कौन हैं दक्षिणेश्वर सुरेश? डेविस कप में नीदरलैंड्स को हराकर भारतीय टेनिस की नई सनसनी बने युवा स्टार
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, February 20, 2026
Updated On: Friday, February 20, 2026
बेंगलुरु में खेले गए डेविस कप मुकाबले में दक्षिणेश्वर सुरेश ने भारतीय टेनिस का इतिहास बदल दिया. वर्ल्ड नंबर-6 नीदरलैंड्स को हराने में ‘डीके’ ने तीनों मैच जीतकर अहम भूमिका निभाई. मदुरै से निकले इस युवा खिलाड़ी ने दमदार खेल से खुद को भारतीय टेनिस की नई सनसनी के रूप में स्थापित कर दिया.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Friday, February 20, 2026
Who is Dakshineswar Suresh: भारतीय टेनिस, जो अक्सर ग्रैंड स्लैम या डेविस कप जैसे मंचों पर संघर्ष करता दिखता था, अचानक एक ऐसे चेहरे से रोशन हो उठा जिसने पूरे समीकरण ही बदल दिए. उस चेहरे का नाम है दक्षिणेश्वर सुरेश या फिर टेनिस प्रेमियों की जुबान पर चढ़ चुका नाम, ‘डीके’.
भारतीय टेनिस की नई उम्मीद का उदय
भारतीय टेनिस को लंबे समय से एक ऐसे खिलाड़ी की तलाश थी जो दबाव में भी मैच पलट सके. बेंगलुरु में हुए डेविस कप मुकाबले में यह तलाश पूरी होती दिखी. भारत ने जब वर्ल्ड नंबर-6 नीदरलैंड्स जैसी ताकतवर टीम को 3-2 से हराया, तो यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि भारतीय टेनिस के आत्मविश्वास की वापसी थी. इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे दक्षिणेश्वर सुरेश, जिन्होंने साबित कर दिया कि रैंकिंग हमेशा असली कहानी नहीं बताती.
जब अंडरडॉग ने बदल दी पूरी कहानी
इस मुकाबले से पहले सुरेश को टीम का मुख्य चेहरा नहीं माना जा रहा था. लेकिन रविवार तक आते-आते हालात पूरी तरह बदल चुके थे. ‘डीके’ ने अपने खेले तीनों मुकाबले जीते- दो सिंगल्स और एक डबल्स. खास बात यह रही कि उन्होंने डबल्स मुकाबला युकी भांबरी के साथ मिलकर जीता. निर्णायक पांचवें मैच में जब पूरा देश सांस रोके बैठा था, तब सुरेश ने गाय डी ओडेन को 6-4, 7-6(4) से हराकर भारत की जीत पर अंतिम मुहर लगा दी. आखिरी पॉइंट के बाद कोर्ट पर लेट जाना उस भावनात्मक पल की गवाही था, जहां मेहनत, संघर्ष और सपनों ने एक साथ जीत हासिल की.
कौन हैं दक्षिणेश्वर सुरेश?
तमिलनाडु के मदुरै से ताल्लुक रखने वाले 6 फीट 5 इंच लंबे दक्षिणेश्वर सुरेश आधुनिक टेनिस के पावर-बेसलाइनर खिलाड़ी हैं. उनका खेल तेज सर्विस, आक्रामक फोरहैंड और बेसलाइन से रैलियों पर नियंत्रण बनाने पर आधारित है. पारंपरिक भारतीय वॉली स्टाइल से अलग उनका अंदाज उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल के ज्यादा करीब ले जाता है. यही वजह है कि उनका खेल विदेशी खिलाड़ियों के खिलाफ भी असरदार नजर आता है.
अमेरिकी कॉलेज सिस्टम से डेविस कप तक
सुरेश का सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने अमेरिकी कॉलेज टेनिस सिस्टम में खुद को तराशा. जॉर्जिया ग्विनेट कॉलेज से कई एनएआईए खिताब जीतने के बाद वे वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां एनसीएए डिवीजन-I में खेलते हुए ऑल-अमेरिकन सम्मान हासिल किया. कॉलेज टेनिस के कड़े मुकाबलों ने उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती को नई ऊंचाई दी, जिसका असर डेविस कप में साफ दिखा.
2025-26: करियर का टर्निंग पॉइंट
2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत सुरेश के करियर के लिए बेहद अहम रही. बेंगलुरु ओपन में उन्होंने कई बड़े उलटफेर किए और ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को हराया. जनवरी 2026 तक उनकी रैंकिंग दुनिया में 460 के आसपास पहुंच गई. उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 2025 में आईटीडी मेल प्लेयर ऑफ द ईयर भी चुना गया.
भारतीय टेनिस का भविष्य और ‘डीके’
नीदरलैंड्स के खिलाफ तीन मैच जीतकर दक्षिणेश्वर सुरेश ने खुद को भारतीय टेनिस के नए स्टार के रूप में स्थापित कर लिया है. इस जीत ने न सिर्फ टीम को क्वालिफायर राउंड-2 में पहुंचाया, बल्कि फैन्स को एक ऐसा नाम दे दिया है, जिस पर आने वाले वर्षों में सबकी नजर रहने वाली है. ‘डीके’ अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उस उम्मीद का नाम है, जो भारतीय टेनिस को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सपना दिखा रही है.
यह भी पढ़ें :- T20 World Cup 2026 सुपर-8 शेड्यूल: कब-किससे भिड़ेगी टीम इंडिया, ऑस्ट्रेलिया बाहर, जिम्बाब्वे की एंट्री से बदला खेल
यह भी पढ़ें
news via inbox
समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।













