एशियन गेम्स ट्रायल को लेकर फिर चर्चा में विनेश फोगाट, सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत लेकिन उठाए बड़े सवाल

Authored By: Nishant Singh

Published On: Friday, May 29, 2026

Updated On: Friday, May 29, 2026

Vinesh Phogat during Asian Games trial controversy after Supreme Court relief

एशियन गेम्स 2026 ट्रायल में Vinesh Phogat को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दी, लेकिन डोपिंग टेस्ट, चयन प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल भी उठाए. अदालत ने साफ कहा कि खिलाड़ी बड़ा हो सकता है, लेकिन देश और नियम सबसे पहले हैं.

Authored By: Nishant Singh

Updated On: Friday, May 29, 2026

Vinesh Phogat Asian Games Trial: भारतीय महिला कुश्ती की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल Vinesh Phogat एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार वजह कोई मेडल या बड़ा मुकाबला नहीं, बल्कि Asian Games 2026 के ट्रायल में हिस्सा लेने को लेकर चला कानूनी विवाद है. सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी है. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि केवल उपलब्धियां किसी खिलाड़ी को नियमों से ऊपर नहीं बना सकतीं. अदालत ने कहा कि देश और खेल व्यवस्था सबसे पहले आती है.

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले विनेश फोगाट को ट्रायल में शामिल होने की इजाजत दी थी. इसके बाद रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी WFI इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को फिलहाल बरकरार रखा और विनेश को ट्रायल में भाग लेने की राहत दी. लेकिन साथ ही कोर्ट ने कई ऐसे सवाल पूछे जिनसे साफ हो गया कि मामला केवल एक खिलाड़ी की वापसी का नहीं, बल्कि खेल नियमों और अनुशासन का भी है.

कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विनेश फोगाट कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं हैं. उन्होंने देश के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसके बावजूद नियम सभी के लिए बराबर हैं. कोर्ट ने पूछा कि दिसंबर 2024 में ब्रेक लेने के बाद उन्होंने डोपिंग टेस्ट में हिस्सा क्यों नहीं लिया. अदालत ने यह भी कहा कि खिलाड़ी की लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी खेल संस्थाओं को देना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया.

कोर्ट ने यह भी बताया कि फरवरी 2026 से Asian Games की चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. इसके तहत खिलाड़ियों को चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जरूरी था, लेकिन विनेश इनमें शामिल नहीं हुईं. बाद में मई में अचानक उन्होंने सक्रिय होकर अदालत का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर नियम पहले से तय थे तो फिर उन्हें अंतिम समय में चुनौती क्यों दी गई.

मां बनने के बाद वापसी की कोशिश

Vinesh Phogat की ओर से उनके वकील ने कोर्ट में भावनात्मक दलील दी. उन्होंने कहा कि एक महिला खिलाड़ी, जो एक साल पहले मां बनी है, केवल इतना चाहती है कि उसे खुद को साबित करने का मौका दिया जाए. यह दलील अदालत के सामने काफी अहम रही. खेल की दुनिया में मां बनने के बाद वापसी करना आसान नहीं माना जाता, खासकर कुश्ती जैसे कठिन खेल में.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भावनात्मक पहलू अपनी जगह हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेलों में अनुशासन और नियम सबसे ज्यादा मायने रखते हैं. अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय खेल व्यवस्था वैश्विक खेल प्रणाली से जुड़ी हुई है, इसलिए तय प्रक्रियाओं का पालन करना बेहद जरूरी है.

“देश पहले” वाली टिप्पणी क्यों बनी चर्चा का विषय?

सुप्रीम Court की सबसे ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी को लेकर हो रही है जिसमें अदालत ने कहा कि “आपने खेल में बहुत उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन देश पहले है.” इस बयान का सीधा मतलब यह माना जा रहा है कि कोई भी खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे नियमों का पालन करना ही होगा.

अदालत ने यह भी माना कि हाईकोर्ट द्वारा खेल संघ के नियमों को “एक्सक्लूजनरी” यानी भेदभावपूर्ण बताना थोड़ा असामान्य था, क्योंकि ये नियम लंबे समय से सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते रहे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट अब पूरे मामले की गहराई से जांच करना चाहता है.

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल विनेश फोगाट को ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल चुकी है और अब सबकी नजर उनके प्रदर्शन पर रहेगी. अगर वह ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन करती हैं तो एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता खुल सकता है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 जून को तय की है, जहां WFI और विनेश फोगाट दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से चर्चा होगी.

यह पूरा मामला केवल एक खिलाड़ी की वापसी की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय खेल व्यवस्था में नियम, अनुशासन और खिलाड़ियों के अधिकारों के बीच संतुलन की भी बड़ी बहस बन चुका है. अब देखना होगा कि ट्रायल और कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद यह विवाद किस दिशा में जाता है.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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