजीनगर उम्मीदवार शखारोव सरकार ने चुनाव को विकास, कॉलेज, उद्योग और सड़क जैसे मुद्दों से जोड़ने की बात कही है.
वहीं CM Suvendu Adhikari ने दोनों उपचुनावों को लेकर BJP के अभियान को आगे बढ़ाया है. नंदीग्राम में पार्टी हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाकर मैदान में है, जबकि रेजीनगर में शखारोव सरकार बीजेपी के प्रत्याशी हैं.
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप?
विपक्षी दलों ने उम्मीदवारों की वापसी, गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं. ममता बनर्जी गुट ने नंदीग्राम में संचिता के नाम वापस लेने और उसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बावजूद चुनाव से पीछे नहीं हटने की बात कही है.
हुमायूं कबीर ने भी पुलिस पर अपने कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है और चुनाव आयोग में शिकायत करने की बात कही है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी और चुनावी प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले आधिकारिक रिकॉर्ड और अदालत/निर्वाचन आयोग की कार्रवाइयां महत्वपूर्ण रहेंगी.
9 अक्टूबर होगा फैसला
नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी. फिलहाल दोनों सीटों की तस्वीर साधारण मुकाबले से कहीं ज्यादा पेचीदा हो चुकी है. नंदीग्राम में उम्मीदवार की वापसी के बाद कांग्रेस को ममता गुट का समर्थन मिला, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार कानूनी मामले में फंस गए. रेजीनगर में एक उम्मीदवार ने नाम वापस लेने का ऐलान करके फैसला बदला और अब उस सीट के पिछली बार के विजेता हुमायूं कबीर ने ही जमीनी प्रचार से दूरी बना ली है.
यानी 6 अक्टूबर का मुकाबला सिर्फ दो सीटों का उपचुनाव नहीं रह गया है. यह चुनावी संगठन, उम्मीदवारों की मौजूदगी, TMC के अंदर चल रही खींचतान और बीजेपी के सत्ता में आने के बाद विपक्षी दलों की रणनीति इन सभी पहलुओं की परीक्षा भी बन चुका है.
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