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Duleep Trophy 2026 Final: ईशान किशन का तूफान, 270 रन से रचा इतिहास, दलीप ट्रॉफी में दर्ज हुए कई बड़े रिकॉर्ड
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, September 8, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 8, 2026
Duleep Trophy 2026 Final: दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल में ईशान किशन ने साउथ जोन के खिलाफ 270 रन की शानदार पारी खेलकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. उनके दोहरे शतक और कुमार कुशाग्र के शतक से ईस्ट जोन ने 708 रन बनाए. ईशान फाइनल में डबल सेंचुरी लगाने वाले ईस्ट जोन के पहले बल्लेबाज बने.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, September 8, 2026
Duleep Trophy 2026 Final: दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने ऐसी पारी खेली, जिसने पूरे मुकाबले का रुख ही बदल दिया. चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में साउथ जोन के खिलाफ ईशान ने 270 रन की शानदार पारी खेली. 334 गेंदों की इस मैराथन पारी में उन्होंने 30 चौके और 7 छक्के लगाए. उनकी बल्लेबाजी के दम पर ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया.
ईशान ने अपना दोहरा शतक 270 गेंदों में पूरा किया था. इसके बाद भी उन्होंने पारी को आगे बढ़ाया और 250 रन का आंकड़ा पार किया. वह आखिरकार 270 रन पर आउट हुए और अपने फर्स्ट क्लास करियर के सर्वश्रेष्ठ 273 रन के स्कोर से सिर्फ तीन रन दूर रह गए. उनकी पारी करीब 522 मिनट तक चली.
कुमार कुशाग्र ने दिया कप्तान का भरपूर साथ
ईशान की इस बड़ी पारी को मजबूत आधार देने में कुमार कुशाग्र का भी अहम योगदान रहा. दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 230 रन की साझेदारी हुई. कुशाग्र ने भी शानदार शतक लगाया और 101 रन बनाकर ईशान की पारी को बेहतरीन सपोर्ट दिया.
ईस्ट जोन की पारी में इस साझेदारी का महत्व इसलिए भी ज्यादा रहा क्योंकि टीम को एक समय बड़े स्कोर तक पहुंचने के लिए लंबी साझेदारी की जरूरत थी. ईशान और कुशाग्र ने वही काम किया और साउथ जोन के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा.
270 रन के साथ रिकॉर्ड्स की लंबी लिस्ट
ईशान की यह पारी सिर्फ दोहरे शतक तक सीमित नहीं रही. उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में कई उपलब्धियां अपने नाम कर लीं. सबसे खास बात यह रही कि वह दलीप ट्रॉफी फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले ईस्ट जोन के पहले बल्लेबाज बने. ईस्ट जोन के लिए उनसे पहले अरुण लाल और सबा करीम टूर्नामेंट में डबल सेंचुरी लगा चुके थे.
उनकी 270 रन की पारी ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर की सूची में भी उन्हें दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया. उनसे आगे अब भी 1987 के फाइनल में 320 रन बनाने वाले रमन लांबा हैं. ईशान ने यशस्वी जायसवाल के 2022 के 265 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया.
दलीप ट्रॉफी फाइनल में बड़े व्यक्तिगत स्कोर
- 320 रन – रमन लांबा, 1987
- 270 रन – ईशान किशन, 2026
- 265 रन – यशस्वी जायसवाल, 2022
- 256 रन* – चेतेश्वर पुजारा, 2016
- 216 रन – अंशुमान गायकवाड़, 1987
- 210 रन* – यूसुफ पठान, 2010
- 200 रन – मंसूर अली खान पटौदी, 1967
कप्तान और विकेटकीपर के तौर पर भी खास उपलब्धि
ईशान किशन की यह पारी इसलिए और खास हो जाती है क्योंकि वह ईस्ट जोन के कप्तान होने के साथ-साथ विकेटकीपर-बल्लेबाज भी हैं. वह दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के पहले कप्तान और विकेटकीपर बने, जिन्होंने दोहरा शतक लगाया. 708 रन तक पहुंचना भी ईस्ट जोन के लिए बड़ी उपलब्धि रही और टीम पहली बार इस टूर्नामेंट में 600 रन के आंकड़े से आगे निकली.
फाइनल में 700 के पार पहुंचा ईस्ट जोन
ईशान के 270 और कुमार कुशाग्र के 101 रन की बदौलत ईस्ट जोन ने 163 ओवर में 708 रन बनाए. दलीप ट्रॉफी के फाइनल में यह सिर्फ एक बड़ा स्कोर नहीं था, बल्कि मुकाबले पर टीम की पकड़ का संकेत भी था. साउथ जोन के गेंदबाजों को लंबे समय तक मैदान पर रहना पड़ा और ईस्ट जोन ने लगातार रन बनाकर दबाव बनाए रखा.
साउथ जोन के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब पहली पारी में उसे इतने बड़े स्कोर का सामना करना पड़ा. मैच के तीसरे दिन की शुरुआत उसे 708 रन के जवाब में करनी पड़ी, जिससे फाइनल में वापसी की चुनौती काफी बड़ी हो गई.
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ईशान की मजबूत वापसी
ईशान की यह पारी उनके रेड-बॉल क्रिकेट के लिए भी बड़ा संकेत मानी जा रही है. 28 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ने इस प्रदर्शन से दिखाया कि लंबे प्रारूप में बड़ी पारी खेलने की उनकी क्षमता अभी भी मजबूत है. उनकी बल्लेबाजी ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में उनके टेस्ट दावों को लेकर चर्चा तेज कर दी है.
उनका फर्स्ट क्लास करियर भी अब 4 हजार से ज्यादा रन के आंकड़े को पार कर चुका है. 67 मैचों में ईशान के नाम 10 शतक और 19 अर्धशतक दर्ज हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 273 रन है, जिसे वह फाइनल में तोड़ने से सिर्फ तीन रन दूर रह गए.
कुल मिलाकर दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान किशन की 270 रन की पारी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रही. इसने ईस्ट जोन को 708 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया, कई रिकॉर्ड बदले और ईशान की रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी की चर्चा को फिर हवा दे दी. चेन्नई में खेली गई यह पारी उनके फर्स्ट क्लास करियर की सबसे यादगार पारियों में जरूर गिनी जाएगी.
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