Wildlife Parts Destruction: गैंडे के सींग से हाथी दांत तक, क्यों किया गया नष्ट?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Wednesday, September 23, 2026
Updated On: Wednesday, September 23, 2026
जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में करीब 142 किलो गैंडे का सींग, हाथी दांत और अन्य जब्त वन्यजीव अंग नष्ट किए गए. जानिए Wildlife Parts Destruction के नियम, विकल्प और CITES-TRAFFIC की गाइडलाइन. पढ़ें पूरी खबर.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Updated On: Wednesday, September 23, 2026
Wildlife Parts Destruction: बंगाल के जलपाईगुड़ी के जलदापाड़ा (Jaldapara) राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में लंबे समय से जब्त कर रखे गए वन्यजीवों के अंग नष्ट किए गए; इनमें करीब 142 किलो वजनी गैंडे का सींग, हाथी दांत समेत अन्य सामग्री शामिल हैं. जानिए क्या है अंगों को जलाने के नियम-कानून और क्या हैं इसके विकल्प.
खबर बंगाल के जलपाईगुड़ी से है जहां, वन विभाग की ओर से जलपाईगुड़ी के जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में लंबे समय से जब्त कर रखे गए वन्यजीवों के अंगों को नष्ट किया गया. करीब 142 किलोग्राम वजन वाले गैंडे के सींग, हाथी दांत और अन्य वन्यजीव अंगों को जलाकर नष्ट कर दिया गया. वन विभाग के अनुसार, जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रु पये थी. संस्कृत मंत्रोच्चार के बीच इन जब्त वन्यजीव अंगों का दहन किया गया.
अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ सख्त संदेश
वन विभाग ने बताया कि जब्त सामग्री को नष्ट करने का उद्देश्य अवैध वन्यजीव (Wildlife Parts Destruction) व्यापार के खिलाफ सख्त संदेश देना है. साथ ही समाज में फैली उस धारणा को खत्म करना भी उद्देश्य है कि गैंडे के सींग या हाथी दांत जैसी वस्तुओं का कोई आर्थिक अथवा औषधीय उपयोग होता है. वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के अंगों की मांग ही शिकार और तस्करी को बढ़ावा देती है.
क्या दुनिया के दूसरे देशों में भी वन्यजीव अंग जलाए जाते हैं?
हां, लेकिन जलाना ही एकमात्र तरीका नहीं है. दुनिया के अलग-अलग देशों में जब्त हाथी दांत, गैंडे के सींग और दूसरे वन्यजीव उत्पादों के मामले में जलाने, कुचलने, सुरक्षित भंडारण, वैज्ञानिक/फोरेंसिक उपयोग और कुछ मामलों में शैक्षणिक उपयोग जैसे अलग-अलग तरीके अपनाए गए हैं.
कई देशों ने हाथी दांत के भंडार को नष्ट किया है. इसमें अमेरिका और चीन जैसे देशों में हाथी दांत को कुचलना, जबकि कई अफ्रीकी और एशियाई देशों में इसे जलाना शामिल रहा है.
उदाहरण के तौर पर अमेरिका में जब्त हाथी दांत को कुचलकर नष्ट करने की कार्रवाई की गई है. चीन ने भी जब्त हाथी दांत को कुचलकर नष्ट किया था. वियतनाम में भी हाल के वर्षो में जब्त वन्यजीव उत्पादों के बड़े भंडार को जलाया गया. एक मामले में 456.9 किलो हाथी दांत, 138.7 किलो गैंडे के सींग, 6.2 टन पैंगोलिन स्केल और 3.1 टन शेर की हड्डियां जलाकर नष्ट की गई.
लेकिन क्या जलाने के अलावा विकल्प हो सकते हैं?
हां, और यही इस खबर को एक बड़े पर्यावरणीय विमर्श में बदल सकता है.
सीआईटीईएस (CITES) वन्यजीव व्यापार निगरानी नेटवर्क)/ TRAFFIC (Trade Records Analysis of Flora and Fauna in Commerce) की स्टॉकपाइल मैनेजमेंट गाइडलाइन के मुताबिक जब्त वन्यजीव उत्पादों के मामले में सबसे पहले उनकी सुरक्षित कस्टडी, विस्तृत इन्वेंटरी, पहचान, रिकॉर्डिंग और सुरक्षा जरूरी है. इसके बाद परिस्थितियों के अनुसार उनके निस्तारण या विनाश का निर्णय किया जा सकता है.
अगर कीमती अंगों को जलाना न पड़े तो संभावित विकल्पों पर इस तरह विचार किया जा सकता है-
1. कुचलकर या मशीन से नष्ट करना
हाथी दांत और गैंडे के सींग जैसे ठोस पदाथरे को जलाने की बजाय पहले क्रश/ग्राइंड किया जा सकता है.
2. फोरेंसिक और वैज्ञानिक अनुसंधान
हर जब्त सींग या अंग को तुरंत नष्ट करने के बजाय उसका डीएनए, मूल स्थान, उम्र और अन्य वैज्ञानिक डेटा सुरक्षित किया जा सकता है. गैंडे के सींग के डीएनए नमूने अवैध तस्करी के स्रेत और नेटवर्क की जांच में उपयोगी हो सकते हैं.
3. सुरक्षित सरकारी भंडारण
जिन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया चल रही हो, उनमें सामग्री को सुरक्षित, सीलबंद और डिजिटल रिकॉर्ड के साथ सरकारी स्ट्रांग रूम में रखा जा सकता है. CITES और TRAFFIC भी सुरक्षित स्टॉकपाइल मैनेजमेंट और पारदर्शी इन्वेंटरी पर जोर देता है.
4.वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक इस्तेमाल
कुछ देशों में जब्त वन्यजीव सामग्री का इस्तेमाल अनुसंधान, कानून-प्रवर्तन प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए किया गया है. हालांकि हाथी दांत और गैंडे के सींग जैसी अत्यधिक मूल्यवान वस्तुओं को सार्वजनिक प्रदशर्न के लिए रखने में सुरक्षा और दोबारा अवैध बाजार में पहुंचने का जोखिम रहता है.
5.नष्ट करने से पहले डिजिटल रिकॉर्ड और नमूना सुरक्षित रखना
यदि अंतत: सामग्री को नष्ट करना ही हो तो उसका फोटोग्राफ, वजन, पहचान संख्या, डीएनए नमूना और पूरा डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किया जा सकता है. इससे भविष्य में तस्करी के नेटवर्क की जांच में मदद मिल सकती है.
एक महत्वपूर्ण सवाल
इस पूरे मामले में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 100 करोड़ रु पये मूल्य के वन्यजीव अंग क्यों जलाए गए, बल्कि यह भी है कि-
क्या हर जब्त वन्यजीव अंग को नष्ट करना जरूरी है? क्या कुछ सामग्री को वैज्ञानिक अनुसंधान, फोरेंसिक जांच और वन्यजीव अपराधों की निगरानी के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है?
इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एकमत दृष्टिकोण नहीं है. कुछ देशों ने विनाश को अवैध बाजार में वापस जाने से रोकने का उपाय माना है, जबकि शोधकर्ताओं ने यह सवाल उठाया है कि केवल स्टॉक नष्ट करने से अवैध मांग और शिकार की समस्या अपने आप खत्म नहीं होती.
इसलिए भारत में भी ऐसी कार्रवाई के साथ एक पारदर्शी (SOP) स्टैंर्डड ऑपरेटिंग प्रोसीजरपर विचार किया जा सकता है-जिसमें तय हो कि कौन-सी सामग्री को न्यायिक साक्ष्य के रूप में रखना है, किसका डीएनए फोरेंसिक नमूना सुरक्षित करना है, किसे वैज्ञानिक संस्थानों को देना है और किसे पूरी तरह नष्ट करना है.
यानी सवाल ‘जलाएं या न जलाएं’ से आगे बढ़कर ‘जब्त वन्यजीव सामग्री का वैज्ञानिक, सुरक्षित और पारदर्शी निस्तारण कैसे हो’ का है.
Written By : Rajiv mandal
यह भी पढ़ें
news via inbox
समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।













