Lifestyle News
Microplastics In Human Body: दिनभर च्युइंग गम चबाते हैं तो सावधान, माइक्रोप्लास्टिक्स से पुरुष फर्टिलिटी पर पड़ सकता है गंभीर असर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, April 20, 2026
Last Updated On: Monday, April 20, 2026
Microplastics In Human Body: दिनभर च्युइंग गम चबाने की आदत माइक्रोप्लास्टिक्स के जरिए शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है. ये कण हार्मोन बिगाड़कर पुरुषों की फर्टिलिटी, स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर असर डालते हैं. रिसर्च में इनके बढ़ते खतरे का खुलासा हुआ है, इसलिए छोटी आदतों में बदलाव बेहद जरूरी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, April 20, 2026
Microplastics In Human Body: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस जाते वक्त कॉफी लेना, मीटिंग के बीच च्युइंग गम चबाना या जिम में स्टाइलिश कपड़े पहनना आम बात है. ये आदतें हमें छोटी और सामान्य लगती हैं, लेकिन हाल के सालों में एक्सपर्ट्स ने इन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. खासकर च्युइंग गम, जो ताजगी और टाइमपास का साधन माना जाता है, अब हेल्थ के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है. कई लोग दिनभर बिना सोचे-समझे गम चबाते रहते हैं, लेकिन शायद ही किसी को पता हो कि ये आदत शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर पुरुषों की फर्टिलिटी पर.
माइक्रोप्लास्टिक्स: शरीर के अंदर का अदृश्य दुश्मन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस खतरे की असली वजह है माइक्रोप्लास्टिक्स. ये बहुत छोटे-छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं, जो हमारी रोजमर्रा की चीजों से निकलकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. च्युइंग गम भी इन्हीं में से एक बड़ा स्रोत बन चुका है. जब आप गम चबाते हैं, तो उससे सैकड़ों माइक्रोप्लास्टिक कण रिलीज होते हैं, जो सीधे मुंह के जरिए शरीर में चले जाते हैं. खास बात यह है कि ये कण गम चबाने के शुरुआती मिनटों में ही ज्यादा मात्रा में निकलते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है. समय के साथ ये कण शरीर में जमा होकर कई समस्याओं की जड़ बन सकते हैं.
हार्मोन पर वार: कैसे बिगड़ता है बॉडी सिस्टम
माइक्रोप्लास्टिक्स में पाए जाने वाले केमिकल्स जैसे BPA, फ्थेलेट्स और PFAS शरीर के हार्मोनल सिस्टम को गड़बड़ा सकते हैं. ये केमिकल्स शरीर में जाकर ऐसे काम करते हैं जैसे नकली हार्मोन, जिससे असली हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन जब तक समझ आता है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. यही वजह है कि आजकल एक्सपर्ट्स इसे “साइलेंट डिसरप्टर” कह रहे हैं.
पुरुषों के लिए खतरे की घंटी: फर्टिलिटी पर असर
अगर आप भविष्य में पिता बनने का सपना देख रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है. माइक्रोप्लास्टिक्स पुरुषों के स्पर्म काउंट, उनकी क्वालिटी और मूवमेंट पर असर डाल सकते हैं. यानी स्पर्म की संख्या कम हो सकती है और उनकी क्षमता भी घट सकती है. लंबे समय तक लगातार एक्सपोजर रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है. यही वजह है कि डॉक्टर अब पुरुषों को भी अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं.
महिलाओं पर भी पड़ता है असर
यह समस्या सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है. महिलाओं में भी माइक्रोप्लास्टिक्स ओव्यूलेशन प्रोसेस और पीरियड साइकल को प्रभावित कर सकते हैं. हार्मोनल असंतुलन की वजह से गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है. यानी यह एक ऐसी समस्या है जो पूरे परिवार की प्लानिंग को प्रभावित कर सकती है.
रिसर्च में चौंकाने वाले खुलासे
हाल के रिसर्च इस खतरे को और स्पष्ट करते हैं. 2025 में हुई एक स्टडी में पाया गया कि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करा रही महिलाओं के लगभग 69 प्रतिशत सैंपल और पुरुषों के 55 प्रतिशत सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद थे. इससे साफ होता है कि ये कण अब हमारे शरीर का हिस्सा बनते जा रहे हैं. वहीं 2024 की एक रिसर्च में पुरुषों के टेस्टिकल टिशू में भी माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए, जो इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ाता है.
सिर्फ च्युइंग गम ही नहीं, ये चीजें भी जिम्मेदार
यह खतरा सिर्फ गम तक सीमित नहीं है. रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें माइक्रोप्लास्टिक्स का स्रोत हैं. जैसे टी-बैग, टेकअवे कॉफी कप, प्लास्टिक कंटेनर और सिंथेटिक कपड़े. खासकर जब ये चीजें गर्मी के संपर्क में आती हैं, तो इनमें से ज्यादा प्लास्टिक कण निकलते हैं. यानी आपकी रोजमर्रा की कई आदतें अनजाने में आपको इस खतरे के करीब ला रही हैं.
छोटे बदलाव, बड़ा फर्क: बचाव कैसे करें
हालांकि प्लास्टिक को पूरी तरह से जीवन से हटाना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान बदलाव करके इसके असर को कम किया जा सकता है. जैसे प्लास्टिक की जगह ग्लास या सिरेमिक के बर्तनों का इस्तेमाल करना, नेचुरल फैब्रिक के कपड़े पहनना और च्युइंग गम की जगह सौंफ या इलायची जैसे प्राकृतिक विकल्प अपनाना. ये छोटे-छोटे कदम आपकी सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं.
निष्कर्ष: आज की आदत, कल का असर
फर्टिलिटी सिर्फ उम्र, डाइट या लाइफस्टाइल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हमारे आसपास का माहौल भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. च्युइंग गम जैसी छोटी दिखने वाली आदत भी लंबे समय में बड़ा असर डाल सकती है. अगर आप भविष्य में माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं, तो आज से ही इन छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देना शुरू करें, क्योंकि कई बार सबसे बड़ा खतरा वही होता है जो हमें सबसे सामान्य लगता है.
















