मणिपुर में बढ़ा जातीय तनाव, कुकी और नागा समुदायों के बीच टकराव ने बढ़ाई चिंता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, May 23, 2026
Updated On: Saturday, May 23, 2026
Manipur में कुकी और नागा समुदायों के बीच जातीय तनाव फिर बढ़ गया है. चर्च नेताओं की हत्या, अपहरण और आर्थिक नाकेबंदी के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं. कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि दोनों समुदाय एक-दूसरे पर हिंसा और हमलों के आरोप लगा रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Saturday, May 23, 2026
Manipur Ethnic Tension: मणिपुर एक बार फिर जातीय तनाव की आग में झुलसता नजर आ रहा है. लंबे समय से जारी हिंसा के बीच अब कुकी और नागा समुदायों के बीच टकराव ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है. चर्च नेताओं की हत्या के बाद शुरू हुई घटनाओं ने पूरे राज्य में डर और अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है.
तनाव की शुरुआत 13 मई को हुई, जब नोनी जिले के कोटजिन-कोटलेन इलाके और जौजांगटेक गांव के पास अज्ञात हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया. इस हमले में तीन चर्च नेताओं और एक आम नागरिक की मौत हो गई. घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए और हालात तेजी से बिगड़ते चले गए.
अपहरण की घटनाओं ने बढ़ाई बेचैनी
हमले के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों से बड़ी संख्या में लोगों के अपहरण की खबरें सामने आईं. अधिकारियों के अनुसार 38 से ज्यादा लोगों को अगवा किया गया था, जिनमें कुकी और लियांगमाई नागा समुदाय के लोग शामिल थे.
प्रशासन ने अब तक 31 लोगों को सुरक्षित छुड़ाने का दावा किया है. इनमें कई महिलाएं, नागरिक और धार्मिक संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं. हालांकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे दोनों समुदायों में डर और गुस्सा लगातार बढ़ रहा है.
वहीं कुकी समुदाय के प्रमुख संगठन ने आरोप लगाया है कि उनके कई नागरिक अब भी नागा समूहों की हिरासत में हैं. दूसरी तरफ नागा संगठनों ने भी अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. दोनों समुदाय लगातार एक-दूसरे पर हमले और अपहरण के आरोप लगा रहे हैं.
आर्थिक नाकेबंदी से थमी जिंदगी
तनाव बढ़ने के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में आर्थिक नाकेबंदी शुरू हो गई है. कुकी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद करने का ऐलान किया, जिसके जवाब में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी अंतर-जिला नाकेबंदी शुरू कर दी.
सबसे ज्यादा असर नेशन Set featured image ल हाईवे-2 पर देखने को मिला, जहां सैकड़ों ट्रक, बसें और जरूरी सामान ले जाने वाले वाहन फंस गए. इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है. बाजारों में जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
नाकेबंदी का असर:
- कई जिलों में जरूरी सामान की कमी बढ़ी
- यात्री बसें और ट्रक घंटों फंसे रहे
- छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों की परेशानी बढ़ी
- आम लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना
सरकार की अपील और बढ़ती राजनीतिक हलचल
Manipur के मुख्यमंत्री N. Biren Singh ने लोगों से शांति बनाए रखने और बंद-नाकेबंदी से बचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शनों का सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को होता है. मुख्यमंत्री ने बातचीत और आपसी समझ से समाधान निकालने पर जोर दिया.
इसी बीच इंफाल वेस्ट जिले में मैतेई और नागा समुदाय के कई संगठनों ने संयुक्त प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने लापता लोगों को जल्द सुरक्षित छुड़ाने की मांग उठाई और सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
उग्रवाद और अविश्वास ने बढ़ाई मुश्किलें
प्रदर्शनकारियों ने कुछ उग्रवादी संगठनों पर स्वदेशी समुदायों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में लंबे समय से चल रहे जातीय तनाव, राजनीतिक अविश्वास और उग्रवादी गतिविधियों ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है. हर नई घटना पुराने घावों को और गहरा कर रही है.
फिलहाल राज्य में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और लोग शांति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं. सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भरोसा कायम करने और हिंसा को रोकने की है.
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