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Jantar Mantar Road Reopened: करीब 20 साल बाद जंतर-मंतर रोड से हटी बैरिकेडिंग, दिल्ली वालों को राहत; अब कहां होंगे प्रदर्शन?
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Thursday, November 5, 2026
Last Updated On: Thursday, November 5, 2026
एक्सर्प्ट: दिल्ली में जंतर-मंतर से जुड़ी सड़क पर करीब दो दशक बाद सामान्य यातायात बहाल हो गया है. दिल्ली पुलिस ने अशोक रोड और टॉल्स्टॉय मार्ग को जोड़ने वाले रास्ते से बैरिकेड्स हटा दिए हैं. इससे वाहन चालकों को राहत मिलेगी. लेकिन इस बदलाव के बीच एक बड़ा सवाल भी है. जब जंतर-मंतर अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं रहा, तो दिल्ली में आंदोलन और विरोध की आवाज कहां सुनाई देगी?
Authored By: Mazhar Pathan
Last Updated On: Thursday, November 5, 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में करीब दो दशक बाद बड़ा बदलाव हुआ है. यहां लंबे समय से लगी बैरिकेडिंग को हटाकर अशोक रोड को टॉल्स्टॉय मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर सामान्य यातायात बहाल कर दिया गया है. इससे रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है. अब उन्हें इस मार्ग से निकलने के लिए दूसरे रास्तों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा.
हालांकि, जंतर-मंतर रोड का खुलना सिर्फ ट्रैफिक से जुड़ी खबर नहीं है. दिल्ली पुलिस पहले ही जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा चुकी है और धरना-प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली में आंदोलनों की पहचान रहे जंतर-मंतर का दौर बदल रहा है? और अब प्रदर्शनकारियों को अपनी आवाज उठाने के लिए किन जगहों पर जाना होगा?
करीब 20 साल बाद सड़क से हटे बैरिकेड्स, अब सामान्य आवाजाही
5 नवंबर को जंतर-मंतर इलाके में लगी भारी बैरिकेडिंग हटा दी गई. इसके साथ ही अशोक रोड को टॉल्स्टॉय मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर वाहनों की सामान्य आवाजाही शुरू हो गई. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मार्ग पर करीब दो दशक से सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग लगी हुई थी. जंतर-मंतर दिल्ली के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाके में स्थित है. इसके आसपास कई प्रमुख सरकारी और प्रशासनिक इमारतें हैं. यहां समय-समय पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन करने वाले समूहों के प्रदर्शन होते रहे हैं. इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था के तहत सड़क पर आवाजाही नियंत्रित रखी जाती थी.
बैरिकेडिंग हटने के बाद अब इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन सीधे आवाजाही कर सकेंगे. इससे आसपास के मार्गों पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है. हालांकि, ट्रैफिक जाम में कितनी कमी आएगी, इसका आकलन सड़क खुलने के बाद वास्तविक यातायात आंकड़ों से ही किया जा सकेगा.
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से क्यों हटाया गया?
सड़क से बैरिकेड्स हटाने से पहले दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला लिया था. 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर की ओर से जारी आदेश के बाद 12 अक्टूबर को इस फैसले की जानकारी सामने आई.
दिल्ली पुलिस के आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित एक समिति ने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा की थी. समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया गया. इसकी जगह दिल्ली में तीन नए स्थानों को प्रदर्शन और धरने के लिए निर्धारित किया गया.
इस फैसले के बाद जंतर-मंतर पर पहले की तरह नियमित रूप से प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था बदल गई है. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार खत्म कर दिया गया है. प्रदर्शन के लिए अब पुलिस की ओर से निर्धारित दूसरे स्थानों और अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा.
अब दिल्ली में कहां कर सकेंगे धरना-प्रदर्शन?
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं. इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं.
| प्रदर्शन का नया स्थान | इलाका |
|---|---|
| रामलीला मैदान | मध्य दिल्ली |
| बुराड़ी ग्राउंड | उत्तर-पश्चिम दिल्ली |
| CBD ग्राउंड | पूर्वी दिल्ली, शाहदरा |
इन तीनों स्थानों की स्थिति और क्षमता अलग-अलग है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर संसद से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वहीं रामलीला मैदान संसद से लगभग छह किलोमीटर, CBD ग्राउंड करीब 14 किलोमीटर और बुराड़ी ग्राउंड लगभग 23 किलोमीटर दूर है.
इस दूरी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि जंतर-मंतर पर होने वाले कई प्रदर्शन संसद और दूसरे प्रमुख सरकारी संस्थानों के नजदीक आयोजित होते थे. नई व्यवस्था में प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग इलाकों में जाना होगा.
रामलीला मैदान पहले भी बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहा है. वहीं बुराड़ी और CBD ग्राउंड को भी अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है. हालांकि, इन जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति और अन्य प्रशासनिक नियमों का पालन करना होगा.
जंतर-मंतर का इतिहास: आंदोलनों की आवाज बना रहा यह इलाका
जंतर-मंतर सिर्फ दिल्ली की एक सड़क या प्रदर्शन स्थल नहीं रहा है. पिछले कई दशकों में यह देश के अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक आंदोलनों का महत्वपूर्ण केंद्र बना. यहां भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, किसानों के मुद्दों, सरकारी नीतियों और कई दूसरे विषयों पर प्रदर्शन हुए.
1993 के बाद जंतर-मंतर धीरे-धीरे प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख स्थान बन गया. इससे पहले दिल्ली के बोट क्लब इलाके में बड़े प्रदर्शन होते थे. लेकिन वहां प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंधों के बाद आंदोलनकारियों के लिए जंतर-मंतर एक अहम विकल्प बनकर उभरा.
2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशभर में चर्चा का केंद्र बना दिया था. इसी तरह 2012 में निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग यहां जुटे थे. इन आंदोलनों ने जंतर-मंतर को ऐसी जगह के रूप में पहचान दिलाई, जहां छोटे समूह भी राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी आवाज उठा सकते थे. यही वजह है कि इसे प्रदर्शनकारियों के लिए केवल एक स्थान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध की पहचान के तौर पर भी देखा जाता रहा है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रदर्शन स्थलों पर बढ़ी चर्चा
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले के बीच सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी भी महत्वपूर्ण है. 3 नवंबर को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी एक समूह को किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं दिया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि किसानों, पत्रकारों, श्रमिकों और दूसरे समूहों को भी प्रदर्शन का अधिकार मिलना चाहिए.
इस टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रदर्शन स्थल का इस्तेमाल सभी समूहों के लिए उपलब्ध होना चाहिए. किसी एक संगठन या आंदोलन के लंबे समय तक वहां बने रहने से दूसरे समूहों के लिए जगह सीमित हो सकती है.
वहीं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी- दोनों के बीच संतुलन बनाना भी प्रशासन के सामने चुनौती है. इसी वजह से प्रदर्शन के लिए स्थान, अनुमति, समय और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
आम लोगों को राहत, लेकिन प्रदर्शनकारियों के सामने नई चुनौती?
जंतर-मंतर रोड से बैरिकेडिंग हटने का सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो रोजाना इस इलाके से गुजरते हैं. सड़क पर सामान्य आवाजाही बहाल होने से वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे आसपास के यातायात को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है.
लेकिन प्रदर्शनकारियों के लिए स्थिति पहले जैसी नहीं रहेगी. अब उन्हें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड या CBD ग्राउंड जैसे निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनानी होगी. इनमें से कुछ स्थान संसद और केंद्रीय प्रशासनिक इलाकों से काफी दूर हैं. इससे प्रदर्शन की पहुंच, उसमें शामिल होने वाले लोगों की सुविधा और आंदोलन के प्रभाव को लेकर नई बहस हो सकती है.
दूसरी तरफ प्रशासन के सामने भी यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति देने की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी हो. लोगों को अपनी मांगें रखने का अवसर मिले और साथ ही आम नागरिकों की आवाजाही तथा सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो.
जंतर-मंतर रोड खुलने के बाद अब आगे क्या?
जंतर-मंतर रोड से बैरिकेड्स हटने के बाद दिल्ली के इस महत्वपूर्ण इलाके में सामान्य यातायात बहाल हो गया है. करीब 20 साल बाद सड़क खुलने का दावा निश्चित रूप से वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है. लेकिन जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था भी बदल रही है.
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति कैसे दी जाती है और वहां आंदोलनकारियों को कितनी सुविधाएं मिलती हैं. सड़क खुलने से ट्रैफिक को राहत मिल सकती है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध के लिए उचित स्थान और अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.













