Special Coverage
India Global Hub: भारत बनेगा नया चीन, टैरिफ कट के बाद अमेरिका का बड़ा दांव, पानी की तरह डॉलर बहाएंगे ट्रंप
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, February 5, 2026
Last Updated On: Thursday, February 5, 2026
India Global Hub: अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों के साथ नया क्रिटिकल मिनरल्स गठबंधन बनाकर चीन की मोनोपोली को सीधी चुनौती दी है. इस पहल के तहत भारत को ग्लोबल प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग हब बनाने की तैयारी है. अमेरिका करीब 30 अरब डॉलर का निवेश करेगा और टैरिफ कटौती से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सेमीकंडक्टर निर्यात को बड़ी रफ्तार मिलेगी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, February 5, 2026
India Global Hub: एक समय था जब दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था तेल के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. आज की असली ताकत है क्रिटिकल मिनरल्स- लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स. इलेक्ट्रिक गाड़ियां हों, मोबाइल फोन हों या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सबकी रीढ़ यही खनिज हैं. इसी दौड़ में अब अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो सीधे चीन की बादशाहत को चुनौती देता है और भारत को ग्लोबल हब बनाने की ओर ले जाता है.
54 देशों का नया खनिज गठबंधन, भारत केंद्र में
वॉशिंगटन में हुई 2026 क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों के साथ मिलकर एक नया अंतरराष्ट्रीय खनिज समूह बनाने का ऐलान किया. इस गठबंधन का साफ मकसद है- चीन की उस पकड़ को कमजोर करना, जो फिलहाल दुनिया की लगभग 90 फीसदी रेयर अर्थ सप्लाई पर नियंत्रण रखता है. बैठक में अमेरिका के शीर्ष नेता मौजूद थे, वहीं भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भागीदारी ने यह साफ कर दिया कि भारत इस नई रणनीति का अहम चेहरा बनने जा रहा है.
FORGE और Pax Silica: चीन से दूरी, भरोसेमंद देशों से दोस्ती
इस पहल के तहत दो बड़े मंच बनाए गए हैं. पहला मंच FORGE है, जो पहले की मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप की जगह लेगा और खनिजों की सप्लाई व कीमतों को स्थिर रखने पर काम करेगा. इसकी जिम्मेदारी फिलहाल दक्षिण कोरिया को सौंपी गई है. दूसरा मंच Pax Silica है, जिसका फोकस सेमीकंडक्टर, एआई और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई को चीन से हटाकर भरोसेमंद देशों तक पहुंचाना है. यहां भारत को एक मजबूत स्तंभ माना जा रहा है.
30 अरब डॉलर का दांव, भारत बनेगा प्रोसेसिंग हब
इस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलने वाला है. अमेरिका ने साफ कहा है कि वह चीन की जगह भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों में खनिज खनन और रिफाइनिंग के लिए करीब 30 अरब डॉलर का निवेश करेगा. इसका मतलब यह है कि भारत अब सिर्फ कच्चा माल खरीदने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि खनिजों को साफ करने, प्रोसेस करने और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए तैयार करने का वैश्विक केंद्र बनेगा. इससे लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी और मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार मिलेगी.
टैरिफ में कटौती, भारतीय निर्यात को पंख
इससे पहले अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था. इसका सीधा असर भारत में बनी बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों पर पड़ेगा. कम टैक्स का मतलब है- अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ता और ज्यादा प्रतिस्पर्धी. इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान मिलेगी.
Project Vault और भारत का सुनहरा भविष्य
अमेरिका ने Project Vault की भी घोषणा की है, जिसके तहत एक रणनीतिक खनिज भंडार तैयार किया जाएगा ताकि किसी वैश्विक संकट या सप्लाई रुकने की स्थिति में फैक्ट्रियों का काम न थमे. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वही देश सुपरपावर बनेगा, जिसके पास लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे खनिजों पर मजबूत पकड़ होगी. इस दौड़ में भारत अब सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि गेम-चेंजर बनता दिख रहा है.
यह भी पढ़ें :- World Responsible Nations Index 2026: जिम्मेदार देशों की रैंकिंग में अमेरिका-चीन बाहर, भारत किस स्थान पर पहुंचा?















