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पुतिन के बाद अब जेलेंस्की की एंट्री, दिल्ली में शुरू हो रहा है असली कूटनीतिक खेल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, December 8, 2025
Last Updated On: Monday, December 8, 2025
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत एक बार फिर अपनी सधी कूटनीति से दुनिया का ध्यान खींच रहा है. पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के तुरंत बाद अब भारत यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को बुलाने की तैयारी कर रहा है. यह कदम दिखाता है कि नई दिल्ली दोनों पक्षों से समान दूरी रखते हुए शांति की राह खोजने में सक्रिय भूमिका निभा रही है. भारत का बैलेंसिंग एक्ट अब और मजबूत होता दिख रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, December 8, 2025
Ukraine Russia Diplomacy: रूस-यूक्रेन युद्ध भले ही भारत से हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन इसके असर ने नई दिल्ली की विदेश नीति को लगातार चुनौती दी है. पुतिन के सफल भारत दौरे के तुरंत बाद अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के संभावित दिल्ली आगमन की चर्चा तेज हो गई है. यह कदम भारत की उस संतुलित कूटनीति को और मजबूत करता है, जिसमें वह दोनों पक्षों से बराबर संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
भारत की बैलेंसिंग डिप्लोमेसी
पुतिन के दिल्ली दौरे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई संकेत दिए. इसके ठीक बाद भारत ने यूक्रेन से संपर्क बढ़ाकर स्पष्ट कर दिया कि उसकी नीति किसी एक पक्ष के समर्थन की नहीं, बल्कि शांति स्थापित करने की है. इंडियन एक्सप्रेस की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि भारत कई हफ्तों से यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के साथ बातचीत कर रहा है, और यह प्रक्रिया पुतिन के दौरे से पहले ही शुरू हो चुकी थी. यही वजह है कि अब जनवरी 2026 में जेलेंस्की की यात्रा की तैयारी दिखाई दे रही है, हालांकि तारीख अभी तय नहीं है.
नई दिल्ली और कीव के बीच बढ़ते संवाद
यूक्रेन के राष्ट्रपति का भारत दौरा बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि ऐसा मौका इतिहास में सिर्फ तीन बार आया है कि 1992, 2002 और 2012. अगस्त 2024 में जब पीएम मोदी यूक्रेन गए थे, तब से दोनों देशों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हुआ. इसके पहले जुलाई 2024 में पीएम मोदी मॉस्को गए थे और पुतिन से मुलाकात की थी. यह सिलसिला दिखाता है कि भारत युद्ध के दोनों तरफ बराबर संवाद बनाए रखने की नीति पर दृढ़ है.
जेलेंस्की की यात्रा पर क्या-क्या निर्भर करेगा?
जेलेंस्की के संभावित दौरे का समय सिर्फ भारत-यूक्रेन संबंधों पर नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा. इसमें सबसे अहम है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित शांति योजना का भविष्य और युद्ध के मैदान की स्थिति. इसके अलावा यूक्रेन की घरेलू राजनीति भी इस यात्रा को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि ज़ेलेंस्की की सरकार इस समय बड़े भ्रष्टाचार मामले के दबाव में है.
पुतिन की यात्रा पर यूरोप की निगाहें
पुतिन की भारत यात्रा को लेकर यूरोपीय देशों ने काफी चिंता जताई थी. कई यूरोपीय दूतों ने भारत से आग्रह किया कि वह पुतिन पर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ाए. लेकिन भारत ने दो टूक कहा कि वह युद्ध में किसी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि समाधान का रास्ता तलाश रहा है. पीएम मोदी ने भी पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान स्पष्ट कहा था, “भारत तटस्थ नहीं है, भारत शांति के पक्ष में है.”
2022 से लगातार संवाद जारी
यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने खुद को संवाद का सेतु बनाए रखा. प्रधानमंत्री मोदी ज़ेलेंस्की से आठ बार फोन पर बात कर चुके हैं और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों नेता कई बार मिल चुके हैं. अगस्त 2024 में यूक्रेन दौरे पर पीएम मोदी ने साफ कहा था कि भारत युद्ध से दूर है, पर न्यूट्रल नहीं, भारत हर कीमत पर शांति चाहता है.
भारत की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर
युद्ध ने भारत की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया है. रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना भारत की जरूरत थी, पर इसके जवाब में अमेरिका ने भारत पर 25% पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया. इसके बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी. यह मामला दिखाता है कि जंग का प्रभाव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
निष्कर्ष: भारत की सधी चाल जारी
जेलेंस्की के संभावित भारत दौरे के संकेत साफ करते हैं कि नई दिल्ली अपनी कूटनीति को और सक्रिय करने वाली है. एक ओर पुतिन से संवाद, दूसरी ओर जेलेंस्की के साथ बातचीत भारत वैश्विक राजनीति में खुद को शांति निर्माता की भूमिका में स्थापित करना चाहता है. रूस और यूक्रेन के बीच सेतु बनकर भारत न सिर्फ भू-राजनीतिक संतुलन साध रहा है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दे रहा है कि युद्ध नहीं, संवाद ही आगे बढ़ने का रास्ता है.
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