नागालैंड में जहरीली शराब से 19 मौतें, 3000 बोतलें जब्त; शराबबंदी के बावजूद कैसे चल रहा गोरखधंधा?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Monday, September 28, 2026
Updated On: Monday, September 28, 2026
नागालैंड में जहरीली शराब से 19 लोगों की मौत और करीब 3,000 बोतलें जब्त होने के बाद अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर सवाल उठ रहे हैं. जानिए Nagaland poisonous liquor मामले की पूरी कहानी.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Updated On: Monday, September 28, 2026
Nagaland poisonous liquor: नागालैंड (Nagaland) में शनिवार को जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत की खबर है. हैरानी की बात है कि राज्य में 1990 से ही पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, इसके बावजूद यह त्रासदी हुई है. पुलिस ने अवैध शराब के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. कई जगहों पर छापेमारी कर 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और शराब की लगभग तीन हजार बोतलें जब्त की गई हैं.
पुलिस ने बताया कि पिछले दो दिनों में जहरीली शराब पीने से मोकोकचुंग जिले में आठ और तुएनसांग जिले में 11 लोगों की मौत (deaths) हुई है. देश के विभिन्न राज्यों में जहरीली शराब से हर वर्ष सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है. क्या है जहरीली शराब का पूरा गोरखधंधा… जानते हैं इस रिपोर्ट में…
जहरीली शराब का कारोबार बना जानलेवा
देश में शराबबंदी (illicit liquor) वाले राज्यों से लेकर उन राज्यों तक, जहां शराब की बिक्री कानूनी है, अवैध और मिलावटी शराब का कारोबार लगातार चुनौती बना हुआ है. वर्ष 2026 में भी कई राज्यों में जहरीली शराब पीने से मौतों की घटनाएं सामने आई हैं.
नागालैंड के अलावा इस साल (2026) कहां हुआ मौत का खेल
मध्य प्रदेश में 20 मौतें
मध्य प्रदेश के सागर जिले में सितंबर में हुई जहरीली शराब (poisonous liquor) त्रासदी में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को दी स्थिति रिपोर्ट में 20 लोगों की मौत की पुष्टि की. रिपोर्ट के अनुसार, मामले में 52 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 32 गिरफ्तार किए जा चुके थे. सात शराब दुकानों को सील किया गया और नमूने जांच के लिए लिए गए.
घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों की चिकित्सकीय जांच की गई. सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की भी जानकारी अदालत को दी. इस मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है.
गुजरात में मेथनॉल ने ली 13 जानें
गुजरात के भावनगर में अगस्त में हुई घटना में 13 लोगों की मौत हुई. अधिकारियों के अनुसार, करीब 67 लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था. फोरेंसिक जांच में जब्त शराब के नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल और 0.94 प्रतिशत इथेनॉल पाया गया. मेथनॉल अत्यंत विषैला रसायन है और इसके सेवन से गंभीर विषाक्तता तथा मृत्यु हो सकती है.
इस मामले में एफआईआर में 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था और उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 13 गिरफ्तारियां हुई थीं. पुलिस ने जांच का दायरा गुजरात से बाहर मध्य प्रदेश और दिल्ली तक भी बढ़ाया था, क्योंकि कच्चे माल की आपूर्ति के स्रोतों की जांच की जा रही थी.
महाराष्ट्र में 21 मौतें
महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र में मई में सामने आई जहरीली शराब त्रासदी में मौतों का आंकड़ा 21 पहुंच गया था. मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया और जांच सीआईडी को सौंपी गई. प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई तथा 22 अधिकारियों को निलंबित किया गया.
इस मामले में जांच एजेंसियों ने मेथनॉल की बरामदगी भी की थी. इससे एक बार फिर यह सवाल सामने आया कि औद्योगिक रसायनों की अवैध तरीके से शराब बनाने में इस्तेमाल होने की निगरानी कितनी प्रभावी है.
बिहार में भी लगातार सामने आए मामले
- शराबबंदी वाले बिहार में 2026 के दौरान कई जहरीली शराब की घटनाएं सामने आईं. अप्रैल में पूर्वी चंपारण में मेथनॉल से जुड़ी घटना में 11 लोगों की मौत हुई. मामले में 13 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें 11 गिरफ्तार हुए और दो ने अदालत में आत्मसमर्पण किया. इस मामले के बाद आबकारी विभाग के 14 कर्मचारियों को भी निलंबित किया गया.
- अप्रैल में ही पूर्वी चंपारण की एक अन्य रिपोर्टेड घटना में मौतों का आंकड़ा पांच बताया गया था और 12 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी.
- अगस्त में पटना जिले के बाढ़ क्षेत्र में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस ने संदिग्ध जहरीली शराब अथवा किसी नशीले पदार्थ के सेवन की आशंका जताई थी, लेकिन उस समय मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और जांच से निर्धारित किया जाना था.
समस्या सिर्फ शराबबंदी की नहीं
इन घटनाओं को केवल शराबबंदी बनाम शराब की वैध बिक्री के नजरिये से देखना पर्याप्त नहीं होगा. असली चुनौती अवैध सप्लाई नेटवर्क, जहरीले रसायनों की उपलब्धता, नकली ब्रांड की बोतलों, स्थानीय स्तर पर शराब निर्माण और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी है.
गुजरात और नागालैंड जैसे राज्यों में शराब पर कड़े प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का नेटवर्क सामने आना इस बात की ओर संकेत करता है कि प्रतिबंध के साथ-साथ सप्लाई चेन की निगरानी, रसायनों की बिक्री का रिकॉर्ड, संदिग्ध शराब की तत्काल जांच और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण है.
बिहार के पूर्वी चंपारण मामले में तो जांच के दौरान 1,263 लीटर स्पिरिट बरामद होने और 14 आबकारी कर्मियों के निलंबन की जानकारी सामने आई. इससे अवैध शराब के कारोबार में निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं.
सबसे बड़ी चुनौती
जहरीली शराब (poisonous alcohol) की घटनाओं में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पीड़ितों को अक्सर पता ही नहीं होता कि वे किस रसायन या किस तरह के मिश्रण का सेवन कर रहे हैं. मेथनॉल जैसी जहरीली सामग्री की थोड़ी मात्रा भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है.
इसलिए प्रभावी कार्रवाई के लिए तीन स्तरों पर काम जरूरी दिखाई देता है—पहला, अवैध शराब बनाने और बेचने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई; दूसरा, मेथनॉल और अन्य खतरनाक रसायनों की अवैध आपूर्ति पर निगरानी; और तीसरा, संदिग्ध शराब के सेवन के बाद लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना.
2026 की घटनाओं का सबसे बड़ा सबक यही है कि जहरीली शराब (poisonous alcohol) की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है. यह स्वास्थ्य, प्रशासन, रसायन नियंत्रण, स्थानीय निगरानी और संगठित अवैध कारोबार से जुड़ी बहुस्तरीय चुनौती है. जब तक इन सभी कड़ियों को एक साथ नहीं देखा जाएगा, तब तक अलग-अलग राज्यों में होने वाली ऐसी त्रासदियों पर पूरी तरह रोक लगाना कठिन रहेगा.
Written By : Rajiv Mandal
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