राम-कृष्ण पर बयान देकर घिरे धीरेंद्र शास्त्री, माफी के बाद भी सियासी घमासान

Authored By: Rajeev Mandal

Published On: Saturday, November 7, 2026

Last Updated On: Saturday, November 7, 2026

राम-कृष्ण पर बयान देकर घिरे धीरेंद्र शास्त्री, माफी के बाद भी सियासी घमासान
राम-कृष्ण पर बयान देकर घिरे धीरेंद्र शास्त्री, माफी के बाद भी सियासी घमासान

विवाद और बागेश्वर बाबा का चोली-दामन का साथ है. ये पहली बार नहीं है. हर 3-4 महीने में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो वायरल होता है, बवाल होता है, फिर वो नैरोबी या लंदन से एक माफी वाला वीडियो डाल देते हैं. इस बार मामला राम और कृष्ण का है. उनके ऊटपटांग बयान के बाद सियासी पारा गर्म है. क्या है पूरा मामला, जानते हैं…

Authored By: Rajeev Mandal

Last Updated On: Saturday, November 7, 2026

Image Title: राम और कृष्ण पर टिप्पणी से क्यों घिरे बागेश्वर बाबा? माफी के बाद भी तेज हुई राजनीति

29 अक्टूबर, शिवपुरी के करैरा में राम कथा चल रही थी. वहीं उन्होंने कहा-"तुम अपने वाले ठाकुर जी की एक भी फोटो देख लो. खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े. पांव के ऊपर पांव, कहीं कमर लचकाए, टेढ़ी गर्दन करके बंसी बजाते हैं. हमारे वाले तो एकदम सीधे. हमारे वाले का नाम भी सीधा, चलना भी सीधा, दिखते भी सीधे. तुम्हारे वाले टेढ़े." वो यहीं नहीं रुके, आगे कहा, बंसी बजाना तो खेल है, धनुष उठाना खेल नहीं. तुम्हारे वाले ने पर्वत उठाया तो क्या बड़ी बात, हमारे हनुमान ने तो पूरा पर्वत उड़ा दिया. हमारा अयोध्या सीधा, तुम्हारा वृंदावन टेढ़ा.

वीडियो 2 नवंबर को वायरल हुआ. नतीजतन, मथुरा-वृंदावन के संत भड़क गए. बोले राम-कृष्ण में भेद कैसे कर दिया, दोनों एक ही हैं.

बयानबाजी के बाद दी सफाई

बाबा ने केन्या से वीडियो जारी किया. बोले – मेरा मतलब वो नहीं था. ये ब्रज की परंपरा है, गोपियां भी कृष्ण को उलाहना देती थीं – "बंसी बजाना तो खेल है…" ये उसी पद की व्याख्या थी. मेरा नाम भी कृष्ण है, मैं खुद कृष्ण जन्मभूमि के लिए लड़ रहा हूं. किसी को ठेस पहुंची हो तो माफी, लेकिन बात यहीं नहीं रुकी.

अखिलेश आए मैदान में

अखिलेश यादव मैदान में आ गए. बोले ये सनातन को तोड़ने की कोशिश है. तेजस्वी यादव ने कहा – पहले लोगों को बांटते थे, अब भगवान को बांट रहे हैं. मेरठ, हमीरपुर, लखनऊ में FIR की मांग हो गई. लखनऊ के एक वकील ने 15 दिन में बिना शर्त माफी का नोटिस भेज दिया है. उज्जैन में एक नेता ने 15 नवंबर तक बागेश्वर धाम बंद कराने की धमकी दे दी है.

जुबान फिसली या सोची-समझी रणनीति

इस पर 2 थ्योरी हैं.

पहली थ्योरी – कथा की शैली: बाबा के समर्थक कहते हैं, कथा में इस तरह का ‘उलाहना’ आम है. राम कथा में राम को बड़ा बताना और कृष्ण कथा में कृष्ण को बड़ा बताना, ये सदियों से होता आया है. बाबा ने वही किया, बस क्लिप काटकर वायरल कर दिया.

दूसरी थ्योरी – सियासी टाइमिंग: विरोधी कहते हैं टाइमिंग देखो. यूपी में चुनाव नजदीक हैं, बिहार में भी हलचल है. बाबा का बड़ा फॉलोअर यादव समाज में भी है, जो कृष्ण को अपना मानता है. "तुम्हारे कृष्ण – हमारे राम" कहकर कहीं यादव बनाम ठाकुर तो नहीं किया जा रहा? अखिलेश ने भी इसी पर खेल दिया – "रघुवंशी और यदुवंशी दोनों की भावना आहत हुई है."

और बाबा ये जानते हैं कि विवाद होगा तो कथा और फेमस होगी. 17 से 20 नवंबर को कुंडा, प्रतापगढ़ में उनकी कथा है – ठीक विवाद के बीच.

इससे पहले कब-कब फिसली जुबान

1. सितंबर 2026 – कोलकाता: दुर्गा पूजा में बोले – "नवरात्रि में नॉनवेज खाने वालों को हिंदू समाज से बाहर निकालो." बंगाल में बवाल हो गया, ममता के नेताओं ने विरोध किया.

2. करवा चौथ वाला बयान: करवा चौथ को ‘खसम पूजा’ कह दिया. महिलाओं ने आपत्ति जताई, हमीरपुर में FIR की मांग उठी.

कई बार कह चुके हैं भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है, जो नहीं मानता वो… इस पर भी केस हुए. पैटर्न एक ही है-बड़ा बयान, बवाल, फिर सफाई कि बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. अब सवाल ये नहीं है कि उन्होंने क्या कहा, सवाल ये है कि राम को सीधा और कृष्ण को टेढ़ा बताने से किसका फायदा? ब्रज के संत कहते हैं – त्रिभंगी मुद्रा का मतलब टेढ़ा नहीं होता, उसका मतलब है प्रेम में झुका हुआ. जो लोग कृष्ण को नहीं समझे, वो उसे टेढ़ा कहते हैं. कुल मिलाकर, बाबा ने माफी मांग ली है, लेकिन सियासत ने माफी को भी मुद्दा बना लिया है.

About the Author: Rajeev Mandal
वरिष्ठ पत्रकार राजीव मंडल पिछले 25 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। दैनिक जागरण (लखनऊ) से बतौर कॅरियर की शुरुआत हुई। गलगोटिया टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ने से पहले राजीव ने टीवी इंडस्ट्री-ईटीवी और नेपाल वन न्यूज चैनल- में भी काम किया। इसके अलावा राष्ट्रीय सहारा अखबार के साथ 19 वर्षों तक इनका साथ रहा। इस अखबार के संपादकीय पृष्ठ और साप्ताहिक परिशिष्ट 'हस्तक्षेप" अंक का बतौर प्रभारी लंबे समय तक नेतृत्व किया। राजीव ने पत्रकारिता से मास्टर डिग्री (2000-2001) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हासिल किया। फिलहाल राजीव गलगोटिया टाइम्स के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसामयिक विषयों पर कलम चलाते हैं।
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