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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Saturday, October 24, 2026
Last Updated On: Saturday, October 24, 2026
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग की ओर से कराई जा रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को न केवल पूरी तरह असंवैधानिक बताया जा सकता है, बल्कि इसे लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Saturday, October 24, 2026
SY Quraishi on SIR: कुरैशी ने दावा किया कि, एसआईआर के तहत कथित तौर पर घुसपैठियों के नाम पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए, लेकिन जांच में केवल 150 बांग्लादेशियों का पता चला. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह प्रक्रिया सिर्फ नाम हटाने के लिए चलाई गई, तो जिन लोगों के नाम काटे गए, उनके बारे में क्या जानकारी सामने आई?
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में एसआईआर की शुरुआत के समय भी उन्होंने यही दावा किया था कि इसका उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान करना है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. उनके अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने कथित घुसपैठियों की पहचान हुई और कितने लोगों के नाम वास्तव में सामने आए. कुरैशी का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से वह इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.
संविधान में एसआईआर नाम की चीज नहीं
कुरैशी ने एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नाम की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि न तो जनप्रतिनिधित्व कानून में और न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में इस नाम से कोई प्रावधान मिलता है. उनके अनुसार, कानून में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की व्यवस्था जरूर है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून में एसआईआर नाम की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, तो इस प्रक्रिया को किस आधार पर संचालित किया जा रहा है. कुरैशी ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया होनी चाहिए. उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया में नाम हटाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है, जबकि पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा.
किसी का नाम काटने के लिए नहीं चलनी चाहिए प्रक्रिया
कुरैशी के मुताबिक, यदि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है, तो इसका उद्देश्य केवल नाम हटाना नहीं होना चाहिए. किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में एसआईआर शुरू होने के समय घुसपैठियों की पहचान करने का तर्क दिया गया था, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों की पहचान की गई है. उनके मुताबिक, इस संबंध में ठोस आंकड़े सामने आने चाहिए.
घुसपैठियों के बारे में पूछताछ तक नहीं
कुरैशी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान करना बताया गया, लेकिन इस संबंध में अपेक्षित जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई. सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे पर कई सवाल उठाए गए, लेकिन उनके मुताबिक, घुसपैठियों की पहचान और उनके नाम मतदाता सूची से हटाने के दावों की पर्याप्त पड़ताल नहीं हुई.
कुरैशी ने दावा किया कि बिहार में एसआईआर की शुरुआत के दौरान घुसपैठियों को पकड़ने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने लोगों को चिह्नित किया गया. उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों की पहचान करने का दावा किया गया था, तो उससे जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए.
Written By: Rajiv Mandal
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