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UN सुरक्षा परिषद में कठघरे में अमेरिका: मादुरो गिरफ्तारी पर चीन ने बोल सीधा हमला
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, January 6, 2026
Last Updated On: Tuesday, January 6, 2026
मादुरो का मामला अब केवल न्यूयॉर्क की अदालत में नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की राजनीति में भी चल रहा है. आने वाले दिनों में यह देखा जाना बाकी है कि सुरक्षा परिषद की यह बहस किसी ठोस कूटनीतिक दिशा में बदलती है या नहीं. या फिर यह भी इतिहास के उन अध्यायों में शामिल हो जाएगी, जहां चेतावनियां तो दी गईं, लेकिन दुनिया ने उनसे सबक नहीं लिया.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Tuesday, January 6, 2026
UN Security Council: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कक्ष आज (6 दिसंबर को) असामान्य रूप से भारी माहौल में डूबा हुआ था. एजेंडे पर औपचारिक रूप से कोई युद्ध नहीं था. लेकिन बहस की गंभीरता और तीखापन किसी अंतरराष्ट्रीय संकट से कम भी नहीं थी.
मुद्दा था, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई के तहत हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क लाया जाना. उन पर नशीले पदार्थों से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलाना. इस घटना ने न सिर्फ लैटिन अमेरिका बल्कि वैश्विक राजनीति में संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और महाशक्तियों की भूमिका पर एक नई बहस छेड़ दी है.
सुरक्षा परिषद की आपात बैठक
चीन और रूस के समर्थन से कोलंबिया के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है. इस आपात बैठक में अमेरिका के फैसले की वैधता पर सीधा सवाल उठ रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि किसी संप्रभु देश के मौजूदा राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेना एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है. सुरक्षा परिषद में बहस के केंद्र में यही चिंता रही.
चीन ने किया विरोध
सुरक्षा परिषद की बैठक में भी चीन ने अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया है. बैठक को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी मिशन सन लेई ने अमेरिका की कार्रवाई पर गहरी निंदा व्यक्त की है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, ‘इतिहास के सबक हमें चेतावनी देते हैं कि सैन्य साधनों से समस्याओं का समाधान नहीं होता.’
उन्होंने आगे कहा कि बल का अंधाधुंध इस्तेमाल केवल बड़े संकटों को जन्म देता है. चीन के इस बयान को अमेरिका की वैश्विक भूमिका पर एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया.
- UN सुरक्षा परिषद अमेरिका द्वारा मादुरो को हिरासत में लेने की वैधता पर बहस कर रही है.
- चीन ने वेनेजुएला में US की कार्रवाई की निंदा की.
- चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने US पर ‘दुनिया के जज’ की तरह काम करने का लगाया था आरोप.
- US की कार्रवाई के खिलाफ वैश्विक राय जुटाने में चीन की भूमिका होगी अहम.
चीनी विदेश मंत्री वांग की तीखी प्रतिक्रिया
इससे पहले बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी अप्रत्यक्ष लेकिन तीखे शब्दों में वाशिंगटन पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि चीन कभी यह नहीं मानता कि कोई देश ‘दुनिया की पुलिस’ या ‘दुनिया का जज’ बन सकता है. वांग यी की यह टिप्पणी उस समय आई थी, जब 3 दिसंबर को हथकड़ी लगाए और आंखों पर पट्टी बांधे मादुरो की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं थीं.
मादुरो का यह दृश्य सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान भी कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने उठाया और उसकी निंदा की.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने किया बचाव
अमेरिका की ओर से दलील दी गई कि मादुरो पर लगे आरोप अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े हैं. एक न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है. लेकिन परिषद के कई सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या किसी देश को दूसरे देश के राष्ट्रपति को इस तरह हिरासत में लेने का अधिकार है. वह भी बिना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के.
यह प्रश्न खासतौर पर उन विकासशील देशों के लिए अहम है, जो अपने यहां लंबे समय से दूसरे देशों के हस्तक्षेप को झेलते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून अहम
चीन ने इस बहस में अपनी पुरानी नीति ‘गैर-हस्तक्षेप’ को एक बार फिर केंद्र में रखा. बीजिंग का तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों की ‘संप्रभुता और सुरक्षा’ समान रूप से संरक्षित होनी चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिगत अमेरिका की कार्रवाई न केवल वेनेजुएला बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए एक चुनौती है.
चीन की परीक्षा
विश्लेषक एवं अंतरराष्ट्रीय जानकार मानते हैं कि सुरक्षा परिषद में यह बहस चीन के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है. वेनेजुएला चीन के ‘हर मौसम के’ रणनीतिक साझेदारों में से एक है.
चीन ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एरिक ओलैंडर का मानना है कि बीजिंग इस समय वेनेजुएला को बड़े पैमाने पर भौतिक समर्थन नहीं दे सकता, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर उसकी आवाज बेहद अहम है. संयुक्त राष्ट्र और विकासशील देशों के बीच अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ राय बनाने में चीन की भूमिका निर्णायक हो सकती है.
लैटिन अमेरिका और चीन
इस बहस का एक और आयाम लैटिन अमेरिका में चीन की दीर्घकालिक रणनीति से जुड़ा है. पिछले दो दशकों में कई लैटिन अमेरिकी देशों ने ताइवान से संबंध तोड़कर बीजिंग को मान्यता दी है.
वेनेजुएला इस सूची में सबसे पुराने और करीबी सहयोगियों में रहा है. ह्यूगो शावेज़ के दौर से शुरू हुआ यह रिश्ता मादुरो के समय में भी कायम रहा है. अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने निवेश और व्यापार के ज़रिए वेनेजुएला को आर्थिक सहारा दिया है.
बिना ठोस प्रस्ताव के बैठक खत्म
सुरक्षा परिषद की बैठक बिना किसी ठोस प्रस्ताव के समाप्त हुई. लेकिन इस बहस ने कई सवाल छोड़ दिए हैं. क्या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में महाशक्तियों को अपनी मनमानी कार्रवाई का अधिकार है? क्या संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल बहस तक सीमित रह जाएगी? और सबसे अहम सवाल यह कि क्या यह घटना भविष्य में कमजोर देशों के लिए एक नई असुरक्षा का संकेत है?
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