States News
Delhi Blast Mastermind: लाल किले धमाके की स्क्रिप्ट लिखने वाला मौलवी कौन? जांच में चौंकाने वाले खुलासे
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Tuesday, November 18, 2025
Last Updated On: Tuesday, November 18, 2025
दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके की जांच अब नए मोड़ ले रही है. पुलिस और जांच एजेंसियों के हाथ ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि धमाके की पूरी स्क्रिप्ट एक कश्मीरी मौलवी ने तैयार की थी. यह वही शख्स है जिसने डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह पर धकेला और उन्हें आतंकी मॉड्यूल में बदल दिया. आखिर कौन है यह मौलवी? कैसे बुनी गई थी यह खतरनाक साजिश? पढ़िए पूरी कहानी..
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Tuesday, November 18, 2025
Delhi Blast Mastermind: लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके ने दिल्ली को हिलाकर रख दिया था. शुरुआत में यह एक साधारण ब्लास्ट लगा, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी बड़े आतंकी नेटवर्क से जुड़ती चली गई. अब इस मामले में जिस नाम ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है, वह है इरफान अहमद, जम्मू-कश्मीर के शोपियां का एक मौलवी, जिसकी भूमिका इस पूरी साजिश में बेहद अहम मानी जा रही है.
जांच में सामने आया है कि डॉक्टरों का एक पूरा ग्रुप उसकी विचारधारा से प्रभावित होकर कट्टरपंथी बना और इन्हीं लोगों ने ब्लास्ट की तैयारी से लेकर हथियार जुटाने तक कई बड़े कदम उठाए. फरीदाबाद से बरामद 2950 किलो विस्फोटक, टेलिग्राम ग्रुप्स, दो साल की गुप्त बातचीत और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कनेक्शन, हर सुराग उसी मौलवी की ओर इशारा करता है, जो अब Delhi Blas केस की कहानी का केंद्र बन चुका है.
आखिर कैसे अस्पताल में हुई एक मुलाकात आतंकी गठजोड़ में बदल गई? कैसे डॉक्टरों का यह समूह “ह्यूमन बॉम्ब” जैसा नेटवर्क बन गया? और किस तरह ‘मैडम सर्जन’ से लेकर उमर तक सभी इसी मौलवी के प्रभाव में आए? ये लेख उसी साजिश की परत-दर-परत खुलती कहानी है, जिसने दिल्ली को दहलाया और जांच एजेंसियों को एक बड़े मॉड्यूल का पता दिया.
मौलवी इरफान अहमद से मुलाकात की कहानी
शकील के पास से फरीदाबाद में 2950 किलो विस्फोटक मिला था. इसमें वही अमोनियम नाइट्रेट भी था, जिसका इस्तेमाल कार ब्लास्ट में हुआ. यह ब्लास्ट उमर ने किया था. शकील और उमर की पहली मुलाकात मौलवी इरफान से 2023 में हुई थी. उस वक्त मौलवी एक मरीज को लेकर श्रीनगर के सरकारी अस्पताल जा रहा था. मरीज कौन था, और उसका इस साजिश से कोई रिश्ता था या नहीं, यह अभी तक साफ नहीं है.
मुलाकात के बाद तीनों ने एक-दूसरे के फोन नंबर सेव किए. फिर दो साल तक कॉल और मैसेज पर बातचीत चलती रही. धीरे-धीरे यह बातचीत कट्टरपंथ की तरफ मुड़ गई. मौलवी ने इन दोनों को इतना उकसाया कि आखिरकार उमर ब्लास्ट करने तक पहुंच गया.
शकील और उमर ने अपने साथियों को भी जोड़ा
शकील और उमर यहीं नहीं रुके. उन्होंने अपने कुछ साथियों को भी इस मौलवी से मिलवाया. बाद में इन सबने टेलिग्राम पर चैट के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलानी शुरू कर दी. इनका लक्ष्य था- अपने पूरे ग्रुप को चरमपंथ की ओर धकेलना.
जांच में यह भी सामने आया कि मौलवी इरफान ने दक्षिण कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से इनकी मीटिंग करवाई. माना जा रहा है कि लाल किले के पास हुए धमाके की कहानी यहीं से शुरू हुई थी. जैश के आतंकियों ने इन “डॉक्टरों” को दो असॉल्ट राइफल्स भी दी थीं.
इन्हीं में से एक राइफल शाहिना सईद की मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिज़ायर से मिली. सईद को उनके कोड नेम “मैडम सर्जन” के नाम से पहचाना जा रहा है. जांच एजेंसियों का शक है कि वह जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ से जुड़ी है. यह शाखा जैश के संस्थापक ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनाई थी.
राठेर की गिरफ्तारी के बाद खुला राज
दूसरी राइफल जीएमसी श्रीनगर के डॉक्टर आदिल अहमद राठेर के लॉकर से मिली. राठेर की हरकतों ने ही इस पूरी साजिश का धागा पकड़ा. वह नौगाम में जैश के समर्थन में पोस्टर लगाते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ था.
इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई. राठेर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने पूरी साजिश के बारे में बताया. उसके खुलासे के बाद ही शकील पकड़ा गया, विस्फोटक बरामद हुए और शाहिना सईद की पहचान सामने आई.
यह भी पढ़ें :- Delhi Blast: यूज हुई पुरानी कारें खरीदने से पहले चेक कर लें ये जरूरी डिटेल्स, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान















