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Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी 2026, एक व्रत से 24 एकादशियों का पुण्य, जानें तिथि, पारण मुहूर्त और महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, June 17, 2026
Last Updated On: Wednesday, June 17, 2026
Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि इस एक व्रत से वर्षभर की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. भगवान विष्णु की पूजा, निर्जल उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है. पारण 26 जून की सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाएगा.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, June 17, 2026
Nirjala Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में वर्षभर कई एकादशी व्रत आते हैं, लेकिन निर्जला एकादशी का स्थान सबसे विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एक व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से सालभर की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है. यही कारण है कि इसे “महाव्रत” भी कहा जाता है. भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का भी प्रतीक माना जाता है.
भीमसेनी एकादशी के नाम से भी है प्रसिद्ध
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीमसेन अपनी भूख के कारण नियमित रूप से एकादशी व्रत नहीं रख पाते थे. तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया. कहा जाता है कि इस एक व्रत के प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ. तभी से यह एकादशी विशेष महत्व रखने लगी.
निर्जला एकादशी 2026 कब है?
वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून को शाम 6:12 बजे से होगी और यह 25 जून को रात 8:09 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर 25 जून को व्रत रखना शुभ माना गया है.
महत्वपूर्ण तिथियां
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, शाम 6:12 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात 8:09 बजे
- व्रत की तिथि: 25 जून 2026 (गुरुवार)
- पारण की तिथि: 26 जून 2026 (शुक्रवार)
- पारण का शुभ समय: सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक
क्यों माना जाता है कठिन व्रत?
निर्जला एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन व्रती को अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करना पड़ता है. सूर्योदय से लेकर अगले दिन पारण तक भोजन और पानी ग्रहण नहीं किया जाता. इसी कारण इसे सबसे कठिन एकादशी व्रतों में गिना जाता है. हालांकि स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करने की सलाह दी जाती है.
कैसे करें पूजा और व्रत?
निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करें. भगवान को तुलसी दल, पीले पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित करें. पूरे दिन विष्णु मंत्रों का जाप, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है. व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
दान से बढ़ता है व्रत का पुण्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी पर दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जलदान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है.
इस दिन क्या दान करें?
- जल से भरा घड़ा
- छाता
- पंखा
- वस्त्र
- फल और शरबत
- जरूरतमंदों को भोजन
क्या मिलता है इस व्रत का फल?
शास्त्रों में बताया गया है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यह व्रत पापों का नाश करने वाला, सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है. श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है. यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु हर वर्ष इस पुण्यदायी एकादशी का इंतजार करते हैं.
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