Lifestyle News
Tulsidas Jayanti 2026: 19 अगस्त को मनाई जाएगी जयंती, जानें अवधी में क्यों लिखी गई रामचरितमानस की अमर कथा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, August 18, 2026
Last Updated On: Tuesday, August 18, 2026
Tulsidas Jayanti 2026: 19 अगस्त 2026 को तुलसीदास जयंती मनाई जाएगी. गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस को अवधी में रचकर श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आम लोगों तक पहुंचाया. उनकी रचनाओं ने रामभक्ति को जन-जन से जोड़ा. जानें तुलसीदास के जीवन, रचनाओं, रामभक्ति और अवधी भाषा को चुनने के पीछे की खास वजह.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, August 18, 2026
Tulsidas Jayanti 2026: रामभक्ति को जन-जन तक पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जयंती हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है. साल 2026 में तुलसीदास जयंती 19 अगस्त को मनाई जाएगी. तुलसीदास हिंदी साहित्य और रामभक्ति परंपरा के ऐसे संत-कवि माने जाते हैं, जिन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों और भक्ति संदेश को आम लोगों की भाषा में पहुंचाया. उनकी रचनाओं ने न सिर्फ धार्मिक चेतना को मजबूत किया, बल्कि लोकभाषा को साहित्य के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाई.
तुलसीदास ने अवधी में क्यों लिखी रामचरितमानस?
गोस्वामी तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस है, जिसे उन्होंने मुख्य रूप से अवधी भाषा में लिखा. इसके पीछे उनका उद्देश्य केवल श्रीराम की कथा का वर्णन करना नहीं था, बल्कि उनके आदर्शों, मर्यादा और जीवन मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना था. उस समय धार्मिक ग्रंथों का बड़ा हिस्सा संस्कृत में उपलब्ध था, जिसे आम लोग आसानी से नहीं समझ पाते थे. ऐसे दौर में तुलसीदास ने लोकभाषा को माध्यम बनाकर रामकथा को आम जन तक पहुंचाया. यही वजह है कि रामचरितमानस धीरे-धीरे घर-घर पढ़ी और सुनी जाने वाली रचना बन गई और श्रीराम की कथा जनमानस का हिस्सा बनती चली गई.
पत्नी रत्नावली की बात ने बदल दी जिंदगी
तुलसीदास के जीवन से जुड़ी रत्नावली की कथा बेहद प्रसिद्ध है. धार्मिक परंपरा और प्रचलित जीवनियों के अनुसार, उनकी पत्नी एक बार अपने मायके चली गई थीं. तुलसीदास उनसे मिलने कठिन परिस्थितियों में वहां पहुंच गए. तब रत्नावली ने उन्हें सांसारिक मोह की ओर संकेत करते हुए समझाया कि जिस प्रेम में वे नश्वर शरीर के लिए इतना आकर्षित हैं, वही प्रेम यदि भगवान श्रीराम के प्रति होता तो उनका जीवन सार्थक हो जाता. कहा जाता है कि पत्नी के इन शब्दों ने तुलसीदास के मन पर गहरा प्रभाव डाला और इसके बाद उनका जीवन रामभक्ति की ओर पूरी तरह मुड़ गया. हालांकि यह प्रसंग मुख्य रूप से परंपरागत जीवनियों में मिलता है.
हनुमान चालीसा से भी घर-घर पहुंचे तुलसीदास
तुलसीदास की पहचान केवल रामचरितमानस तक सीमित नहीं है. उनकी सबसे लोकप्रिय रचनाओं में हनुमान चालीसा भी शामिल है, जिसका पाठ आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु करते हैं. तुलसीदास की भक्ति परंपरा में हनुमान जी का विशेष स्थान था और उन्हें श्रीराम की भक्ति तक पहुंचने का सहज माध्यम माना गया. इसके अलावा विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, जानकी मंगल और पार्वती मंगल जैसी रचनाएं भी उनके साहित्यिक योगदान को दर्शाती हैं.
आज भी क्यों प्रासंगिक हैं तुलसीदास?
तुलसीदास की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों को ऐसी भाषा में प्रस्तुत किया, जिसे सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सके. उन्होंने भक्ति को केवल विद्वानों तक सीमित रखने के बजाय लोकभाषा के माध्यम से समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाया. इसी कारण उनकी रचनाएं सदियों बाद भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. 19 अगस्त 2026 को तुलसीदास जयंती के अवसर पर उन्हें याद करना उस संत-कवि को नमन करना है, जिसने रामभक्ति, साहित्य और लोकभाषा के बीच ऐसा सेतु बनाया, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है.
यह भी पढ़ें :- Sawan Somvar 2026: 6 साल बाद सावन सोमवार और सोम प्रदोष का महासंयोग, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये शुभ चीजें, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा














