रामपुर से दिल्ली तक ED का एक्शन, आजम खान से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी, क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का मामला?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, August 19, 2026

Updated On: Wednesday, August 19, 2026

आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी

ED ने सपा नेता आजम खान से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के 10 ठिकानों पर तलाशी ली. जांच का केंद्र जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और सरकारी ठेकों से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन हैं. एजेंसी मनी ट्रेल, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. 

Authored By: Nishant Singh

Updated On: Wednesday, August 19, 2026

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan ED Raid) से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक साथ कई शहरों में कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में करीब 10 ठिकानों पर तलाशी ली. यह जांच मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर चल रही है. ED की इस कार्रवाई के बाद सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम, ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के बीच हुए लेन-देन तथा कथित फंड डायवर्जन की जांच तेज हो गई है.

किन-किन जगहों पर पहुंची ED की टीम?

ED ने PMLA के तहत अलग-अलग परिसरों की तलाशी ली. जांच के दायरे में रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी के अलावा कुछ कारोबारी प्रतिष्ठान, चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़े कार्यालय और आवास तथा मामले से संबंधित अन्य लोगों के ठिकाने शामिल बताए गए हैं. सहारनपुर और दिल्ली में भी एजेंसी ने संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े परिसरों की जांच की. इस दौरान अधिकारियों ने वित्तीय कागजात, कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा खंगाला.

सरकारी ठेकों से आया पैसा बना जांच का केंद्र

ED की जांच में सबसे अहम सवाल सरकारी ठेकों से मिलने वाली रकम को लेकर है. एजेंसी को कथित तौर पर आशंका है कि कुछ निजी ठेकेदारों के माध्यम से प्राप्त धन को दूसरे रास्तों से जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों तक पहुंचाया गया. अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अलग-अलग खातों और संस्थाओं के बीच रकम का प्रवाह किस तरह हुआ और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था.

निर्माण और संपत्तियों से भी जुड़ी पड़ताल

मामले की जांच केवल बैंक लेन-देन तक सीमित नहीं है. ED कथित तौर पर यह भी देख रही है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों तथा निर्माण गतिविधियों में धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया. जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित फंड ट्रांसफर का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था और उसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही.

अब ED की जांच किस दिशा में बढ़ेगी?

ताजा छापेमारी को जांच में मनी ट्रेल यानी पैसे के पूरे रास्ते का पता लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. एजेंसी यह समझना चाहती है कि धन का स्रोत क्या था, वह किन माध्यमों से आगे पहुंचा और उसका इस्तेमाल कहां किया गया. हालांकि, ED की ओर से जांच में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. अब तलाशी में मिले दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य इस मामले में आगे की कार्रवाई का आधार बन सकते हैं.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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