मैतेई और कुकी के बाद अब नगा और कुकी आमने-सामने, आखिर मणिपुर में नई जंग की जड़ क्या है

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Monday, September 28, 2026

Updated On: Monday, September 28, 2026

Manipur Naga Kuki Conflict और मणिपुर में नगा-कुकी तनाव

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जारी संघर्ष के बीच अब नगा और कुकी जनजातियों के बीच भी तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. दो दिनों में सात नगा नागरिकों के मारे जाने से हालात बिगड़े हैं, जबकि नगा संगठन ने चार महीने पुरानी आर्थिक नाकेबंदी हटाने का ऐलान किया है.

Authored By: Galgotias Times Bureau

Updated On: Monday, September 28, 2026

Manipur Naga Kuki Conflict: मणिपुर (Manipur) की पहाड़ियों में एक नया मोर्चा खुल गया है, जिसने राज्य की पहले से नाजुक शांति को और कमजोर कर दिया है. इस बार टकराव उन दो पहाड़ी समुदायों के बीच है, जो सदियों से एक ही इलाके में पड़ोसी बनकर रहते आए हैं. आइए समझते हैं कि यह विवाद क्या है, हालिया घटनाएं क्या हैं और दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं.

मणिपुर में अब कुकी और नगा समुदाय के बीच क्यों बढ़ा टकराव

मणिपु(Manipur conflict) में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदाय(Naga Kuki dispute) के बीच जातीय संघर्ष चल रहा है. लेकिन इस साल की शुरुआत से एक और टकराव तेज हो गया है, जो पहाड़ी जिलों में बसे कुकी और नगा समुदाय (Naga community) के बीच है. एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी से अब तक दोनों समुदायों के करीब चालीस लोगों की जान जा चुकी है, और दोनों पक्ष इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

दो दिन में सात मौतें

ताजा हिंसा गुरुवार रात शुरू हुई, जब कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में चार तांगखुल नगा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. अधिकारियों के मुताबिक इसके पीछे म्यांमार सीमा पार से आए संदिग्ध उग्रवादियों का हाथ बताया जा रहा है. इसके बाद शनिवार दोपहर सेनापति जिले के कालेनजांग गांव में एक गांव के मुखिया के घर के भीतर हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की, जिसमें शुरू में दो लोगों की मौत हुई और बाद में मृतकों की संख्या तीन हो गई. इस तरह दो दिनों में सात नगा नागरिक मारे गए. पुलिस का कहना है कि हमले की सही परिस्थितियां अभी साफ नहीं हैं और किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है.

नाकेबंदी हटी, फिर भी नहीं रुका खून

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शनिवार की गोलीबारी उसी दिन हुई, जिस दिन नगा समुदाय की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल ने अपनी करीब चार महीने पुरानी आर्थिक नाकेबंदी रोकने का ऐलान किया. यह फैसला गुवाहाटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संगठन के बीच हुई तीन तरफा बातचीत के बाद लिया गया. नाकेबंदी शाम छह बजे से हटा ली गई. यह नाकेबंदी जून में कांगपोकपी जिले से अगवा किए गए छह लियांगमाई नगा नागरिकों के शव मिलने के बाद शुरू हुई थी और इससे राज्य में जरूरी सामान और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी.

नगा संगठनों की मांगें

संगठन का कहना है कि सरकार ने उसकी मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है. इनमें मारे गए छह लोगों को न्याय, उपमुख्यमंत्री को हटाने और लगभग पच्चीस कुकी और जो हथियारबंद गुटों के साथ हुए शांति समझौते की समीक्षा जैसी बातें शामिल हैं. आठ नगा विधायक भी केंद्रीय गृह मंत्री से यह समझौता खत्म करने की मांग कर चुके हैं.

कुकी पक्ष की अलग राय

कुकी समुदाय (Kuki community) की शीर्ष संस्था इन आरोपों को खारिज करती है. उसके प्रवक्ता के मुताबिक यह लड़ाई जमीन की नहीं है, बल्कि कुछ लोग योजना बनाकर इसे भड़का रहे हैं. कुकी संगठन कई हमलों के लिए एक बड़े नगा उग्रवादी संगठन और उसके सहयोगी गुट को जिम्मेदार बताते रहे हैं. दूसरी तरफ नगा संगठन कुकी हथियारबंद गुटों पर उंगली उठाते हैं. यानी दोनों तरफ से आरोप लग रहे हैं, लेकिन जांच में अभी कुछ साबित नहीं हुआ है.

जमीन और वर्चस्व का पुराना सवाल

जानकारों के मुताबिक इस टकराव की जड़ें नई नहीं हैं. दोनों जनजातियां ईसाई धर्म को मानती हैं, लेकिन जमीन को लेकर विवाद 1950 के दशक से चला आ रहा है. नब्बे के दशक में दोनों के बीच छह साल से ज्यादा चली हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों बेघर हुए थे. कुकी समुदाय पहाड़ी जिलों में हर तरफ फैला है, जबकि नगा एक खास इलाके में बसे हैं, और यही फैलाव बार-बार तनाव की वजह बनता है.

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने ताजा हमले को कायराना करार देते हुए दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है. कुछ गंभीर मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई है, और पहाड़ों में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. इसके बावजूद हिंसा थमी नहीं है.

निष्कर्ष

नाकेबंदी(Manipur violence) हटने से जरूरी सामान की आपूर्ति सुधरने की उम्मीद है, लेकिन जब तक हमलों के असली दोषी पकड़े नहीं जाते और दोनों समुदायों में भरोसा नहीं लौटता, तब तक शांति दूर की बात लगती है. अब सबकी नजर इस पर है कि जांच और बातचीत से क्या ठोस नतीजा निकलता है.

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